Thursday, March 31, 2022

भारत में गुप्त वंश का उदय( प्राचीन भारत इतिहास भाग-13)

           ✴️ गुप्त वंश(275-550ई.)✴️
गुप्त काल भारत में विकेंद्रीकरण का काल था! 
गुप्त काल में भारत में सामंतवाद का उदय हुआ! 
गुप्त काल को वैदिक धर्म के पुनरुत्थान का काल भी कहते हैं! 
✴️ गुप्त वंश का वर्ण-
किसी भी अभिलेख में इनके वर्ण का उल्लेख नहीं है परंतु गोत्र का उल्लेख है! 
प्रभावती गुप्त अपने अभिलेख में अपने आप को धारण गोत्र का बताया है
स्कंद पुराण के अनुसार धारण  ब्राह्मण गोत्र है परंतु इतिहास का इन्हें क्षत्रिय मानते हैं! 

✴️ गुप्त वंश का मूल स्थान-
इत्सिंग   के अनुसार इनका मूल स्थान बंगाल था
श्री राम गोथल के अनुसार उनका मूल स्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश था! 
विष्णु पुराण वायु पुराण के अनुसार इनका मूल स्थान मगध था! 

📀 श्री गुप्त(240-280ई.)
इसे गुप्त वंश का संस्थापक माना जाता है
प्रभावती के ताम्रपत्र में इसे आदिराज कहा गया है
इत्सिंग के विवरण में इसके द्वारा एक मंदिर को 24 गांव दान देने का उल्लेख भी है! 
इसकी उपाधि महाराज की थी परंतु यह एक स्वतंत्र शासक नहीं था! 
📀 महाराज श्री घटोत्कच-
स्कंदगुप्त के रीवा (मध्य प्रदेश) से प्राप्त लेख सुपिया लेख से  गुप्त वंश की वंशावली महाराज श्री घटोत्कच से मानी गई है! 
📀 चंद्रगुप्त प्रथम-
यह गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है! 
इतने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी
इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी
इसे द्वितीय मगध साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है! 
इसने लिच्छवि राजकुमारी कुमार देवी से विवाह किया और वैशाली को प्राप्त किया! 
चंद्रगुप्त प्रथम ने सर्वप्रथम बार गुप्त वंश में चांदी के सिक्के चलाए थे! 
इसने 319 ईसवी में गुप्त संवत चलाया था! 
इस के पुत्र का नाम समुद्रगुप्त था! 
✴️ समुद्र गुप्त(350-375 ई.) 
इनकी उपाधि थी- लिच्छवी दौहीत्र
इतिहासकार विंसेंट स्मिथ ने इन्हें भारत का नेपोलियन कहा है! 
समुद्रगुप्त की जानकारी के साधन-
प्रयाग प्रशस्ति-
इसे  इलाहाबाद प्रशस्ति या API लेख कहा जाता है! 
इस प्रसस्ति को समुद्रगुप्त की आत्मकथा भी कहा जाता है
इसके रचनाकार हरिसेण थे
इस प्रशस्ति  के पत्थर को तिलहर भट्ट ने खुदवाया था! 
इसकी भाषा संस्कृत तथा शैली चंपू थी! 
एरण स्तभलेख- 
यह स्तंभलेख मालवा(mp) से प्राप्त हुआ है! 
इस लेख में समुद्रगुप्त की पत्नी दत्त देवी का नाम उल्लेखित है
प्रभावती गुप्त इसकी पौत्री थी जिसने पुना अभिलेख में इसके द्वारा करवाए गए अश्वमेध यज्ञ का वर्णन किया है! 

समुद्रगुप्त ने छह प्रकार के सिक्के चलाए थे-
1. गरुड प्रकार के सिक्के
2. धनुरधारी प्रकार के सिक्के
3. वीणावादन प्रकार के सिक्के
4. आश्वमेघ प्रकार के सिक्के
5. परशु प्रकार के सिक्के
6. व्यांघ्रहनन प्रकार के सिक्के

✴️ समुद्रगुप्त की विजय-
आर्यव्रत के प्रथम युद्ध में समुद्रगुप्त ने उत्तर भारत की तीन शक्तियां (अच्युत,नागसेन, कोतुजुजला) को पराजित किया! 
समुद्रगुप्त ने दक्षिण भारत के 12 राज्यों को हराया था
आर्यव्रत के द्वितीय युद्ध में उत्तर भारत के 9 राज्यों को हराया ताम्रपत्र इससे परम भागवत कहा गया! 


🌅 चंद्रगुप्त द्वितीय-
इसे चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है! 
इसके काल को गुप्त काल का स्वर्ण काल कहा जाता है! 
विशाखदत्त के ग्रंथ देवीचंद्रगुप्तम् के अनुसार इसने अपने भाई को मारकर शासक  बना था
📀 वैवाहिक संबंध नीति-
नागवंश की राजकुमारी कुबेरनागा से प्रभावती का जन्म हुआ प्रभावती के पुना अभिलेख से समुद्रगुप्त द्वारा कराए गए अश्वमेघ का पता चलता है! 
प्रभावती का विवाह विदर्भ के राजा रूद्रसेन से हुआ था
✴️ चंद्रगुप्त द्वितीय के प्रमुख अभिलेख-
लोह स्तंभ लेख (दिल्ली)-  इस अभिलेख से चंद्रनामा राजा का वर्णन मिलता है! 
सांची लेख- इस लेख से शकों को पराजित करने का वर्णन मिलता है तथा सकारी की उपाधि धारण करने का वर्णन भी मिलता है! 
उदयगिरी भोपाल लेख (मध्य प्रदेश) तथा मथुरा लेख चंद्रगुप्त द्वितीय के विषय में जानकारी देता है! 
चंद्रगुप्त द्वितीय के अन्य देवगुप्त देवराज देवश्री था! 
किसके शासनकाल में (399-1414ई.) दरबार में फाहियान आया था जिसकी पुस्तक फो यू की थी! 
चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में नवरत्न-
1. कालिदास-
इसे भारत का शेक्सपियर भी कहा जाता है! 
इसके महाकाव्य रघुवंश व कुमारसंभव थे! 
इसके खंडकाव्य  मेघदूत और ऋतुसंहार थे! 
इसके नाटक अभिज्ञानशाकुंतलम् मालविकाग्निमित्र विक्रमोवंशीयम थे! 
2. धनवंतरी-
यह एक चिकित्सक था जिसने नवनीतकम पुस्तक लिखी थी! 
3. वरामिहीर- 
यह एक ज्योतिषयज्ञ था जिसने पंचसिद्धांतिका लघुजातक, वृहतसंहिता पुस्तकों की रचना की है
4. अमर सिंह- इसने अमरकोश की रचना की है! 
वरुधि, शंकु, बेताल भट्ट, रक्टटकारपर जैसे विद्वान भी इसके नवरत्न में शामिल थे! 

✴️ कुमारगुप्त-
इसके सिक्कों मे  गरुड़ के जगह मयूर का चिन्ह बना था! 
नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण किसने कराया था! 
इसने अश्वमेध यज्ञ का भी आयोजन कराया था! 
इसने महेंद्रादित्य की उपाधि धारण की थी! 

✴️ स्कंदनगुप्त-
यह गुप्त वंश का अंतिम प्रतापी राजा था! 
इसके समय हुण आक्रमण हुआ था जिसका नेतृत्व खुशनवाज ने किया था! 
जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार इसके गवर्नर प्रणदत्त के पुत्र चक्रपालित ने सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण कराया था! 
✴️ गुप्त काल में महत्वपूर्ण मंदिर
1- विष्णुमंदिर तिगवा (जबलपुर मध्य प्रदेश) 
2- शिव मंदिर भूमरा (नागोद मध्य प्रदेश) 
3- पार्वती मंदिर नचना-कुठार (मध्य प्रदेश) 
4- दशावतार मंदिर देवगढ़ (झांसी, उत्तर प्रदेश) 
5- शिवमंदिर खोह (नागौद, मध्य प्रदेश) 
6- भीतरगांव का मंदिर लक्ष्मण मंदिर (ईटों द्वारा निर्मित) भितरगांव (कानपुर, उत्तर प्रदेश)

भानु गुप्त के एरण अभिलेख (510 ईसवी) से सती प्रथा का प्रथम उल्लेख मिलता है! 
इस वंश का अंतिम राजा कुमार गुप्त द्वितीय अर्थात विष्णु गुप्त था! 

✴️ गुप्तकालीन कला साहित्य एवं विज्ञान-
इस समय को इतिहास में भारत का  कला साहित्य का स्वर्ण काल कहते हैं! 
संस्कृत भाषा का अधिक प्रयोग होने के कारण इसे शास्त्रिय युग भी कहते हैं! 
गुप्त काल के साहित्य-
भास ने चारुदता और उरूभंग की रचना की थी! 
विष्णु शर्मा ने पंचतंत्र की रचना की थी! 
वात्सायना ने कामसूत्र की रचना की थी! 
आर्यभट्ट ने सूर्यसिद्धांत की रचना की थी! 
शूद्रक ने मृच्छकटिकम् की रचना की थी! 
असंग एकमात्र बौद्ध लेखक था जिसने योगाचार व भूमिशास्त्र की रचना की थी! 
भास्कराचार्य ने सिद्धांतशिरोमणि की रचना की थी! 
भट्टी ने रावण वध की रचना की! 
✴️गुप्तकालीन चित्रकला-
1. अजंता चित्रकला-
इस चित्रकला के साथ औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में मिले है! 
कनिंघम ने यहा से 9 गुफाएं खोजी थी! 
7 वी गुफा में जातक कथा का चित्रण है! 
2. एलोरा चित्रकला-
यहां से 34 गुफाएं प्राप्त हुई है! 
3. बाघ की गुफा-
यह गुफाएं ग्वालियर मध्य प्रदेश में है! 
इन गुफाओं की खोज डेंजर फिल्ड ने की! 
यहां से 9 गुफाएं प्राप्त हुई है! 

✴️गुप्तकालीन विज्ञान-
🏵आर्यभट्ट-
यह चंद्रगुप्त द्वितीय के समकालीन था! 
इसने शुन्य तथा पाई का आविष्कार किया है! 
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के बारे में सर्वप्रथम इसी ने बताया था! 
इनके नाम पर 19 दिसंबर 1975 को भारत का पहला सेटेलाइट छोड़ा गया! 
🏵वराहमिहिर-
यह उज्जैन का निवासी था जिसने वृहतसंहिता तथा पंच सिद्धांतिका लिखी थी!
✴️ब्रह्मगुप्त ने ब्रह्मस्फुट की रचना तथा भास्कराचार्य एक गणितज्ञ थे इनका  संबंध भी गुप्त वंश से है! 

इन्हें भी जाने-
गुप्त काल में प्रांतों को भुक्ति कहा जाता था इसका प्रमुख अधिकारी उपरीक कहलाते थे! 
गुप्तकालीन जिला को प्रदेश कहा जाता था सबसे छोटी इकाई ग्राम होती थी इसका सर्वोच्च अधिकारी महतर होता था! 
पैठ गांव का एक समूह होता था! 
विथी  तहसील को कहा जाता था
गोप्ता सीमांत क्षेत्रों का प्रधान कहलाता था! 
गुप्त काल में कर्मचारियों को नगद वेतन दिया जाता था! 
इस कार में मृत्युदंड का कोई उल्लेख नहीं है! 
सोने के सिक्के को दिनार तथा चांदी के सिक्के को रूप्यक कहा जाता था! 









Tuesday, March 29, 2022

जैन धर्म ( भारतीय इतिहास भाग 5)

                       ✴️जैन धर्म✴️
जैन शब्द संस्कृत के जिन से बना है जिसका अर्थ होता है विजय! 
जैन परंपराओं के अनुसार जैन धर्म में 24 तीर्थ करते हैं! 
प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ या ऋषभदेव  और 22वें तीर्थ कर अरिष्टनेमी थे  इन दोनों का वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है! 
23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जो काशी (कौशल) के इच्छवाकु वंश के राजा अश्वसेन के पुत्र थे! इनके अनुयायी  निग्रंथ कहलाते हैं! 
पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित किए गए चार महाव्रत-
1. सत्य
2. अहिंसा
3. अस्तेय- चोरी ना करना
4. अपरिग्रह- धन का संचय ना करना! 
Note- पांचवा महाव्रत महावीर स्वामी ने जोड़ा जिसे ब्रह्माचार्य (इंद्रयो पर विजय प्राप्त करना) कहते हैं! 
पार्श्वनाथ के कारण ही जैन धर्म में महिलाओं को प्रवेश मिला था! 
✴️ महावीर स्वामी-
यह जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे! 
जैन धर्म का इन्हें वास्तविक संस्थापक भी माना जाता है! 
इनका जन्म 540 ई.पु. कुंडलगांव वैशाली (बिहार) में हुआ था
उनके पिता का नाम सिद्धार्थ था जो वज्जी संघ के ज्ञातृक कुल के प्रधान थे
इनकी माता का नाम त्रिशला था  जो लिच्छवी शासक चेटक की बहन थी! 
उनकी पत्नी का नाम यशोदा था जो कुंडिय गोत्र के राजा समरवती की पुत्री थी! 
इनकी पुत्री का नाम प्रियदर्शना या अणोज्जा था! 
इनके दामाद का नाम जामालि था जो इनका प्रथम शिष्य था! 
इनके बचपन का नाम वर्धमान था
इनके जन्म का प्रतीक सिंह था
इन्होंने 30 वर्ष की आयु में अपने भाई नांदिवर्मन की आशीर्वाद से ग्रह त्यागा था! 
इन्हें 42 वर्ष की आयु में ऋजुपालिका नदी(बाराकर नदी) के तट मे जम्भिक गांव (बिहार) सारे वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई! 
प्रथम शिष्या चंदना थी! 
Note- बहुत से स्त्रोतों के अनुसार उनकी पहली शिष्या चंपा की राजकुमारी पद्मावती थी! 
इन्होंने अपना पहला उपदेश विपुलांचल पहाडी (राजगृह)  मे ऋजुपालिका नदी के तट में दिया! 
इनकी मृत्यु 468 ईसा पूर्व पावापुरी मे  मल्ली राजा सुक्तपाल के वहां हुई! 
महावीर ने अपने जीवन काल में 11 सदस्यों का एक संघ बनाया जिसे गणधर कहा जाता था! 
जैन धर्म का सर्वोच्च ज्ञान केवल्य कहलाता  था! 
जैन धर्म के त्रिरत्न-
1. सम्यक दर्शन
2. सम्यक ज्ञान
3. सम्यक आचरण
✴️ जैन साहित्य-
प्रारंभ में जैन साहित्य अर्धमगधी भाषा में था परंतु बाद में प्राकृत भाषा को अपनाया गया है सबसे अंत में कन्नड़ व संस्कृत भाषा में भी जैन साहित्य दिखता है! 
जैन साहित्य को आगम कहा गया है जिसने 12 अंग 12 उपांग 10 प्रकीर्ण 6 छेद सूत्र 4 मूल सूत्र 1 नदी सूत्र है! 
आगम ग्रंथ महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद का है! 
जैन धर्म से कुछ प्रमुख ग्रंथ-
आचारंग सुत्र- इसमें भिक्षुको के नियम व विधि विधानो का उल्लेख था! 
भगवती सूत्र- यह महावीर स्वामी की जीवनी है इससे हमें 16 महाजनपदों का भी पता चलता है! 
भद्रबाहुचरित्र- इसमें चंद्रगुप्त मौर्य के राज्य काल की जानकारी मिलती है! 
कल्पसूत्र- भद्रबाहु द्वारा लिखित संस्कृत ग्रंथ है इसमें जैन तीर्थ करो के जीवनों का वर्णन है! 

