मगध महाजनपद अखंड भारत की परिकल्पना को सिद्ध करता है इतने कौशल वत्स तथा अवंती को पराजित कर एक नए मगध की नींव रखी!
मगध में राजवंश का उदय-
मगध में तीन राजवंश थे परंतु पुराणों के अनुसार चार राजवंश थे-
1. ब्रहद्रथ 2. हर्यक 3. शिशुनाग 4.नंद
1.हर्यक वंश-
इस वंश को मगध का वास्तविक वंश माना जाता है इसके संस्थापक हर्यक थे!
इस वंश को पित्र हंता वंश कहा जाता है!
✴️ बिंबिसार-
इस वर्ष का एक शासक बिंबिसार था जिसने अपनी राजधानी राजगृह या गिरीब्रज बनाई!
जैन साहित्य में इसे श्रेणिक कहा गया!
इतने विवाह नीति द्वारा राज्य का विस्तार किया!
इसका पहला विवाह लिच्छवि की राजकुमारी चेलना के साथ हुआ जिससे पुत्र अजातशत्रु का जन्म हुआ!
इसका दूसरा विवाह मोडरा (मंद्र) की राजकुमारी क्षेमा से हुआ!
इसका तीसरा विवाह कौशल की राजकुमारी महाकौशला देवी से हुआ और दहेज में इसे काशी गांव मिला!
Note- भारतीय इतिहास का पहला दहेज का उदाहरण बिंबिसार तथा महाकौशला देवी का विवाह है!
😂 महावग्ग नामक ग्रंथ के अनुसार बिंबिसार की 500 रानियां थी!
Important- बिंबिसार का राज वैद्य जीवक था जो अवंती नरेश चंडप्रघोत के पांडुरोग अर्थात पीलिया के इलाज के लिए गया था!
बिंबिसार की हत्या उसके पुत्र अजातशत्रु ने की!
✴️ अजातशत्रु-
इसे कुनिक या लिच्छिवी दौहित्र कहा जाता है!
Important- वैशाली(लिच्छवी) विश्व का पहला गणतंत्र वाला राज्य था!
इसी के समय में सप्तपर्णी गुफाएं में प्रथम बौद्ध संगीति हुई!
इसकी हत्या इसके पुत्र उदायनी ने की!
✴️ उदायनि-
पुराणों के अनुसार किसने गंगा तथा सोन संगम में कुसुमपुर या पुष्पपुर की स्थापना की जिसे पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता है!
इसने पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी भी बनाया!
इसने जैन धर्म को अपनाया था! परंतु अजातशत्रु बौद्ध धर्म का अनुयाई था!
इस वंश का अंतिम शासक नाग दशक था जिसकी हत्या शिशुनाग ने की थी!
2. शिशुनाग वंश-
इसका संस्थापक शिशुनाग था जिसने अपनी राजधानी वैशाली बनाई!
✴️ कालाशोक-
इसने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र बनाई!
इसे पुराणों में काकवर्ण कहा गया
यह बौद्ध धर्म का अनुयाई था इसके समय में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में हुआ!
इस वंश का अंतिम राजा नंदी वर्धन था!
3. नंद वंश-
इस वंश को इतिहास का प्रथम अनार्य वंश या क्षत्रीय वंश कहते हैं!
याद रखे- पुष्यमित्र शुंग को अनार्य कहते है!
नंद वंश का संस्थापक महापदमनंद था
✴️महापदमनंद-
इसे भार्गव द्वितीय परशुराम एकराट एकच्छत्र सर्वक्षत्राहंतक के नाम से भी जाना जाता है!
✴️ घनानंद-
यह एक अत्याचारी राजा था जो जैन धर्म को मानता था!
इसे जेनोफोन की बुक में अग्रमीज कहा गया है!
यह सिकंदर का समकालीन था इस वंश का अंतिम शासक भी यही था जिसे चाणक्य की मदद से चंद्रगुप्त ने पराजित किया और मौर्य वंश की नींव रखी!
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