✴️जैन दर्शन-
1. अनेकान्तवाद- बहुरूपा का सिद्धांत
2. सप्तभंगीनयवाद- सापेक्षता का सिद्धांत(स्यादवाद का सिद्धांत) के नाम से भी जाना जाता है! 
3. नवावाद- आर्थिक दृष्टिकोण का सिद्धांत

✴️ जैन संगीतियां-
1. प्रथम जैन संगीति-
प्रथम जैन संगीति 300 ई. में पाटलिपुत्र में हुई इसकी अध्यक्षता स्थुलभद्र ने की
इस संगति का परिणाम विखरे एवं लुप्त  ग्रंथों का संचय किया गया! 
जैन धर्म को दो संप्रदायों में विभाजित कर दिया गया! 
1. श्वेतांबर
2. दिगंबर
श्वेतांबर-
इसकी स्थापना स्थूलभद्र ने की इसमें मोक्ष प्राप्ति करने के लिए वस्त्र का त्याग नहीं करना पड़ता था! 
आगम साहित्य स्वीकार किया
स्त्रियों को निर्वाण के योग्य समझा

दिगंबर-
इसकी स्थापना भद्रबाहु ने की इसे समैया भी कहा जाता है! 
इतने मोक्ष के लिए वस्त्रों का त्याग करना आवश्यक था! 
इन्होंने आगम साहित्य स्वीकार नहीं किया
स्त्रियों को के निर्वाण योग्य  नहीं समझा जाता था! 

द्वितीय जैन संगीति-
यह जैन संगीति 383 ईसवी में वल्लभी गुजरात में हुई! 
इस संगीति की अध्यक्षता क्षमाश्रवण(देवर्धिगण) ने की थी! 

जैन धर्म के महत्वपूर्ण प्रश्न-
जैन धर्म में युद्ध व कृषि दोनों वर्जित थी! 
जैन धर्म पुनर्जन्म व कर्मवाद पर विश्वास करता था
फार्म में मूर्ति का प्रचलन नहीं था बाद में जैन धर्म में मूर्ति का प्रचलन होने लगा! 
ये वेद की अपौरुषेयता व ईश्वर का अस्तित्व शिकार करते थे! 
जैन धर्म मे 18 पापा की कल्पना की गई है! 
महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद सुधर्मन संघ का अध्यक्ष बना बाद में जम्बू संघ का अध्यक्ष बना! 
✴️ जैन धर्म के अनुयायी राजा-
चंद्रगुप्त मौर्य- पहली जैन संगीति इसी के समय में आयोजित की गई थी! 
कलिंग राजा खारवेल- उदयगिरि की पहाड़ी में इतने गुफा बनाई थी! 
राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष- इतने रतनमलीका ग्रंथ की रचना की! 
गंग राजा राजमल चतुर्थ- इसके  मंत्री चामुंड राय ने 974 ई. में श्रवणबेलगोला कर्नाटक में बाहुबली की मूर्ति बनाई यह चट्टान के सहारे खड़ी सबसे ऊंची मूर्ति है यहां प्रत्येक 12 वर्ष में दूध से अभिषेक होता है जिसे महामस्तकाभिषेक कहते हैं! 



Monday, March 28, 2022

मौर्य वंश का उदय( भारतीय इतिहास भाग 10)

✴️मौर्य वंश(322 ईसा पूर्व से 184 ईसा पूर्व तक) 
भारत में पहली बार केंद्रीकृत साम्राज्य वह विस्तृत नौकरशाही की स्थापना मौर्य काल में हुई! 
मौर्य मूल रूप से पीपलीवन (नेपाल) के थेl
ब्राह्मण साहित्य में मौर्य को शुद्र और बौद्ध ग्रंथों में क्षत्रीय कहा है! 
जानकारी के साधन-
1.अर्थशास्त्र पुस्तक-
यह पुस्तक विष्णु शर्मा अर्थात चाणक्य की है! 
यह राजनीतिक विज्ञान पर आधारित पुस्तक है! 
इसमें 15 अधिकरण 140 प्रकरण 400 श्लोक है ! 
छठे अधिग्रहण में राज्य का सप्तांग सिद्धांत (स्वामी अमात्य दुर्ग राष्ट्रीय बाल कोष मित्र) दिया गया! 
2. मुद्राराक्षस-
इस पुस्तक के लेखक विशाखदत्त है! 
इस पुस्तक से मौर्य काल की गुप्तचर व्यवस्था का पता चलता है!
3. वृहतकथामंजरी-
इस पुस्तक के लेखक क्षेमेंद्र है! 
4. कथासरित्सागर-
इस पुस्तक के लेखक सोमदेव है! 
5. इंडिका-
इस पुस्तक के लेखक  यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर का राजदुत मेगस्थनीज  जो ग्रीक भाषा में थी! 
भारत में आने वाला पहला राजदूत था!
इस पुस्तक को मौर्य काल का दर्पण कहा जाता है! 
मैग्नेटिक ने पाटलिपुत्र का नाम बोधा रखा है इसी के समय प्रथम जैन संगीति हुई थी! 
इस पुस्तक में पाटलिपुत्र कि प्रशासन व्यवस्था का वर्णन है! 
इस पुस्तक की खोज 1858 में स्वागबैंग की  और इसका अंग्रेजी अनुवाद 1892 में मे हुआ! 
6.अशोक के अभिलेख-
सर्वप्रथम 1750 में टी फैन्थलर ने अशोक के अभिलेखों को खोजा था 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने इन्हें पढा था अधिकांश की भाषा प्राकृत और उनमें अशोक का नाम देवनामप्रिय/प्रियदस्सी मिलता है इन अभिलेखों की भाषा ब्राह्मी थीl
Note- मेरठ व टोपरा अभिलेखों को फिरोज तुगलक दिल्ली लाया था और अकबर इलाहाबाद के अभिलेख को दिल्ली लाया था! 

🟠 मौर्य वंश के शासक-
✴️ चंद्रगुप्त मौर्य-
यह जैन धर्म का अनुयाई था
भारत का मुक्तिदाता के नाम से जाना जाता है
भारतीयो की स्वतंत्रता का जन्मदाता भी इसे कहा जाता है! 
चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त नहीं है इसे चाणक्य ने 1000 कापार्षण मुद्राओं में  एक शिकारी से खरीदा था! 
 Note- हजार दिनारी मलिक कपूर को कहा जाता है जिसका संबंध अलाउद्दीन खिलजी से है! 
चंद्रगुप्त मौर्य ने  चाणक्य की मदद से तक्षशिला में शिक्षा ग्रहण की थी! 
305 में चंद्रगुप्त ने यूनानी राजा सेल्यूकस को हराकर वैवाहिक संबंध स्थापित किए इसने इस की पुत्री हेलना से विवाह किया! 
चंद्रगुप्त और हेलिना का विवाह पहला अंतरराष्ट्रीय विवाह है! 
चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस को500 हाथी उपहार के रूप में दिए तथा सेल्यूकस ने दहेज के रूप में चार प्रांत  (एरिया(हेरात)  अराकोशिया(कंधार)  जेड्रोशिया(मकरान तट) पेरीपेनिषदाई(काबुल)) दिए थे! 
चंद्रगुप्त के अन्य नाम-
1. सैण्ड्रोकोटस- स्टेबो एरियन और जस्टिन के अनुसार
2. एंडोकोटस- एपियिनस और प्लूटार्क के अनुसार
3. सैण्ड्रोटस- नियाकर्स के अनुसार 
Note- 1793 मैं विलियम जोंस ने बताया कि यह तीनों नाम चंद्रगुप्त मौर्य के हैं! 
चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांत पाल पुष्यगुप्त ने सुदर्शन झील का निर्माण कठीयावाड (सौराष्ट्र) में कराया
जैन साहित्य के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य के शासन में 12 वर्षीय अकाल पड़ा जिस कारण यह श्रवणबेलगोला अपने गुरु भद्रबाहु  के साथ चला गया और संलेखना विधि द्वारा प्राण त्याग दिए! 

✴️ बिंदुसार-
इसका शासनकाल 289 से 273 ईसा पूर्व तक था! 
इसके शासन को मौर्य काल का शांतकाल कहा जाता है
पतंजलि के अनुसार इसका नाम अमित्रघात व एथेनियस के अनुसार अमित्रोकेटीज इसका नाम था! 
चीनी ग्रंथों में इसे बिंदुपाल कहां गया
जैन ग्रंथों में इसे सिंहसेन कहां गया! 
बिंदुसार के 3 प्रधानमंत्री थे-
1. चाणक्य        2.खल्लाटक       3.राधागुप्त
बिंदुसार ने अपने पुत्र अशोक को तक्षशिला विद्रोह दबाने के लिए भेजा तथा अवंती (उज्जैन)का उपराजा (सूबेदार) बनाया! 
 यूनानी लेखक एथेनियस के अनुसार इसके संबंध सीरिया के राजा एन्टियोकोटस- प्रथम से बहुत अच्छे थे इससे इसने सूखे अंजीर अंगूरी मदिरा एक दार्शनिक रेट में मांगा था परंतु उसने दार्शनिक नहीं भेजा बाकी दोनों चीजें दी! 
मिस्र के राजा टोलमी द्वितीय ने अपना राजदूत डाइनोसिस को इसके दरबार में भेजा! 

✴️ अशोक-
इसकी माता का नाम सुभद्रांगी था
इसकी 4 रानी थी- असंगमित्रा पद्मावती कारूवाकी तिष्यारक्षिता थी! 
कलिंग का युद्ध 261 ईसवी में हुआ अशोक ने अपने  राजअभिषेक के 8 वर्ष कलिंग की राजधानी तो तोसली( उत्तरी कलिंग) पर अधिकार किया इसकी जानकारी हमें उसके 13 वें अभिलेख से प्राप्त होती है! 
इस युद्ध के बाद एक बौद्ध भिक्षुक मोग्गलिपुत्र तिस्त के प्रभाव से इसने बौद्ध धर्म स्वीकार किया इसके प्रथम  गुरु उपगुप्त थे

अशोक के शिलालेख-
प्रथम शिलालेख- पशु बलि की निंदा तथा सभी मनुष्य मेरी संतान है बताया गया
द्वितीय  शिलालेख- लोककल्याणकारी कार्य का वर्णन
तृतीय शिलालेख- राज्य के अधिकारियों का हर पंचवर्ष में दौरे करने का आदेश
चौथा शिलालेख- धम्म का  उद्घोष अर्थात बौद्ध धर्म का विचार का प्रसार करना
पांचवा शिलालेख- मौर्यकालीन समाज एवं वर्ण व्यवस्था और धम्म महामात्रो की नियुक्ति
छटा शिलालेख- आम जनता राजा से किसी समय भी मिल सकती है
सातवां शिलालेख- सभी संप्रदायों के लिए सहिष्णुता
आठवां शिलालेख- सम्राट के धर्म यात्राओं का उल्लेख
नौवां शिलालेख- धम्म समारोह की चर्चा
दसवां शिलालेख- धम्म  नीति की श्रेष्ठता का वर्णन
11 शिलालेख- धम्मा नीति की व्याख्या
बारवा शिलालेख- सर्वधर्म समभाव
तेरह शिलालेख- कलिंग युद्ध की जानकारी
14 शिलालेख- जनता को धार्मिक जीवन बिताने के लिए प्रेरित करना

अशोक के शिलालेख से संबंधित प्रमुख तथ्य-
अशोक के दो शिलालेख  शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा(पाकिस्तान) जिनकी लिपि खरोष्ठी थी! 
अशोक के रूम्मिदेई (नेपाल) अभिलेख जिससे मौर्य काल की आर्थिक स्थिति का पता चलता है यह अशोक सबसे छोटा अभिलेख है! 
शेर ए कुना (गांधार) एकमात्र अभिलेख जो कि ग्रीक व आरमेईक भाषा में है! 
प्रयाग प्रशस्ति इस अभिलेख को रानी का अभिलेख कहते हैं इसमें उसकी रानी कारूवाकी का वर्णन है! 
लोरिया नंदन(चंपारण) स्तंभ लेख में मोर का चित्र मिला है! 
रामपुरवा अभिलेख (चंपारण) से बैल की आकृति का प्रमाण मिला है! 
अशोक ने आजीविको के रहने के लिए बराबर ककी पहाड़ियों में चार गुफाओ  का निर्माण कराया है-लोमस ऋषि गुफा, सुदामा गुफा, विश्व झोपड़ी, कर्ण चोपर गुफा! 
अशोक के उत्तराधिकारी कुणाल के समय जालोक ने कश्मीर में स्वतंत्र राज्य की स्थापना की! 
मौर्य वंश में अशोक तथा राजा दशरथ ने बौद्ध धर्म को अपनाया था! 
मौर्यकालीन प्रशासन-
मौर्य सम्राट चार प्रांतों में विभाजित था-
1- उत्तरा पथ जिसकी राजधानी तक्षशिला थी! 
2- दक्षिणा पथ जिसकी राजधानी सुवर्ण गिरी थी
3- अवंती जिसकी राजधानी उज्जैनी थी! 
4- मध्य प्रदेश (प्राची) जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी! 

मौर्य प्रशासन के व्यवस्था-
केंद्र के अधिकारी को सम्राट कहते थे! 
प्रांत के अधिकारी को कुमार या आर्यपुत्र कहते थे
मंडल के अधिकारी को प्रदेष्टा कहते थे
अहार या  विषय के अधिकारी को स्थानिक या विषयपति कहते हैं
स्थानीय 800 गांव का समूह कहलाता था
द्रोणमुख 400 गांव का समूह कहलाता था
खार्वटिक 200 गांव का समूह कहलाता था
संग्रहक 10 गांव का समूह आता था
ग्राम प्रशासन की सबसे छोटी इकाई होती थी जिसका अध्यक्ष ग्रामणी खिलाता था! 

मौर्य काल की कृषि व्यवस्था-
राजकीय भूमि का प्रधान सीता अध्यक्ष कहलाता था! 
भूमिका उपज का 1/6 भाग होता था
रातकीय भूमि से होने वाली आय को सीता कहा जाता था
आयकर को प्रवेश्य कहा जाता था! 
निर्यात कर को निष्क्राम्य कहते थे! 
प्रवण आपातकालीन कर था! 
बली राजस्व कर था
हीरण्य नगद कर था! 

सारनाथ स्तंभ लेख-
यहां से भारत का राज्य चिन्ह  लिया गया है! 
इसमें चार शेर घोड़ा बैल हाथी के चित्र हैं! 
इसमें 24 तिल्लीयो का एक चक्र है
सारनाथ स्तंभ लेख के सबसे ऊपर धर्म चक्र है जिसमें 32 तिलिया हैं यह खंडित है! 
Note- सांची  मे भी चार बैल की आकृतियां हैं! 

मौर्य काल के अधिकारी-
प्रथम श्रेणी का अधिकारी तीर्थ कहलाता था
द्वितीय श्रेणी का अधिकारी अध्यक्ष कहलाता था! 
Note- चाणक्य की अर्थशास्त्र में 12 तीर्थ और 27 अध्यक्ष का वर्णन है! 

प्रमुख तीर्थ-
समाहर्ता- राजस्व निर्धारण करने वाला
पौर- नगर का प्रधान
अंत:पाल- सीमावर्ती क्षेत्रों का प्रधान
कर्मान्तिक- कारखानों का प्रधान
सन्निधाता- कोषाध्यक्ष

द्वितीय श्रेणी के अध्यक्ष-
सीता अध्यक्ष- राज्यकीय भूमि का अध्यक्ष
पोतवाध्यक्ष- माप तोल विभाग का अध्यक्ष
बंदगाध्यक्ष- जेल विभाग का अध्यक्ष
पतनाध्यक्ष- बंदरगाह का अध्यक्ष

मौर्य काल से संबंधित अन्य तथ्य-
परिहारिक- कर मुक्त गांव को
वर्तनी- सड़क कर
समितकारक श्रेणी- आटा बेचने वाले
श्रेणी का प्रधान श्रेष्ठी कहलाता था! 
 Note-श्रेणी- एक ही प्रकार के व्यवसाय करने वाले लोगों का समूह
सबसे लंबा व्यापारिक मार्ग उत्तरपथ था जिसकी लंबाई 21 किलोमीटर थी यह बंगाल से गांधार तक था! 
घूमने वाले व्यापारियों का समूह सार्थवाह कहलाता था! 
मौर्य काल में गुप्तचर को गुढ पुरुष कहा जाता था! 
स्मरण बिंदु- जस्टिन  ने चंद्रगुप्त की सेना को डाकू का गिरोह कहा है! 

मौर्यकालीन राजकीय मुद्रा-
पण- यह 3/4 तोले के बराबर चांदी का सिक्का था! 
चांदी के सिक्के- पण, कापार्षक,धारक
सोने के सिक्के-  सुवर्ण, निष्क, 
ताबे के सिक्के- माष्क और काकणि

मौर्य वंश का अंतिम राजा ब्रहदथ था जिसे पुष्यमित्र शुंग ने मारा और  शुंग वंश की नीव रखी! 







उत्तर मौर्य काल में विदेशी वंश( भारतीय इतिहास भाग 12)

🏵 उत्तर मौर्य काल विदेशी वंश का उदय🏵
1. इंडो ग्रीक या हिंदू यूनानी वंश
इनका मूल स्थान बैक्ट्रिया (अफगानिस्तान) था! 
✴️डेमिट्रीयस प्रथम-
भारत की सीमा पर आक्रमण करने वाला प्रथम यूनानी यवन आक्रमणकारी था! 
इसने 183 ईसवी पूर्व साकल को जीता! 
Note-साकल वर्तमान का सियालकोट (पंजाब)हैl
✴️ मिनांडर-
यह सबसे  प्रतापी हिंदू यूनानी शासक था! 
बौद्ध साहित्य में से मिलिन्द कहा गया है! 
बौद्ध ग्रंथ मिलिन्दपन्हो में मिनांडर और नागसेन के बीच संवाद का वर्णन किया गया है! 
इसी ने सर्वप्रथम भारत में सोने के सिक्के चलाए! 
इनकी राजधानी साकल इस समय शिक्षा का प्रमुख केंद्र था! 
🎇 यूनानीयों की भारत को प्रमुख देन-
राजस्व देवी सिद्धांत
सोने के सिक्के निर्माण
मुद्रा पर राजाओं के नाम व तिथि अंकित
भारत में ज्योतिष कला का विकास
रंगमंच यावनिग(पर्दे) का शुभारंभ
भारत में एक नवीन शैली का उदय
हेलेनिस्टिक( पत्थर की कला) कला का विकास

                            🏵शक🏵
शक मूलतः सीरिया के उत्तर में निवास करते थे! 
इन्होंने बोलन दर्रे से भारत में प्रवेश किया था! 
शको की कुल पांच तक आए थे इसमें से 2 शाखाओं ने भारत में शासन किया था! 
✴️क्षहरात वंशीय शक-
इस वंश के संस्थापक मोगा या माउस ने की
इस वंश की राजधानी नासिक थी जिसका प्राचीन नाम जोगलथम्बी था! 
इस शाखा के प्रमुख शासक भूषण, नहपान थे! 
✴️कार्दमक वंशीय शक-
इस वंश के संस्थापक चस्टर था! 
अंधो अभिलेख जो सौराष्ट्र से प्राप्त हुआ है जिसमें चस्टर ने अपने पौत्र रुद्रदामन के साथ मिलकर शासन किया था यह भारत में प्रथम सहशासन का उदाहरण है! 
रुद्रदामन जयदामन का पुत्र था! 
रुद्रदामन-
जूनागढ़ अभिलेख अर्थात गिरनार अभिलेख से पता चलता है कि इस के राज्यपाल सुविशाख ने सुदर्शन झील का पुनः निर्माण कराया था! 
जूनागढ़ अभिलेख अशुद्ध संस्कृत भाषा में खुद वाया गया भारत का प्रथम अभिलेख है! 
महत्वपूर्ण तथ्य-
कार्दमक  ईरान की एक नदी है इस वंशि का नाम इसी नदी के नाम पर है! 
यह शासक संस्कृत प्रेमी शासक कहलाते हैं! 
भारत में सर्वप्रथम तिथि युक्त चांदी के सिक्के इन्होंने ही चलाए थे! 
इनके शासन का अंत चंद्रगुप्त द्वितीय ने किया था! और विक्रम संवत(57 ई.पू.)चलाएं! 

            🏵पार्थियन या पहलव वंश🏵
यह मूल रूप से ईरान के निवासी थे! 
इस वंश का संस्थापक मिथ्रोडेट्स प्रथम था! 
✴️गोन्दोफर्नीज-
पेशावर के तख्त ए बही अभिलेख में इसे गुदलूर कहा है! 
भारतीय लेखकों ने इसका नाम बिंदुफरण बताया! 
इस वंश का अंत कुषाणो ने किया थ

                  🏵कुषाणो का उदय🏵
यह मूल रूप से चीन तथा तुर्किस्तान के थे! 
कुषाण एक कबीले का नाम है इनकी जाति युची थी! 
कुषाणो को टोचेरियन भी कहा जाता है! 
यह मूल रूप से चीन के रहने वाले थे परंतु भारत में मध्य एशिया से आए! 
भारत में इस वंश का संस्थापक कडफिसस संघ ने की! 
✴️ कुजुल कडफिसस -
यह किस वंश का संस्थापक था! 
✴️विम कडफिसस- 
भारत में सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाएं
यह शैव धर्म को मानता था तथा इसने महेश्वर की उपाधि धारण की थी! 
✴️कनिष्क (78-105 ईसवी) 
कनिष्क का राज्यभिषेक 78ई.में हुआ तब से शक संवत चलाया गया! 
Note- शक संवत चैत माह (21/22 मार्च) से आरंभ होता है! 
बौद्ध धर्म का संरक्षण करने के कारण इसे द्वितीय अशोक के नाम से भी जाना जाता है! 
इसकी राजधानी पेशावर (पुरुषपुर) और मथुरा थी! 
इसने सीजर की उपाधि धारण की थी! 
इसके समय गांधार वह मथुरा कला की शैली जन्म लेती है! 
इसने पाटलिपुत्र पर आक्रमण किया और यहां से महान बौद्ध विद्वान अश्वघोष व महात्मा बुद्ध का भिक्षापात्र ले आया!
इसने सर्वप्रथम चीन रोम जाने वाले सिल्क मार्ग पर अधिकार किया था! 
इसमें चीन के राजा पनचाओ को हराया था इसलिए इसे प्रथम अंतरराष्ट्रीय शासक भी कहते हैं! 
इसी के समय कुंडवन(कश्मीर) में चौथी बौद्ध संगीति भी हुई थी! 
इसने कश्मीर में कनिष्कपुर की स्थापना की! 
कनिष्क के दरबार में विद्वान-
अश्वघोष- इसने बुद्धचरित्र नाम का ग्रंथ लिखा जिसे बौद्ध धर्म का रामायण कहते हैं! 
नागार्जुन- इसने माध्यमिक सूत्र (इसमें सापेक्षता का सिद्धांत प्रतिपादित किया है) माध्यमिककारिका, शून्य सप्तशती
वसुमित्र- इसने महाविभाष्यशास्त्र की रचना की! 

🏵गांधार कला व मथुरा कला-
✴️गांधार कला-
यह कला गहरे नीले व काले पत्थर में होती थी! 
इस कला के संरक्षक शक व कुषाण थे! 
यह कला यथार्थवादी थी! 
इस कला से मुख्यतः बौद्ध मूर्तियां बनती थी! 
✴️ मथुरा कला-
यह कला लाल पत्थर पर बनाई जाती थी
इस कला को संरक्षण कुषाण ने दिया था
यह आदर्शवादी कला है! 
इसमें बौद्ध जैन ब्राह्मण सभी प्रकार की मूर्तियां बनती थी! 




हड़प्पा सभ्यता (भारतीय इतिहास भाग 3)

          ✴️हड़प्पा सभ्यता का उदय✴️
✴️1904 में लार्ड कर्जन के समय भारतीय पुरातत्व विभाग का गठन कोलकाता में हुआ जिसके प्रथम अध्यक्ष अलेक्जेंडर कनिंघम थे! 
✴️भारत की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यता  हड़प्पा सभ्यता है इसे सिंधु घाटी की सभ्यता भी कहते हैं!

✴️1921 में जॉन मार्शल की अध्यक्षता में दयाराम साहनी के नेतृत्व में हड़प्पा की खुदाई हुई 1924 में लंदन से जॉन मार्शल ने इस सभ्यता की घोषणा की! 

✴️ हड़प्पा सभ्यता के नामकरण में मत-
🌳जॉन मार्शल ने इसे सिंधु घाटी सभ्यता का नाम दिया! इस सभ्यता का काल 4000 ईसा पूर्व का बताया है!
🌳मार्टीमर  व्हीलर ने इसे हड़प्पा सभ्यता कहा! इन्होंने इस सभ्यता का काल 2800-1500 ई.पूर्व का बताया है!
🌳अर्नेस्ट मैके में इसे हड़प्पा संस्कृति कहा! 
⛲ डॉक्टर आरके स्मिथ ने इस सभ्यता का काल 2500-1500 ई.पूर्व का बताया है!
☀ डॉक्टर आरके मुखर्जी ने इस सभ्यता का काल 2350-1750 ईसा पूर्व का माना है
🌳मेसोपोटामिया की सभ्यता में मेलुहा शब्द मिला है जिसका संबंध हड़प्पा सभ्यता से है! 
✴️ इस  सभ्यता से जुड़ी लगभग 1400 स्थल खोजे जा चुके है इसमें से लगभग 925 भारत में तथा 475 पाकिस्तान में है! 
✴️ हड़प्पा सभ्यता का उद्गम- ईरान व बलूचिस्तान की ग्रामीण संस्कृति से नगरी सभ्यता का जन्म हुआ है! 
✴️ गार्डन चाइल्ड ने सिंधु सभ्यता को प्रथम नगरी क्रांति कहा है!
✴️ हड़प्पा सभ्यता की जानकारी सबसे पहले 1826 में चालर्स मैसन  ने दि थी! 
✴️ हड़प्पा सभ्यता का काल 2300 ई. पू. से 1740 ई. पू्. (2500-1750ई.पु.)  के मध्य का था! 
सिंधु सभ्यता का क्षेत्र त्रिभुजाकार था इसका क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किलोमीटर था!  पूर्व से पश्चिम 1600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण 1400 किलोमीटर था! 
⚫ यह सभ्यता की खुदाई से भिन्न भिन्न प्रजातियों की अस्थि पंजर प्राप्त हुए- भूमध्य सागरीय, मंगोलियन, प्रोटो ऑस्ट्रेलियड तथा अल्पाइन 
⚫ सिंधु सभ्यता उत्तर में मांडा (जम्मू), दक्षिण में दैमाबाद पूर्व में आलमगीरपुर दक्षिण में मकरान समुद्र तट बलूचिस्तान और सुत्कागेंडोर तक फैली है! 
⚫ पासा इस काल का प्रमुख खेल था! 
माप तोल के लिए घनाकार बांटे थी और यह दशमलव पद्धति से प्रचलित थे! 
🟠 यह एक कास्यंयुगी नगरी सभ्यता थी! 
⚫ इनका समाज मातृसत्तात्मक था! 
🟠 सिंधु सभ्यता में आर्थिक स्थिति का प्रमुख आधार व्यापार एवं वाणिज्य था! 
⚫ वृक्षों में पीपल सबसे पवित्र थाl
✴️ हड़प्पा सभ्यता की लिपि की खोज 1923 में हुई जो भाव चित्रात्मक थी जो दाएं से बाएं लिखी जाती थी यह लिपि बूस्ट्रोफेडन/हलावर्त/गौमूत्रिका शैली कहलाती है सबसे ज्यादा यू (u)आकार की चित्र व मछली के चित्र मिले हैं मूल चित्रो की संख्या 64 थे! 
महत्वपूर्ण- सिंधु लिपि को पढ़ने की शुरुआत 1925 में वैडेल तथा 1934 में वैज्ञानिक पद्धति द्वारा इस लिपि को पढ़ने की कोशिश हंटर महोदय ने की!
✴️ मोहनजोदड़ो से शिव के पारंपरिक रूप की पूजा के अवशेष अर्थात पशुपति की मूर्ति मिली है इसे जैन  अनुयाई आदिनाथ की मूर्ति बताते हैं! इस सभ्यता से मंदिर के प्रमाण नहीं मिले हैं परंतु मूर्ति के प्रमाण मिले है! 


🟠 सिंधु सभ्यता के प्रमुख नगर-
✴️ हड़प्पा- दयाराम साहनी ने 1921 मे रावी नदी के तट पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मांटगोमेरी जिले में इसका उत्खनन किया था! 
यहां से सबसे अधिक अभिलेख युक्त मोहरे, पीतल की इक्का गाड़ी, स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा, समाधान के गड्ढे में ईट लगाने के प्रमाण, कांसे  का दर्पण, सुरमा लगाने की सलाई, कर्मचारियों के आवास, लाल पत्थर से बनी पुरुष की निर्वस्त्र छड़ की आकृति, r-37 कब्र मातरदेवी की मूर्ति, लकड़ी का ताबूत, फसल रखने का खज़ाना, ताबे गलाने का पात्र इत्यादि प्राप्त हुआ! 
महत्वपूर्ण तथ्य- यहां से एबी नामक किला मिला है और यहां से   नग्न स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा  मिला है जिसे उर्वरकता कि देवी कहा जाता है, कास्य बैल गाड़ी, स्वास्तिक चिन्ह मिला! 
🎡याद रखे- स्टुअर्ट पिग्गट ने कडप्पा को अर्द्ध औद्योगिक नगर का है
✴️मोहनजोदड़ो- इसे मृतकों का टीला भी कहा जाता है इसकी खोज 1922 में राखालदास बनर्जी ने सिंधु नदी के तट पर पाकिस्तान के लरकाना जिले में की थी! 
यहां से विशाल स्नानागार, नाव के चित्र वाली मुद्रा बौद्ध स्तूप,लिंग पूजा के प्रमाण,वृषभ की मूर्ति अन्नागार, सिटदार शौचालय, 1398 मोहरे,  पुरोहित की  छड, मिश्रित पशु की मूर्ति, नर्तकी की कांसे की मुर्ति, घोड़े के दांत, सभागार मिले है! 
महत्वपूर्ण- विशाल स्नानागार को जॉन मार्शल ने विश्व की धार्मिक महत्व की आश्चर्यजनक निर्माण कहा है! 
शिव के  प्रारंभिक रूप की मुहरे मिली है जिसे तांत्रिक मुहर या समन की मुहर कहते है! 
✴️लोथल- लोथल की खोज 1955-62 एस.आर राव ने भोगवा नदी के तट पर अहमदाबाद गुजरात में की थी यह एक बंदरगाह है! 
यहां से गोदीबाड़ा, अन्नागार, स्नानघर, नालियों की अच्छी व्यवस्था, हाथी दांत, घोड़े की मिट्टी की मूर्ति, युगल समाधान, नालियों से सोख्ता गड्ढा, औद्योगिक क्षेत्र, सेलखड़ी की मोहरे, सीप, मनके बनाने के कारखाने,अग्नि पूजा के संकेत,बाजरे के साक्ष्य, पीसने की चक्की के दो पटाल, फारस की मुद्रा के साक्ष्य मिले हैं
महत्वपूर्ण तथ्य- इसे लघु हड़प्पा भी कहा जाता है यहां से 3 युग्म समाधिया मिली है जो सती प्रथा के साक्ष्य माने जाते हैं! यहां से पंचतंत्र की लोमड़ी के चित्र भी मिले! 
✴️धौलावीरा-इसकी खोज वर्ष 1968 में पुरातत्त्वविद् जगतपति जोशी द्वारा की गई थी। यह गुजरात के कच्छ जिले में हैl इसे 2021 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत की श्रेणी में घोषित किया गया यह सबसे नवीनतम नगर है l
यह एकमात्र नगर जो 3 भागो में विभाजित था यहां से एक विशाल स्टेडियम के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं पोलिसदार सफेद पत्थर के साक्ष्य, तथा चट्टानों को काटकर 16 तालाब बनाने के साथ भी मिले! 
महत्वपूर्ण- धौलावीरा का अर्थ होता है सफेद कुआं
✴️कालीबंगा- यह 1953 में बीबी लाल वीके थापर ने घाघरा नदी हनुमानगढ़ जिला गंगानगर राजस्थान से  उत्खनन किया तथा इसे खोजा अमलानंद घोष ने। यहां से कहां थे व मिट्टी की चूड़ियां कच्ची ईंटों से बने 7 अग्निकुंड जूते हुए खेत तांबा गलाने की तकनीक, सिलबट्टा, मिट्टी से निर्मित भवन, तीन प्रकार के समाधान प्रथाएं मिली है! 
महत्वपूर्ण बिंदु-
कालीबंगा का अर्थ होता है काले रंग की चूड़ियां
इसे इस सभ्यता की तीसरी राजधानी डॉ दशरथ शर्मा ने कहा है
यहां से ग्रिड पेटर्न विधि से जूते खेत मिले है
यहां से शल्य चिकित्सा का वर्णन मिला है
मिट्टी से जनन अंगों के प्रतीत मिले हैं
भूकंप के साक्ष्य मिले है
 मिट्टी की अग्नि वेदिका मिली है परंतु मिट्टी की मूर्तियां नहीं मिली है। 
✴️बालाकोट- यह अरब सागर के तट में कराची के निकट का बंदरगाह है जहां से प्राग् सैंधव व  विकसित सैंधव सभ्यता के अवशेष मिले! 
✴️चंहुदडो- इसकी खोज 1931/1934 में गोपाल मजूमदार ने की थी यह पाकिस्तान की सिंध में स्थित है यहां से लिखने की चौकियां मसीपत्र सील या मुद्राओं के निर्माण के कारखाने मनका बनाने के कारखान ईटों से बनी भड्डीया मिली है! 
याद रखें- चंहुदडो का उत्खनन अर्नेस्ट मैके ने किया। 
महत्वपूर्ण तथ्य- जहां एक मात्र स्थान था जहां से वक्राकार ईट मिली है यह एक मात्र स्थान था जहां से दुर्ग के साक्ष्य नहीं मिले!  यह सभ्यता का औद्योगिक स्थल था!  ईद पर एक बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजों के निशान मिले है!

✴️बणवाली- इसकी खोज 1973-74 में रविंद्र सिंह बिष्ट ने घाघरा नदी के तट पर हिसार (हरियाणा) में की  यहां से मिट्टी का हाल प्राप्त हुआ है! 
एक  अर्ध  वृत्ताकार ढांचा प्राप्त हुआ है जिससे मंदिर होने की संभावना व्यक्त की गई है! 
यहां से मिट्टी का खिलौना वाला हल मिला है! 
यहां से एक जोहर का मकान और बास बेसिग भी मिला है! 
✴️रोपड़- इसकी खोज 1955-56 में यज्ञदत्त शर्मा ने पंजाब सतलज नदी के तट पर की यहां से मानव कब्र के नीचे कुत्ते का सवाधान मिला है! 
इसके वर्तमान का नाम रूपनगर है! 
यहां से ताबे की कुल्हाड़ी मिली है
मनुष्य के साथ कुत्ता दफनाने का साक्ष्य मिला! 
✴️ सुरकोटदा- इस स्थल की खोज 1972 में कच्छ गुजरात में यज्ञदत्त शर्मा जी ने की! 
यहां से घोड़े की अस्तियां प्राप्त हुई है! 
यहां से पत्थर से ढकी हुई कब्र मिली है! 
यहां से कलश समाधान भी मिले है! 
✴️रंगपुर- इस स्थान की खोज 1953-54 में रंगनाथ राव ने भादर नदी के तट पर गुजरात के काठियावाड़ जिले में की! 
नष्ट होती सभ्यता के संकेत यही से मिले
यहां से चावल के साथ भी मिले! 
Note- हड़प्पा सभ्यता के लोग चावल घोड़े लोहे से प्रचलित थे! 
✴️ राखीगढ़ी- इसकी खोज 1969 में सूरजभान ने की थी। यह घगर नदी के तट पर हरियाणा में है 
यहां से स्तंभ आयुक्त मंडप के प्रमाण मिले! 
मई 2012 में इसे यूनेस्को ने ग्लोबल हेरिटेज फंड में शामिल किया! 
महत्वपूर्ण- हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा नगर राखीगढ़ी है!
✴️शोर्तुगोई- यह स्थान अफगानिस्तान में है एक मात्र स्थान जहां से नहरो की जानकारी मिली है! 
🎇हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण-
1. मार्टिमर व्हीलर व गार्डन चाइल्ड के अनुसार इस सभ्यता का अंत आर्य या बाह्य आक्रमण के कारण हो
2. कनेडी महोदय के अनुसार इस सभ्यता का पतन महामारी के कारण हुआ! 
3. जॉन मार्शल के अनुसार इस सभ्यता का पतन प्रशासनिक शिथिलता (गृह युद्ध) के कारण हुआ! 
4. एमआर साहनी के अनुसार इस सभ्यता का पतन भूकंप के कारण हुआ है! 
5. अमलानंद घोष और ऑरेंज स्स्टेइन के अनुसार इस सभ्यता का अंत जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ! 

🌅हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख अन्य स्थल-
1. मुण्डीगाटक- यह स्थान अफगानिस्तान में था! 
2. कुंतागी,देशलपुर,मालवण,रोजदी- ये स्थान गुजरात में था! 
3. कुनाल,राखीगढ़ी,बनवाली, मीताथल- यह स्थान हरियाणा में है! 
4. बडगांव,अम्बखेडी- यह स्थान उत्तर प्रदेश में स्थित है! 
5. दैमाबाद प्रवरा नदी के तट पर महाराष्ट्र में है! 
6. सुत्कागेंडोर- राजस्थान 1927 में दशक नदी के तट पर ऑरेंज स्टाइन ने बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में खोजा! 
7. कोटदीजी- यह स्थान 1955-57 में सिंध प्रांत के खैरपुर नगर में फजल अहमद खा ने खोजा! 
8. आलमगीरपुर- यह स्थान 1958 में हिंडन नदी मेरठ से यज्ञदत्त शर्मा जी ने खोजा! 
9. मालवण- यह स्थान ताप्ती नदी के तट पर गुजरात में अल्विन ने खोजा! 

🏵 हड़प्पा सभ्यता से महत्वपूर्ण तथ्य🏵
✴️ इस सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह लोथल रंगपुर सुरकोटड़ा,प्रभासपाटन था! 
✴️  लोथल से प्राप्त मृदभांड में एक व्यक्ति पर मुंह में मछली पकड़े हुए चिड़िया और नीचे एक लोमड़ी का चित्र बनाया गया है जो पंचतंत्र की कहानी के समान है! 
✴️ सामान्यत मृदभांड गुलाबी रंग या लाल रंग के होते थे! 
✴️ यह सभ्यता शांतिप्रिय मानी जाती है परंतु लोथल व रोपड़ से ताबे की कुल्हाड़ी के  साक्ष्य  मिले है!
✴️ ताबे की मुहरे लोथल व देसलपुर से मिली है! सबसे अधिक मुहरे मोहनजोदड़ो से मिली है! 
✴️ कालीबंगा और मोहनजोदड़ो से प्राप्त मुहरे पशु बलि के साथ प्रकट करती है! 
✴️ मुहरो में वृषभ, हाथी, गैडे, हिरण मछली घडियाल के चित्र बने थे! 
✴️यह लोग गन्ने से अप्रचलित है
✴️कपास का ज्ञान सबसे पहले इन्हीं को था यूनानी ने कपास को सिण्डल कहा है! 
✴️ हड़प्पा और चंहुदडो से कांसे  की बैलगाड़ी मिली है! 
✴️ लोथर से आटा पीसने वाली चक्की  और हाथी दांत का पैमाना के साक्ष्य मिले है! 
✴️ इस सभ्यता का एक बर्तन ओमान (सऊदी अरब) से मिला! 
✴️ इस सभ्यता की मुख्य फसल गेहूं और जौ थी! 
✴️ डैडमैन लाइन(कंकालो से भरी गली) और कुऐं के साक्ष्य मोहनजोदड़ो से मिले है! 
☀ सिंधु सभ्यता में ईंटों का अनुपात 4:2:1 का होता था!
🌟 चन्हुदडो हड़प्पा सभ्यता में मुद्राओं के उत्पादन का मुख्य केंद्र था!
🏵 इस सभ्यता के प्रमुख आयतीय वस्तुएं-
1. लाजवर्द(भवन निर्माण सामग्री)- अफगानिस्तान
2. सोना- फारस
3. चांदी- ईरान
4. टीन- अफगानिस्तान



आघऐतिहासिक काल( भारतीय इतिहास भाग 2)

             ✴️आघ ऐतिहासिक काल✴️
ऐसा काल जिसमें लिखित साक्ष्य तो मिला है परंतु उसे आज तक पढ़ा नहीं गया! 
इस काल में मृदभांडो का प्रथम प्रयोग हुआ! 
इस काल में धातु का प्रयोग आरंभ हो गया था सबसे पहले प्रयोग लाई  धातु ताबाँ थी! 
सिंधु सभ्यता और वैदिक सभ्यता इस काल के अंतर्गत आती है! 
ताम्र पाषाण युग-
यह का 3000 ईसा पूर्व का था! 
यह कृषि प्रधान ग्रामीण सभ्यता थी! 
इस काल की प्रमुख संस्कृति-
✴️बनास या आयड संस्कृति-
यह संस्कृति राजस्थान में है! 
इसका समय का 2100 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व का था! 
इस संस्कृति को ताम्र सभ्यताओं का पालनहार कहते हैं! 
इस सभ्यता को ताम्बवती सभ्यता भी कहते हैं क्योंकि यहां से सबसे अधिक मात्रा में तांबा प्राप्त हुआ है! 
इस संस्कृति के प्रमुख स्थल- आहत, बालाथल, गिलुड
इस सभ्यता से ताबे की कुल्हाड़ी तांबे की चूड़ियां तांबे की चादर मिली है! 
इस संस्कृति का प्रमुख केंद्र गिलुड था! 

✴️कायथ संस्कृति-
यहां से स्टेराइट व कार्नेलीयन उत्तम किस्म के पत्थरो के साक्ष्य मिले! 
इस संस्कृति के प्रमुख केंद्र कायथ व एरण था! 
प्राकहडप्पा  और हडप्पोत्तर सभ्यता  भी कहते है इसका विस्तार मध्यप्रदेश में हुआ था! 
सबसे अधिक मृदभांड यहीं से प्राप्त हुऐ है! 

✴️जौर्वे संस्कृति- 
यह संस्कृति महाराष्ट्र में फैली थी! 
इस स्थान के प्रमुख स्थल थे- जौर्वे, इनामगाव, नैवामा, दैमाबाद 
✴️इनामगांव- 
ताम्र पाषाण काल की सबसे बड़ी बस्ती थी! 
यह गांव  किले व रवांई से घिरी थी! 
✴️दैमाबाद-
भारी मात्रा में कांसे के बर्तन  मिले हैं जो इसे हड़प्पा सभ्यता मैं जोड़ते हैं और यहां से हाथी गैडे भैसे के प्रमाण मिले हैं जो इसे ताम्र संस्कृति से जोड़ते हैं! 


Saturday, March 26, 2022

मौर्योत्तर काल( भारतीय इतिहास भाग 11)

मौर्योत्तर काल दो भागों में विभाजित हो गया था
1. देसी राज्य- शुंग, कण्व, सातवाहन,चेदी
2.विदेशी राज्य- इंडो ग्रीक शक पार्थियन कुषाण

  ⚫ उत्तर मौर्य काल में उदित देसी राज्य⚫

             ✴️शुंग वंश(185-149 ई.पू.)✴️
संस्थापक- पुष्यमित्र शुंग
इसे औदभिज्जय भी कहा जाता है! 
Note- औद्भिज्जय का अर्थ होता था अचानक  उठने वाला
इसे सनातन या ब्राह्मण धर्म का उदाहरण कहा जाता है
इसे अनार्य भी कहा जाता है! 
Note- बाणभट्ट की हर्षचरित्र में ऐसे अनार्य का गया! 
अंतिम मौर्य राजा बृहद्रथ की हत्या कर यह राजा बना था! 
इसे बौद्ध धर्म के उत्पीड़न के लिए भी जाना जाता है इसने 84 हजार बौद्ध विहारओं को तुड़वाया था! 
इसका पुरोहित पतंजलि था जिसने महाभाष्य की रचना की है! 
कालिदास की रचना मालविकाग्निमित्रम् से यवन आक्रमण की जानकारी मिलती है  इसमें पुष्यमित्र शुंग के पुत्र  अग्निमित्र व विदर्भ राजकुमारी मालविका का प्रेम प्रसंग का पता चलता है! 
हाथी गुफा अभिलेख(उडीसा) के अनुसार कलिंग के राजा खारवेल को पुष्यमित्र शुंग ने हराया था! 
भरहुत स्तूप का निर्माण सतना (मध्यप्रदेश) में पुष्यमित्र शुंग  ने कराया था जिसकी खोज 1873 में कनिंघम ने की! 
बेसनगर अभिलेख(विदिशा mp) इसकी रचना यवन राजदूत हेलियोडोरस ने की थी इसे गरुण स्तंभ लेख भी कहते हैं इसमें सर्वप्रथम भागवत धर्म का वर्णन है इसका संबंध शुंग राजा भागभद्र से है! 
शुंग वंश  का अंतिम शासक देवभूति था इसकी हत्या वासुदेव कण्व ने की थी! 

                        ✴️कण्व वंश✴️
इस वंश का संस्थापक वासुदेव था
इस वंश में चार शासक आए वासुदेव भूमित्र नारायण सुशर्मन.
इस वंश का अंतिम शासक सुशर्मन था  जिसकी हत्या शिमुख की थी! 


               ✴️आंध्र सातवाहन वंश✴️
इसका संस्थापक सिमुक सातवाहन था! 
इस वंश की राजधानी प्रतिष्ठान/पैठण (महाराष्ट्र) थी! 
Note- सातवाहनों ने दक्षिण भारत का प्रथम  साम्राज्य स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है! 
महत्वपूर्ण- अमरावती शैली का विकास इसी वंश के समय हुआ था! 
इस वंश के प्रमुख राजा-
✴️सातकर्णी प्रथम-
इसने एक राजसुय यज्ञ  और दो आश्यमेघ यज्ञ कराये थे! 
✴️हाल-
यह इस वंश का 17 वा राजा था
इसने सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाए थे
इसने भाषा में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ गाथासप्तसती लिखा था! 
हॉल के दरबार में प्रमुख कवि-
गुणाढ्य-  इसने प्रसिद्ध पुस्तक व्रहतकथा लिखी थी
सर्ववर्मन- इसने प्रसिद्ध पुस्तक कातंत्र लिखी थी

✴️ गौतमीपुत्र सातकर्णि-
यह इस वंश का सबसे महान राजा था! 
नासिक से इसके 8000 चांदी के सिक्के मिले है! 
नासिक(जोगलथम्बी) अभिलेख मे इसे  अद्वितीय  ब्राह्मण कहा गया है इस अभिलेख के अनुसार इसके गुणों ने 3 समुंद्र का पानी पिया है! 
इसकी उपाधि वेणकटक स्वामी की थी! 
इसने शक राजा नहपान को हराया था! 

✴️ विशिष्ठी पुत्र पुलवामी-
इस ने आंध्र प्रदेश को जीता आंध्र प्रदेश और अमरावती को अपनी राजधानी बनाई! 
इसमें शक राजा रुद्रदामन को दो बार हराया! 
इसके सिक्को मे दो पलटवार  वाले जहाज के चित्र बना हुआ था! 
इसे पुराणों में पुलोमा कहा गया है! 
ब्राह्मणों को भूमि दान देने वाले प्रथम शासक सातवाहन  ही थे! 
मुफ्त दी जाने वाली भूमि को अग्रहर कहा जाता था! 
सात वाहनों की राजकीय भाषा प्राकृत तथा लिपि ब्राह्मी थी! 
इस वंश के समय भृगुकक्ष बंदरगाह था जिसे यूनानीयों ने बोरीगाजा बंदरगाह कहां है! 
यह राजा मां को इज्जत देने के लिए उसका नाम अपने नाम के आगे लगाते थे! 

✴️चेदि या  महामेघवाहन वंश✴️
कलिंग मैं इस राजवंश की स्थापना प्रथम शताब्दी महा मेघवाहन ने की थी! 
खारवेल किस वंश का प्रमुख राजा था जिसका संबंध हाथी गुफा अभिलेख से है! 
यह वंश जैन धर्म से संबंधित है! 
कलिंग की राजधानी दो थी- तोसली व जौगढ
इसी वंश के बाद इछवाकु, आभीर, चुटुशातकर्णो नामक वंशो का उदय हुआ! 

Wednesday, March 23, 2022

भारत में विदेशी आक्रमण (भारतीय इतिहास भाग 9)

           ✴️ भारत में विदेशी आक्रमण✴️
प्राचीन भारत में प्रथम विदेशी आक्रमण ईरान के हखामनी वंश के राजाओं ने किया! भारत पर  प्रथम विदेशी आक्रमण 526 ईसा पूर्व डेरियस प्रथम(दारा प्रथम) के सेनापति स्काईलेक्स ने  किया और गांधार को जीता! 
ईरान के आक्रमण से भारत में प्रभाव-
1. समुद्री मार्ग की खोज
2. खरोष्ठी लिपि व अरमाइक का विकास

✴️ सिकंदर महान-
इसका जन्म मकदूनिया यूरोप में 356 ईसा पूर्व में हुआ इसके पिता का नाम फिलीप द्वितीय था! 
इसकी मृत्यु बेबीलोनिया(एशिया) में 323 ईसा पूर्व में हुई! 
इसका अंतिम संस्कार सिकंदरिया (अफ्रीका) में किया गयाl
सिकंदर भारत में दूसरे विदेशी आक्रमण और प्रथम यूरोपी आक्रमण करने वाला शासक था! 
सिकंदर हिंदूकुश पर्वत के खैबर दर्रे से 326 ईसा पूर्व में  भारत आया था! 
तक्षशिला के साथ आम्भी ने सिकंदर की अधीनता स्वीकार की थी! 
सिकंदर के आक्रमण के समय  अश्वक (राजधानी मस्सग) नामक गणराज्य की स्त्रियों ने शस्त्र धारण किए थे! 
झेलम नदी के तट पर सिकंदर ने पंजाब के राजा पोरस को हराया था इस युद्ध को हाइड्रोस्पीज या वितिस्ता का युद्ध भी कहते हैं! 
19 महीने के बाद तक भारत में रहने के बाद इसकी सेना ने व्यास नदी पार करने से इंकार कर दिया! इसके बाद सिकंदर ने अपने विद्युत क्षेत्र अपने सेनापति फिलिप को देखकर स्थल मार्ग से वापस लौट गया! 
सिकंदर ने दो नगर बस आए थे-
निकैया- भारत विजय के उपलक्ष्य पर
बऊकेफला- अपने प्रिय घोड़े की याद में
सिकंदर के आक्रमण से क्षप प्रणाली व मुद्रा निर्माण की कला विकसित हुई! 
सिकंदर प्रथम शासक है जिसकी मृत्यु जन्म और अंतिम संस्कार विभिन्न  महाद्वीपों में हुआ! 

मगध का उदय( भारतीय इतिहास भाग 8)

                  🟠 मगध का उदय🟠
मगध महाजनपद अखंड भारत की परिकल्पना को सिद्ध करता है इतने कौशल वत्स तथा अवंती को पराजित कर एक नए मगध की नींव रखी! 
मगध में राजवंश का उदय-
मगध में तीन राजवंश थे परंतु पुराणों के अनुसार चार  राजवंश थे-
1. ब्रहद्रथ  2. हर्यक 3. शिशुनाग 4.नंद 

1.हर्यक  वंश-
इस वंश को मगध का वास्तविक वंश माना जाता है इसके संस्थापक हर्यक थे! 
इस वंश को पित्र हंता वंश कहा जाता है! 
✴️ बिंबिसार-
इस वर्ष का एक शासक बिंबिसार था जिसने अपनी राजधानी राजगृह या गिरीब्रज बनाई! 
जैन साहित्य में इसे श्रेणिक कहा गया! 
इतने विवाह नीति द्वारा राज्य का विस्तार किया! 
इसका पहला विवाह लिच्छवि की राजकुमारी चेलना के साथ हुआ जिससे पुत्र अजातशत्रु का जन्म हुआ! 
इसका दूसरा विवाह मोडरा (मंद्र) की राजकुमारी क्षेमा से हुआ! 
इसका तीसरा विवाह कौशल की राजकुमारी महाकौशला देवी से हुआ और दहेज में इसे काशी गांव मिला! 
Note- भारतीय इतिहास का पहला दहेज का उदाहरण बिंबिसार तथा महाकौशला देवी का विवाह है! 
😂 महावग्ग नामक ग्रंथ के अनुसार बिंबिसार की 500 रानियां थी! 
Important- बिंबिसार का राज वैद्य जीवक था जो अवंती नरेश चंडप्रघोत के पांडुरोग अर्थात पीलिया के इलाज के लिए गया था! 
बिंबिसार की हत्या उसके पुत्र अजातशत्रु ने की! 


✴️ अजातशत्रु-
इसे कुनिक या लिच्छिवी दौहित्र कहा जाता है! 
Important- वैशाली(लिच्छवी) विश्व का पहला गणतंत्र वाला राज्य था! 
इसी के समय में सप्तपर्णी गुफाएं में प्रथम बौद्ध संगीति हुई! 
इसकी हत्या इसके पुत्र उदायनी ने की! 

✴️ उदायनि-
पुराणों के अनुसार  किसने गंगा तथा सोन संगम में कुसुमपुर या पुष्पपुर की स्थापना की जिसे पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता है! 
इसने पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी भी बनाया! 
इसने जैन धर्म को अपनाया था! परंतु अजातशत्रु बौद्ध धर्म का अनुयाई था! 
इस वंश का अंतिम शासक नाग दशक था जिसकी हत्या शिशुनाग ने की थी! 

2. शिशुनाग वंश-
इसका संस्थापक शिशुनाग था जिसने अपनी राजधानी वैशाली बनाई! 
✴️ कालाशोक-
इसने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र बनाई! 
इसे पुराणों में काकवर्ण कहा गया
यह बौद्ध धर्म का अनुयाई था इसके समय में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में हुआ! 
इस वंश का अंतिम राजा नंदी वर्धन था! 

3. नंद वंश-
इस वंश को इतिहास का प्रथम अनार्य वंश या क्षत्रीय वंश कहते हैं! 
याद रखे- पुष्यमित्र शुंग को अनार्य कहते है! 
नंद वंश का संस्थापक महापदमनंद था
✴️महापदमनंद-
इसे भार्गव द्वितीय परशुराम एकराट  एकच्छत्र सर्वक्षत्राहंतक के नाम से भी जाना जाता है! 
✴️ घनानंद-
यह एक अत्याचारी राजा था  जो जैन धर्म को मानता था! 
इसे जेनोफोन की बुक में अग्रमीज कहा गया है! 
यह सिकंदर का समकालीन था इस वंश का अंतिम शासक भी यही था जिसे चाणक्य की  मदद से चंद्रगुप्त ने पराजित किया और मौर्य वंश की नींव रखी! 

महाजनपद का उदय 6 भाग

             ✴️महाजनपद का उदय✴️
गार्डन चाइल्ड ने अपनी पुस्तक अर्बन रेवोलुशन में महाजनपद काल को द्वितीय नगरी क्रांति कहा है इसका आधार लोगों को माना था! 
🟠 महाजनपदों की सूची का स्त्रोत-
1. बौद्ध ग्रंथ- अंगुत्तर निकाय और महावस्तु
2. जैन ग्रंथ- भगवती सूत्र
✴️सबसे अधिक शक्तिशाली जनपद- मगध कौशल वत्स अवंती
✴️16 महाजनपदों में से वज्जि व  मल्ल में गणतंत्र  बाकी में राजतंत्र था! 
✴️विश्व का सबसे प्राचीन नगर पाटलिपुत्र था! 
बौद्ध ग्रंथ महापरिनिर्वाणसूत्त के अनुसार प्राचीन ✴️भारत के 6 महानगर चंपा राजगृह श्रावस्ती कौशांबी काशी साकेत(अयोध्या) का वर्णन है! 

16 महाजनपद  का वर्णन-
1. काशी-
✴️ इसकी राजधानी वाराणसी थी! 
✴️ इसका प्रथम उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है! 

2. कौशल-
इसकी राजधानी श्रावस्ती वर्तमान का फैजाबाद मंडल थी! 
महाकाव्य काल में कौशल की राजधानी अयोध्या दी! 

3. अंग-
इसकी राजधानी वर्तमान चम्पा अर्थात वर्तमान का भागलपुर (मुंगेर) थी! 

4. मगध- 
इसकी राजधानी राजगृह या गिरीब्रज अर्थात वर्तमान का दक्षिणी बिहार थी! 
यह महाजनपद काल का सबसे प्राचीन तथा सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद था! 

5. चेदी- 
इसकी राजधानी सूक्तिमति अर्थात वर्तमान का बुंदेलखंड थी! 

6. वत्स-
इसकी राजधानी कौशांबी अर्थात वर्तमान का बांदा (इलाहाबाद) थी! 

7. असमक-
इसकी राजधानी पोतना या पोटली थी जो बाद में प्रतिष्ठान बनी! 
यह महाजनपद एकमात्र महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर था! 

8- गांधार-
इसकी राजधानी तक्षशिला थी अर्थात वर्तमान का रावलपिंडी पेशावर (पाकिस्तान) थी! 

9. मत्स्य-
इसकी राजधानी विराट नगर अर्थात वर्तमान का अलवर (भरतपुर "जयपुर") थी! 
मत्स्य की राजधानी विराटनगर में ही पांडव अज्ञातवास अर्थात प्रवास के दौरान रुके थे! 

10- कम्बोज-
इस महाजनपद की राजधानी राजपूर थी  अर्थात वर्तमान का चाहाटक (कश्मीर) थी! 
यह क्षेत्र घोड़ों के लिए प्रसिद्ध था! 

11. कुरु
इनकी राजधानी इंद्रप्रस्थ अर्थात वर्तमान का मेरठ ,दिल्ली  का क्षेत्र था! 
यहां का राजा कौरव्य था इसके पौत्र कौरव तथा पांडव थे! 

12. पांचाल-
इसकी दो राजधानी थी-
उत्तर पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र अर्थात बरेली रामनगर वाला क्षेत्र.
दक्षिण पांचाल इसकी राजधानी काम्पिल्य अर्थात वर्तमान का फर्रुखाबाद थी! 

13. शूरसेन-
इसकी राजधानी मथुरा अर्थात ब्रजमंडल थी ! 
यही के राजा श्री कृष्ण थे! 

14. अवंती
इसकी भी दो राजधानियां थी-
उत्तर अवंती क्षेत्र की राजधानी उज्जैनी
दक्षिण अंतिकी की राजधानी महिष्मति

15. वज्जी-
इसकी राजधानी वैशाली अर्थात वर्तमान का बिहार थी! 
यह एक आठ राज्यों का संघ था! 

16. मल्ल
इसकी राजधानी कुशीनगर तथा पावा  अर्थात वर्तमान का गोरखपुर (देवरिया)  क्षेत्र था! 

✴️बुद्ध के समय 10 गणतंत्र थे!
1. कपिलवस्तु के शाक्य
2. सुमसुमारा के भग्ग
3. अलकप्प के बुली 
4. केसमुत्ति के कलाम 
5. रामग्राम के कोलिय
6. कुशीनारा के मल्ल 
7. पावा के मल्ल
8. पिप्पलिवन के मोरिय
9. वैशाली के लिच्छवि
10. मिथिला के विदेह

Monday, March 21, 2022

उत्तराखंड की विगत परीक्षा में आए सामान्य ज्ञान के प्रश्न-

✴️ उत्तराखंड की विगत परीक्षा में आए सामान्य ज्ञान के प्रश्न✴️
1- यंग इंडिया के संपादक कौन थे- महात्मा गांधी
Note- यह एक अंग्रेजी अखबार था जो 1919 मे निकला था जो 12 वर्षों तक चला! 
2- यूरोपीय संघ का मुख्यालय है- ब्रुसेल्स
Note- यूरोपीय संघ मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में है। 1993 में मास्ट्रिच संधि पर हस्ताक्षर के साथ यूरोपीय संघ अस्तित्व में आया। इसमें 27 देश है! 
3- शिक्षा परीक्षण एवं स्वास्थ्य पर किया गया वह क्या कहलाता है- मानव पूंजी
Note-मानव पूंजी एक अवधारणा है जिसका उपयोग अर्थशास्त्रियों और सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा उत्पादन प्रक्रिया में उपयोगी मानी जाने वाली व्यक्तिगत विशेषताओं को नामित करने के लिए किया जाता है। इसमें कुछ नाम रखने के लिए कर्मचारी ज्ञान, कौशल, जानकारी, अच्छा स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल है। 
4- ईस्ट इंडिया कंपनी को दीवानी प्रदान की थी- शाह आलम द्वितीय
Note- मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी दी। बक्सर की लड़ाई अंग्रेजों और मीर कासिम, शुजा उद दौला जो अवध के नवाब थे और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना के बीच लड़ी गई थी। यह लड़ाई अंग्रेजों ने जीती थी
5- संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई थी- 9 दिसंबर 1946 को
Note- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन हॉल, जिसे अब संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के नाम से जाना जाता है, में हुई। इसकी अध्यक्षता सच्चिदानंद सिन्हा ने कीl
5- 1932  में कोलकाता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बंगाल के गवर्नर पर किस क्रांतिकारी महिला ने गोली चलाई- बिना दास
Note- 6 फरवरी 1932 को कलकत्ता विश्वविद्यालय में समावर्तन उत्सव( दीक्षांत समारोह) मनाया जा रहा था। बंगाल के अंग्रेज लाट सर स्टैनले जैकसन मुख्य अतिथि थे। उस अवसर पर कुमारी वीणादास जो उपाधि लेने आई थी ने गवर्नर पर गोली चला दी।
6- वायु की गति मापने वाला यंत्र है- एनीमोमीटर
7- राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कब मनाया जाता है- 24 अप्रैल
Note- भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने 24 अप्रैल 2010 को पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस घोषित किया था। 
8- राज्य के नीति निर्देशक तत्व का उद्देश्य है-  लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना
Note- राज्य के नीति निर्देशक तत्व (directive principles of state policy) जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के नवीनतम तत्व हैं। सबसे पहले ये आयरलैंड (Ireland) के संविधान मे लागू किये गये थे। ये वे तत्व है जो संविधान के विकास के साथ ही विकसित हुए है। इन तत्वों का कार्य एक जनकल्याणकारी राज्य (वेलफेयर स्टेट) की स्थापना करना है। इनका वर्णन भारतीय संविधान के चौथे भाग में 36 से 51 अनुच्छेद में किया गया! 
9- भारत में गरीबी का सर्वप्रथम अनुमान किया गया- बगीचा सिंह मीन्हास द्वारा
Note- भारतीय गरीबी के निर्धारण का आधार उद्योग में है
1971 में आजादी के बाद सबसे पहले दांडेकर रथ फार्मूले के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से गरीबी का निर्धारण किया गयाl
1979 में अलघ समिति की रिपोर्ट के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी से कम उपयोग करने वाले व्यक्ति को गरीब माना जाता है! 
लकड़वाला समिति ने 1989 गरीबी का निर्धारण मूल्य स्तर के आधार पर किया! 
गरीबी के आंकड़े  राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) प्रदर्शित करता है ! 
10-तृतीय अंग्रेज मराठा युद्ध के दौरान गवर्नर जनरल कौन था- लॉर्ड हेस्टिंग्स
Note-  अंगेज़ों और मराठों के मध्य तीन आंग्ल-मराठा युद्ध हुए
✴️प्रथम युद्ध (1775 - 1782 ई.) में   हुए प्रमुख संधि-
सूरत की संधि 1775 रघुनाथ राव और अंग्रेजों के मध्य, 
पुरंदर की संधि 1776 तथा बड़गांव की संधि 1789 में हुई! 
सालबाई की संधि पुणे दरबार और अंग्रेजों के मध्य 1782 में हुई से ही युद्ध की समाप्ति हुई! 
 महत्वपूर्ण- इस युद्ध में कर्नल कीटिंग, कर्नल अप्टन, कर्नल एगटस तथा उसके बाद कर्नल काकबर्क ने अग्रेजों की अगुवाई की। इस समय काल में वारेन हेस्टिंग बंगाल का गवर्नर था
✴️द्वितीय युद्ध (1803 - 1805 ई.)
✴️तृतीय युद्ध (1817 - 1819 ई.)-इस युद्ध में अंग्रेजों ने लार्ड मार्क्विस हेस्टिंग्स के नेतृत्व में युद्ध लड़ा और मराठों की तरफ से बाजीराव द्वितीय एवं अन्य मराठा सरदारों ने अगवाई की थी यह युद्ध “पूना की संधि” से समाप्त हुआ अंग्रेजों द्वारा पेशवा का पद समाप्त कर दिया गया।

11- सिमलीपाल जीव मंडल स्थित है- उड़ीसा
Note- उड़ीसा में चिलिका वन्यजीव अभयारण्य,कोटगढ़ वन्यजीव अभयारण्य,हदगढ़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य,नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क, सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख है! 

12- राज्यसभा के राष्ट्रपति का चुनाव किस निर्वाचन मंडल के द्वारा होता है- संसद के समस्त सदस्य द्वारा
Note- भारत के संविधान का अनुच्छेद 63 यह उपबंध करता है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। अनुच्छेद 64 और 89 यह उपबंध करते हैं कि भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा।
13- भारत में श्वेत क्रांति के जनक माने जाते हैं- वी कोरियर
Note-श्वेत क्रान्ति को ऑपरेशन फ्लड के नाम से भी जाना जाता हैं। इसे 1970 में लांच किया गया  1 जुलाई 2001 से विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है! 
14- भरतपुर के जाट राज्य की स्थापना की गई थी- सूरजमल और बदन सिंह द्वारा
Note- सूरजमल जाट राज्य का एक योग्य एवं विद्वान शासक था जिसके शासनकाल में जाट राज्य अपने चरणों उत्कर्ष पर था इसे जाटों का अफलातून भी कहा जाता हैl
15-भारत में वन नीति कब लागू हुई- 1952
 Note- भारत सरकार ने पहली राष्ट्रीय वन नीति 1952 में जारी की थी। परन्तु भारत में वन नीति की शुरुआत ब्रिटिश काल में 1894 में हो गयी थी। 1952 और 1988 में इसमें संशोधन किये गए।
16- बंदी प्रत्यक्षीकरण लेख जारी किया जाता है- व्यक्ति को न्यायालय के सामने प्रस्तुत करने के लिए
Note-सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा प्रादेश (रिट, writ) जारी करने का अधिकार दिया गया है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 - जो एक मैलिक अधिकार नहीं है - मूल अधिकारों का उल्लंघन न होने पर भी इन विशेषाधिकार प्रादेशों को जारी करने का  अधिकार है! 
17-मौसम की संबंधित दशाएं वायुमंडल की किस परत में होती है- क्षोभ मंडल
Note- क्षोभ मंडल- मौसम संबंधी परिवर्तन इसी मंडल में होते हैं इसलिए इसे परिवर्तन मंडल भी कहते हैं! 
समताप मंडल- ओजोन परत में पाए जाने वाले इस मंडल में ताप संबंधित घटनाएं होती है इसे ओजोन मंडल भी कहते हैं! 
18- विश्व व्यापार संगठन किस संगठन का उत्तराधिकारी है- जनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड ट्रेरिफ
Note- विश्व व्यापार संगठन की स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी। यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जो राष्ट्रों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमन से संबंधित है। वर्तमान में, 164 देश इस संगठन के सदस्य हैं। WTO के वर्तमान महानिदेशक रॉबर्टो अज़ेवेडो और मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में हैं।
19- बाबा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित बाबा कवच है- भारतीय सैनिक बलों हेतु बनाया गया अगली पीढ़ी के हल्के वजन की बुलेट प्रूफ जैकेट
Note- बाबा परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना 3 जनवरी 1954 को मुंबई में हुईl
20- पॉवर्टी एंड अनब्रिटिश रूल ऑफ इंडिया के लेखक हैं- दादा भाई नौरोजी
 Note- दादा भाई नौरोजी को भारत का ग्रैड ओल्ड मैन कहते हैं उन्होंने सबसे पहले राष्ट्रीय आय की गणना की थीl
21- भारत में काम के बदले अनाज कार्यक्रम शुरू किया गया- 1977-78
Note- काम के बदले अनाज पांचवी पंचवर्षीय योजना में अंत्योदय योजना(1977-78) के साथ शुरू की गईl
👉भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक नए "काम के बदले अनाजकार्यक्रम की 14 नवंबर 2004 से शुरूआत की है. उन्होंने यह नया कार्यक्रम आंध्र प्रदेश में रंगा रेड्डी ज़िले के अलूर गाँव से शुरू की! 
22- डचों ने बंगाल में अपने पहले केंद्र की स्थापना की- चिनसुरा
Note- प्रथम डच गवर्नर: पीटर बोथ। भारत में उन्होंने 1605 में मुस्लीपट्टनम में पहला कारखाना स्थापित किया, उसके बाद 1610 में पुलिकट, 1616 में सूरत, 1641 में बिमिलीपट्टम और 1653 में चिनसुराह में स्थापित किया। चिनसुराह का कारखाना बिहार, बंगाल, उड़ीसा और बांग्लादेश में सभी डच एजेंसियों और कारखानों का मुख्यालय था।
23- हड़प्पा कालीन स्थल लोथल कौन से राज्य में है- गुजरात
Note- लोथल गुजरात के अहमदाबाद ज़िले में 'भोगावा नदी' के किनारे 'सरगवाला' नामक ग्राम के समीप स्थित है।खुदाई 1954-55 ई. में 'रंगनाथ राव' के नेतृत्व में की गई।
24- सीमांत गांधी के नाम से किसे जाना जाता है- खान अब्दुल गफ्फार खान
Note- ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान सीमाप्रांत और बलूचिस्तान के एक महान राजनेता थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और अपने कार्य और निष्ठा के कारण "सरहदी गांधी", "बच्चा खाँ" तथा "बादशाह खान" के नाम से पुकारे जाने लगे।
25- संयुक्त राष्ट्र निशस्त्रीकरण आयोग की स्थापना की गई- 11 जनवरी 1952
26- किस अधिनियम के द्वारा वर्मा को भारत से पृथक किया गया- अधिनियम 1935
Note- 1935 के अधिनियम में केंद्र में द्वैध शासन (दोहरा शासन) की व्यवस्था लागू की गई थी।
27- भारत सरकार ने किसानों के लिए राष्ट्रीय नीति मंजूर की- 2007
28- स्वेज नहर दोनों सिरे पर स्थित पतन युग्म में है- पोर्ट सईद व तेंफिक
Note- स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती हैl 
29- नाबार्ड की  स्थापना- 12 जुलाई 1982
Note-NABARD का फुल फॉर्म National Bank For Agriculture and Rural Development या राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक है. इसका मुख्यालय (headquarter) मुंबई, महाराष्ट्र में है. नाबार्ड की स्थापना वर्ष 12 जुलाई 1982 में विकास सहायता' और 'गरीबी में कमी' लाने के लिए की गई थीl
30- भारत में वस्तु निर्यात के अंतर्गत सभी देशों को कितने भागों में विभाजित किया है- तीन भागो में
31- ओ.पी.ई.सी.का मुख्यालय- वियना
Note- 1960 से ही इस संगठन का मुख्यालय विएना में है जहाँ सदस्य देशों के तेल मंत्रियों की समय-समय पर बैठक हुआ करती है। 
32- गांधी जी द्वारा किए गए आंदोलन का सही क्रम है - चंपारण आंदोलन(1917) खेड़ा सत्याग्रह (1918) अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन(1918) खिलाफत आंदोलन (1919) सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) भारत छोड़ो आंदोलन (1942) 

Saturday, March 19, 2022

वैदिक सभ्यता( भारतीय से भाग 4)

                    🌟 वैदिक सभ्यता 🌟
इस सभ्यता का समय काल 1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तथा इसे दो भागों में बांटा जाता है! 
1- ऋग्वैदिक काल(1500-1000 ईसा पूर्व) 
2- उत्तर वैदिक काल(1000-600 ईसा पूर्व) 
Note- वैदिक सभ्यता की स्थापना का श्रेय आर्यो को जाता है  इस शब्द का अर्थ श्रेष्ठ उत्तम अभिजात कुलीन होता है! 
✴️1853 मैक्समूलर ने आर्य जाति को श्रेष्ठ जाति कहकर संबोधित किया उसने कहा कि यह मध्य एशिया से भारत आए थे! 
✴️ एक समान भाषा बोलने वालों को भी आर्य कहा जाता है तथा  इंडो-यूरोपियन भाषा बोलने वाले समूह को भी आर्य कहते हैं! 
🟠 मूल स्थान से संबंधित मत-
1- मध्य एशिया या बैक्टीरिया से संबंधित मत-जर्मन विद्वान मैक्स मूलर ने देखा कि इरानी ग्रंथ जेन्द अवेस्ता से इस सभ्यता की कई बातें मिलती है! अतः आर्य  मुल रूप से मध्य एशिया के निवासी थे यहां एक प्रमाणित मत है! 
2- उत्तर ध्रुव से संबंधित मत- बाल गंगाधर तिलक ने अपनी पुस्तक द ऑर्थोटिक होम आफ आर्यन मे आर्यों को उत्तरी ध्रुव का मूल निवासी माना है! 
3- तिब्बत संबंधित मत- दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में इन्हें तिब्बत से संबंधित बताएं! 
4- सप्तसैंधव क्षेत्र- अविनाश चंद ने आर्यो को सप्तसिंधु क्षेत्र का बताया है! 
🟠आर्यो के जानकारी के साधन-
1- बोगजकोई अभिलेख- यह विश्व का सबसे प्राचीन अभिलेख है जो ईरान से प्राप्त हुआ इसे एशिया माइनर अभिलेख भी कहते हैं इसमें ऋग्वेद के देवता इंद्र वरुण मित्र नासत्य का वर्णन मिलता है! 
Note- भारत में सबसे प्राचीन अभिलेख अशोक के अभिलेख है! 
2- वेद-  वे शब्द विद धातु से बना है जिसका अर्थ होता है जानना या ज्ञान प्राप्त करना था इसके संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास जी थे इसकी उपनाम श्रुति ग्रंथ साहित्य ग्रंथ और अपौरुषेय ग्रंथ है! 
Note- श्रुति ग्रंथ- सुनकर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जान पहुंचाएं अर्थात गुरु शिष्य परंपरा
अपौरुषेय ग्रंथ- देवताओं द्वारा रचित ग्रंथ
महत्वपूर्ण- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद को वेदत्रेयी कहा जाता है! 
वेदों के प्रकार- वे चार प्रकार के होते हैं! 
1- ऋग्वेद- 
सबसे प्राचीन वेद है! 
इसको पढ़ने वाले को होर्त या होता कहा जाता है! इसका उपवेद आयुर्वेद है!जिसके रचनाकार प्रजापति है! 
इसमें 10 मंडल 1028 सूक्त और 10462 मंत्र है! 
इसके ब्राह्मण ग्रंथ ऐतरैय व कोषीतकी  है!
इसमें पहला आठवां नौवां और दसवां मंडल बाद में जोड़ा गया! 
इसमें सबसे पवित्र नदी सरस्वती है! 
चौथे मंडल में कृषि का वर्णन है! 
तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र है! 
दसवीं मंडल में चतुर्वर्ण व्यवस्था का उल्लेख है! 
इसमें नवे मंडल में सोम देवता का वर्णन है! 
इसमें साथ में मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन है! 
असतो मा सद्गमय वाक्य भी इसी वेद से लिया गया

2- सामवेद-
भारत में संगीत का जनक किसी वेद को कहा जाता है! 
इसको पढ़ने वाले को उद्रगाता  कहा जाता है! 
इसका उपयोग गंधर्व वेद है जिसकी रचना महर्षि नारद ने की है! 
इसका ब्राह्मण ग्रंथ पंचवीस है जिसके रचनाकार जैमिनी है! 
इसमें मूल मंत्र 75 है! 
3- यजुर्वेद-
यजु का अर्थ होता है- यज्ञ से
इसमें गद्य तथा पद्य दोनों है अर्थात यह चम्पू शैली का वेद है! 
इसको पढ़ने वाले को अध्वर्यु कहा जाता है! 
किस वेद में हाथी पालन का वर्णन भी मिलता है! 
यह दो प्रकार का होता है-
1- कृष्ण यजुर्वेद- इसमें  गद्य तथा पद्य दोनों है! 
2- शुक्ल यजुर्वेद- इसमें केवल पद होते हैं इसे वाजसनेयी  संहिता भी कहते है! 
4- अथर्ववेद-
यह वेद अथर्व ऋषि द्वारा रचित है! 
इस वेद में औषधियों वशीकरण जादू टोना आदि का वर्णन है
इसका उपवेद शिल्प वेद है जिस के रचनाकार विश्वामित्र है! 
इसका ब्राह्मण ग्रंथ गोपथ है! 
इसमें  काशी का वर्णन तथा मगध महामारी फैलने का वर्णन  भी किया गया! 
🟠 पुराण- पुराणों की संख्या 18 इनके संकलनकर्ता लोमहर्ष तथा उसके पुत्र उग्रश्रवा है सबसे प्राचीन तथा प्रमाणित पुराण मत्स्य पुराण है
🟠 आरण्यक ग्रंथ- 
वनों में रचे गए यह ग्रंथ है जो वानप्रस्थ आश्रम के ऋषि द्वारा लिखे जाते हैं! 
इनका उद्देश्य है ईश्वर की उपासना में बोल देना! 
इनकी संख्या 7 है- ऐतरेय तैत्तिरीय माध्यन्दिन शंखायन  मैत्रायणी मलवकार वृहदारण्यक ! 
🟠 उपनिषद-
गुरु के समीप निष्ठा पूर्वक बैठना उपनिषद का अर्थ होता है! 
यह दार्शनिक विचारधारा के ग्रंथ है! 
इनकी संख्या 108 है इसमें 11 वह13 प्रमुख है! 
दारा शिकोह ने उपनिषदों का फारसी अनुवाद किया था! 
शंकराचार्य ने उपनिषदों में भारतीय की रचना की जिसे वेदांत दर्शन कहा जाता है! इनकी संख्या 6 है शिक्षा ज्योतिष कल्प व्याकरण निरुक्त छंद! 
सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया! 
        ऋग्वेदिक सभ्यता(1500-1000 ईसा पूर्व) 
🟠भौगोलिक विस्तार- यह सप्त सैंधव क्षेत्र में फैली था! अर्थात  7 नदियों से घिरा क्षेत्र यह नदियां सिंधु सरस्वती सतलाज व्यास रावी झेलम चिनाब थी! 
🟠 राजनीतिक जीवन- आर्यो  को पंच जन कहते थे क्योंकि इनके 5 कबीले होते थे- पुरू अनु द्रुहू  तुर्वस यदु थे! 
महत्वपूर्ण प्रशासनिक शब्द-
राजन या गोप- राष्ट्री का मालिक
पुरोहित- जन का मालिक
विशापति- विश का मालिक
ग्रामीणी- गांव या ग्राम का मालिक
कुलुप- कुल का मालिक
Note- ऋग्वैदिक काल में कुल सबसे छोटी इकाई थी
सभा और समिति दोनों ऋग्वैदिक काल की जनतांत्रिक संस्थाएं मानी जाती है! 
महत्वपूर्ण-
विदथ सबसे प्राचीन संस्था थी, इसका ऋग्वेद में 122 बार उल्लेख हुआ है जबकि समिति का 9 बार और सभा का 8 बार उल्लेख हुआ है। सभा वृद्ध जनों एवं कुलीन लोगों की संस्था थी। समिति कबीले की आम सभा होती थी।  जिसका राजा पर पूर्ण नियंत्रण होता था स्त्रियां सभा और समिति में भाग लेती थी !विदथ के संगठन और कार्यों के बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
बली एक प्रकार का कर था जो जनता स्वेच्छा से राजा को देती थी! 
ऋग्वेद के सातव मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन किया गया है जो परुष्णी अर्थात रावी नदी के तट पर भरत जन तथा 10 अन्य जनों के बीच हुआ था इसमें भरत जन के प्रमुख सूदास की विजय हुई! 
🟠 आर्थिक स्थिति- 
यह सभ्यता एक कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाली सभ्यता थी जिसका प्रमुख व्यवसाय पशुपालन था! 
गाय को अघग्या कहा जाता था! और सबसे उपयोगी पशु घोड़ा था! 
इस काल में लोहे का प्रचलन नहीं था और सर्वप्रथम ताबे का प्रयोग किया था! 
✴️ आर्थिक स्थिति से जुड़ी शब्दावली-
त्वष्ठा या तक्षण- बढ़ई
कमरि- धातुकार
यव- जौ
उर्दर- अनाज मापने वाला एक पात्र
हिरण्य- सोना
अयस- तांबा
🟠 सामाजिक स्थिति-
ऋग्वेद के दसवें मंडल में पुरुष सूक्त चार वर्णों की उत्पत्ति का उल्लेख है परंतु यह अस्तित्व में उत्तर वैदिक काल में आए! 
ऋग्वैदिक काल पितृसत्तात्मक था परंतु स्त्रियों की स्थिति काफी अच्छी थी! परिवार के मुखिया को कुलक(पिता) कहा जाता था
इस समय बाल विवाह सती प्रथा दहेज प्रथा पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था! 
सोम रस प्रमुख पेय पदार्थ था! 
समाज में विधवा विवाह  दास प्रथा नियोग प्रथा का प्रचलन था! 
Note- जब किसी स्त्री के बच्चे नहीं होते या उसके पति की अकाल मृत्यु हो जाती है तो वह अपने देवर या संबंधी द्वारा गर्भ धारण करती है इसे ही नियोग प्रथा कहते हैं! 
इस काल की प्रमुख स्त्रियां लोपमुद्रा घोषा अपाला  विश्ववरा थी! 
 Note- जीवन भर अविवाहित स्त्री को अमाजु कहा जाता था! 

🟠 धार्मिक स्थिति-
आर्यों ने प्राकृतिक शक्तियों का दैव्यकरण किया! 
यासक ने देवताओं को तीन भागों में बांटा-
1- आकाशवासी देवता-
धौ/धौस- सबसे प्राचीन देवता इन्हें सर्जन का देवता कहा जाता था 
इनकी तुलना यूनानी देवता ज्यूस के सामान की जाती है! 
सूर्य- उगता हुआ सूरज इन्हें तेज का देवता कहा जाता है! 
वरुण- इसे ऋत का संरक्षक या ऋतस्यगोप को कहा जाता है इनका ऋग्वेद में सातवें मंडल मे 30 बार उल्लेख है इन्हें देवताओं का देवता कहा जाता है! समुद्र का देवता, विश्व के नियामक और शासक सत्य का प्रतीक, आकाश, पृथ्वी एवं सूर्य का निर्माता के रूप में जाना जाता है। 
Note- ऋतस्यगोप का मतलब होता है ऋतु परिवर्तन एवं दिन रात का कर्ताधर्ता! 
उषा- इन्हें उत्थान की देवी या प्रगति की देवी कहा जाता है! 
सविता(सावीत्री)- इन्हें अमृत की देवी कहा जाता है ऋग्वेद का तीसरा मंडल में वर्णित गायत्री मंत्र इन्हीं को समर्पित है! 
षूषन- पशुओं के देवता थे जो उत्तर वैदिक काल में शूद्रों के प्रमुख देवता बन गए! 
अश्वनी- चिकित्सा के देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक

2.अंतरिक्ष के देवता-
इंद्र- इन्हें युद्ध का देवता कहा जाता था यह आर्यों के प्रमुख देवता थे जिनके लिए ऋग्वेद में 250 सूक्त है! 
मरुत- इन्हें तूफान का देवता कहा जाता है! 
पर्जन्य (बादल)- इन्हें वर्षा का देवता कहा जाता है! 

3. पृथ्वी के देवता-
पृथ्वी- सर्जन की देवी
अग्नि- इन्हें अतिथि देवता या आर्यों का पुरोहित कहा जाता है इनके लिए ऋग्वेद में 200 श्लोक है! 
सोम- इन्हें वनस्पति का देवता कहते हैं इनका वर्णन ऋग्वेद के नवे मंडल में है इनके लिए 120 श्लोक है!
बृहस्पति- यज्ञ के देवता

      उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व) 

✴️ इस काल को ब्राह्मण धर्म काल भी कहते हैं! 
✴️ लोहे की खोज होने के कारण इसे लोगों प्रौद्योगिकी युग भी कहा जाता है! 
✴️ इस काल में सर्वप्रथम चित्रित मृदभांड मिले हैं! 
✴️ इस काल का केंद्र गंगा यमुना का दोआक था जो कुरुक्षेत्र तक था! 

राजनीतिक स्थिति-
इस काल में राजा के दैवीय उत्पत्ति का सिद्धांत अस्तित्व में आया जिसका पहला वर्णन ऐतरेय ब्राह्मण में मिलता है! 
राजा का  वंशानुगत  हो गया था जिसे सम्राट या एकराट कहा जाता था! 
बली एक अनिवार्य कर हो गया था जो ऊपर का 1/16वा भाग  हो गया था! 
Important- प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार कर की दर 1/6 भाग थीl
विजयनगर राजवंश प्राचीन धर्म ग्रंथों मे वर्णित  कर की दर पर आधारित कर वसूल करता था! 

🟠प्रमुख अधिकारी-
रत्नी- राज्य के उच्च अधिकारी को रत्नी कहते हैं जिसका वर्णन  शतपथ ब्राह्मण में 12 बार आया है! 
सूत- सारथी
भागदूध- कर संघकर्ता
महिषी- प्रमुख रानी
पालागत- विद्वान
श्रमण- वेद विरोधी अध्यापक

🟠आर्थिक स्थिति-
इस काल का मुख्य व्यवसाय कृषि था! 
अतरंजीखेड़ा (यूपी) से कृषि के लोहे के यंत्र मिले हैं जो लोहे का प्रथम प्रमाण है! 
इस काल में मुद्रा का प्रचलन हो गया था निष्क जो ऋग्वैदिक काल में स्वर्ण आभूषण था! यह उत्तर वैदिक काल मैं प्रमुख मुद्रा बन गई थी! 
इस काल में उर्फ(उन) और शज(सन) का उल्लेख मिलता है! 
🟠 धार्मिक स्थिति-
इस काल में कर्मकांड ओं का उदय हुआ! 
सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में पुर्वजन्म व मृत्यु का उल्लेख है जबकि मोक्ष का वर्णन उपनिषदों  मे मिलता है! 
इस काल के प्रमुख देवता-
प्रजापति- सर्वोच्च देवता तथा सर्जन के देवता
रुद्र- पशु का देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक
पूषक- यह शूद्रों के देवता थे! 

🟠 सामाजिक स्थिति-
चार वर्णो का उदय हुआ- ब्राह्मण क्षेत्रीय शूद्र वैश्य
इस काल में स्त्रियों की स्थिति मैं गिरावट आई इस काल की प्रमुख स्त्रियां- गार्गी गंधर्व गृहिता मैत्रीय वेदवती थी! 
जाबालोपनिषद में चार आश्रमों का उल्लेख है! 
✴️इस काल में त्रिऋण का उल्लेख है-
1.पितृ ऋण- संतान उत्पन्न करने से
2. ऋषि ऋण- वेदों के अध्ययन से
3. देव ऋण- यज्ञ करने से

🟠 विवाह के 8 प्रकार-
1- ब्रह्मा विवाह- योग्य वर के साथ विवाह
2- देव विवाह- पुरोहित के साथ विवाह
3- आर्ष विवाह- दो गायों के बराबर धन देकर किया जाने वाला विवाह! 
4- प्रजापत्य विवाह- पिता द्वारा कन्या का हाथ माग कर के किया गया विवाह
Note- ब्रह्मा विवाह देव विवाह आर्ष विवाह प्रजापत्य विवाह इन विवाह को प्रसन्न विवाह कहते है! 
5- असुर विवाह- धन के बदले किया जाने वाला विवाह
6- गंधर्व विवाह- प्रेम विवाह
7- पैचास विवाह- बलात्कार करके किया जाने वाला विवाह
8- राक्षस विवाह- बलपूर्वक किया जाने वाला विवाह

🟠 प्रमुख यज्ञ-
अश्वमेघ यज्ञ- राजा द्वारा साम्राज्य विस्तार के लिए घोड़ा छोड़ दिया जाता है! 
Note- अंतिम अश्वमेघ यज्ञ सवाई जयसिंह ने कराया था! 
राजसुय यज्ञ- राज अभिषेक के दौरान किया गया यज्ञ! 
वाजपेई यज्ञ- शक्ति प्रदर्शन के लिए रथ दौड
अग्निष्टोम यज्ञ- पापों से मुक्त से संबंधित यज्ञ
सौत्रामंणि यज्ञ- पशु बलि
पुरुषमेध यज्ञ- राजनीतिक वर्चस्व के लिए विद्वान पुरुष की बलि दी जाती थी! 

🟠षड्दर्शन- 
1. लोकायत दर्शन- इसके लेखक चार्वाक है! 
2. योग दर्शन- पतंजलि
3. साख्य दर्शन- कपिल
4. न्याय दर्शन- गौतम
5. उत्तर मीमांसा- बादरायण
6. पूर्व मीमांसा- जैमिनी



प्रागैतिहासिक काल (भारतीय इतिहास भाग-1)

                   ✴️ प्रागैतिहासिक काल ✴️
प्रागैतिहासिक काल  ऐसा काल जिसका कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला
✴️ इस काल की खोज का श्रेय रॉबर्ट ब्रूस फुट को जाता है 30 मई 1863 चिंगलपुट जिला मद्रास के पल्लवरम में लैटेराइट मृदा से निर्मित हस्त कुठार की खोज की! 
नोट- रॉबर्ट ब्रूस फुट को प्रागैतिहासिक काल का पिता कहा जाता है! 
🟠प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में बांटा गया-
1- पुरापाषाण काल
2- मध्य पाषाण काल
3- नवपाषाण काल
1-पुरापाषाण काल- इस काल में मनुष्य शिकार कर अपना जीवन यापन करता था इस कारण इसे आखेटक युग भी कहा जाता है इसके अध्ययन को तीन भागों में बांटा गया-
1- निम्न पुरापाषाण काल
2- मध्य पूरापाषाण काल
3- उच्च पुरापाषाण काल
✴️ निम्न पुरापाषाण काल-
👉 अग्नि का ज्ञान
👉 मानव ने सर्वप्रथम क्वार्टजाइट पत्थर का प्रयोग किया
नोट- उपकरणों के आधार पर निम्न पुरापाषाण काल को दो भागों में बांटा गया है-
1-चौपर या चापिंग पेबुल संस्कृति- इस संस्कृति का साक्ष्य पंजाब कि सोहन नदी घाटी से मिला है! 
2- हैण्ड एक्स संस्कृति- 30 मई 1863 में रॉबर्ट ब्रूस फुट ने पल्लवरम में हैंड एक्स की खोज की थी! 
Imp- 1982 अरुणसोनकिया ने हथनोरा (नर्मदा नदी के मध्य का स्थान) होशंगाबाद(mp) में मानव कपाल खोजा गया जो मानव अस्थि का पहला साक्ष्य है! 
✴️ मध्य पुरापाषाण काल- 
👉इस समय जैस्पर,चर्ट,फिलेट का प्रयोग किया गया! 
Imp- फलकों की अधिकता के कारण इस काल को एचडी संकालिया ने फलक संस्कृति की संज्ञा दी हैl
✴️ उच्च पुरापाषाण काल-
👉इस काल में धार धार हत्यारों का प्रयोग होने लगा था! 
👉आधुनिक मानव (होमोसेपियंस) का उद्गम हुआ! 
महत्वपूर्ण तथ्य-
👉 पुरापाषाण काल को खाद्य संग्रहक काल भी कहा जाता है! 
👉 यूपी के लोहदानाला नामक स्थान की बेलन घाटी  से विश्व की सबसे प्राचीन अस्थि निर्मित स्त्री की मूर्ति प्राप्त हुई है अर्थात मातृ देवी की मूर्ति प्राप्त हुई है! 
👉 भीमबेटका की गुफा (मध्य प्रदेश) से मानव की चित्रकारी का प्रथम प्रमाण मिला है इसे मानव द्वारा निर्मित पहला घर भी कहा जाता है! 

2. मध्य पाषाण काल-
इस काल में औजार छोटे छोटे पत्थरों के बने होते थे इसलिए इस काल को माइक्रोलॉपिक या  सूक्ष्मपाषाण काल कहते हैं! 
सर्वप्रथम 1857 में सी.एल. कार्लाइल ने विन्ध्यक्षेत्र से इस काल में पशुपालन के सर्वप्रथम संकेत मिले! 
मध्यपाषाण काल के प्रमुख स्थल-
✴️बागौर (भीलवाड़ा जिला राजस्थान)- 1970 में बीएन मिश्रा ने इस स्थल को कोठारी तट पर खोजा जो मध्यपाषाण काल का सबसे बड़ा स्थल है! 
 Note- बहुत से स्त्रोतों से पता चलता है कि यहां से पशुपालन के साक्ष्य मिले जो प्रथम साक्ष्य हैं! 
✴️ सराय नहर राय (उत्तरप्रदेश)- इस स्थल से युद्ध में हत्या के साक्ष्य मिले हैं और एक कब्र से तीन कंकाल मिले हैं जिसके सर में पत्थर से चोट लगी है! 
✴️महदहा- यह स्थान उत्तर प्रदेश में है यहां से स्त्री पुरुष के एक साथ दफनाने के साक्ष्य मिले हैं! 
✴️ आजमगढ़ (होशंगाबाद जिला मध्य प्रदेश)- यहां से पशुपालन के  प्रथम साक्ष्य मिले हैं! 
✴️लंघनाज- गुजरात के इस स्थान से 14 कंकाल प्राप्त हुए हैं! 

3. नवपाषाण काल-
इस काल से पाहिए और  तिथि के साक्ष्य मिले हैं! 
इस काल का प्रथम वर्णन जॉन लूबाक की पुस्तक  प्रीहिस्टोरिक में मिलता है!
इस काल का प्रथम साक्ष्य 1842 में डॉक्टर प्राइमरोज द्वारा लिंगसूगूर (कर्नाटक) से प्रथम पोलिसदार कुल्हाड़ी खोजी ! 
इस युग के प्रमुख स्थल-
✴️मेहरगढ़- यह स्थान पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है जहां से कृषि के प्रथम साक्ष्य मिले! 
✴️बर्जहोम- यह स्थान कश्मीर में है जहां से मालिक के साथ कुत्ते को दफनाने की साक्ष्य मिले है! 
Note- मानव का पहला पालतू पशु कुत्ता था! 
सिंधु स्थल रोपड़ पंजाब से भी कुत्ते के साथ मनुष्य दफनाने के साक्ष्य मिले! 
✴️गुफकराल- यह स्थल कश्मीर में है जहां से सिलबट्टा मिला! 
✴️कोल्डिहवा- यह स्थल बेलन नदी के तट पर इलाहाबाद में है!  यहां से चावल के प्राचीनतम साक्ष्य मिले जो 6500 ई.पु. के है! 
✴️चिरांद- यह स्थान बिहार में स्थित है यहां से सबसे अधिक हड्डियों के उपकरणो की प्राप्ति हुई है! 
✴️चोपानी मांडो- यह स्थान उत्तर प्रदेश में है जहां से विश्व के सबसे प्राचीन हस्त निर्मित मृदभांडो के साक्ष्य मिले है!