Monday, September 12, 2022

उत्तराखंड का भूगोल 1

           उत्तराखंड का भौगोलिक परिचय
सामान्य परिचय- 
💿 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड को 11 वा हिमालय राज्य बनाया गया! जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद यह हिमालय राज्यों के क्रम में दसवें नंबर का राज्य बना! 
💿उत्तराखंड का आकार आयताकार है! इसकी पूर्व से पश्चिम की लंबाई 358 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण की चौड़ाई 320 किलोमीटर  है! 
💿उत्तराखंड का क्षेत्रफल 53483 वर्ग किलोमीटर है! जो भारत के क्षेत्रफल का 1.69% है! क्षेत्रफल की दृष्टि में तेलंगना बनने के बाद इसका 19वा स्थान है! 
याद  रखे- उत्तराखंड का 86.07 प्रतिशत भाग पर्वतीय तथा 13.93% भाग मैदानी है! 
💿 उत्तराखंड का गढ़वाल मंडल के अंतर्गत क्षेत्रफल 61.67 तथा कुमाऊं मंडल के अंतर्गत क्षेत्रफल 39.33% है! 
इसे भी जाने- उत्तराखंड राज्य को डॉक्टर एचसी खर्कवाल द्वारा पूर्ण किशोरावस्था राज्य की संज्ञा दी है! 
💿 उत्तराखंड विश्व के मानचित्र में  28°43'- 31°27' उत्तरी अक्षांश तथा 37°34' से 81°02' पूर्वी देशांतर पर स्थित है अर्थात इसका अक्षांशीय विस्तार 2°44' और देशांतर विस्तार 3°28' है
💿उत्तराखंड के सबसे पूर्व का जिला पिथौरागढ़ तथा सबसे पश्चिम का जिला देहरादून उत्तर का जिला उत्तरकाशी और दक्षिण का जिला उधम सिंह नगर है! 
याद रखें- पिथौरागढ़ का कुंटी इसका अंतिम पूर्वी बिंदु है तथा देहरादून का हरबर्टपुर इसका अंतिम पश्चिमी बिंदु है! इन दोनों  जगह में सूर्योदय से  लेकर सूर्यास्त इन दोनों के बीच 14 मिनट का अंतर है! 


प्राकृतिक सीमाएं- 
💿उत्तराखंड उत्तर में वृहत  हिमालय पश्चिम में टोंस नदी दक्षिण पश्चिम में शिवालिक श्रेणी दक्षिण मध्य पूर्व में तराई क्षेत्र तथा पूर्व में काली नदी से प्रकृति सीमा बनाता है! 

राजनीतिक सीमाएं- 
💿पूर्व में नेपाल से पिथौरागढ़ चंपावत और उधम सिंह नगर 275 किलोमीटर की सीमा बनाते हैं! 
💿पश्चिम  मे  तिब्बत चीन से  उत्तरकाशी चमोली पिथौरागढ़ 3 जिले 350 किलोमीटर की सीमा बनाते हैं! 
याद रखे- 
उत्तराखंड की कुल अंतरराष्ट्रीय सीमा 625 किलोमीटर है! 
उत्तराखंड के 6 जिले अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाते हैं! 
उत्तराखंड की सबसे लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पिथौरागढ़ जनपद बनाता है! चीन और नेपाल के साथ सर्वाधिक सीमा भी पिथौरागढ़ जनपद बनाता है! 
💿 पश्चिम में हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड के 2 जिले उत्तरकाशी देहरादून सीमा बनाते हैं! 
💿 पूर्व-दक्षिण में उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड के 5 जिले उधम सिंह नगर हरिद्वार नैनीताल देहरादून पौड़ी सीमा बनाते हैं! 
याद रखें-
उत्तराखंड के 4 टिहरी रुद्रप्रयाग बागेश्वर अल्मोड़ा पूर्णता आंतरिक जिले हैं अर्थात यह ना किसी देश से ना किसी राज्य से सीमा बनाते हैं! 


गढ़वाल और कुमाऊं के बीच भौगोलिक संबंध-
चमोली और पौड़ी गढ़वाल मात्र 2 जिले हैं जो कुमाऊ के साथ सीमाएं स्पर्श करते हैं! 
पौड़ी गढ़वाल सबसे अधिक जिलों ( नैनीताल अल्मोड़ा चमोली टिहरी देहरादून हरिद्वार रुद्रप्रयाग)  से सीमा बनाता है! इन जिलों की संख्या 7 है! 
याद रखें- 
चमोली अल्मोड़ा 6-6 जिलों से देहरादून 4 जिलों से सीमा बनाता है! 


Saturday, September 3, 2022

1. उत्तराखंड को उत्तराखंड किस ग्रंथ में कहा गया है? 
A. महाभारत
B. स्कंद पुराण
C. ऋग्वेद
D. ऐतरेय ब्राह्मण

Ans- B
Note-
उत्तराखंड को ऋग्वेद में मनीषीयो की भूमि या देव भूमि कहा गया! 
स्कंद पुराण में उत्तराखंड को ब्रह्मापुर,खशदेश, उत्तराखंड  कहा गया है! 
बौद्ध ग्रंथों में उत्तराखंड को हिमवंत रखा गया है! 
महाभारत में गढ़वाल को स्वर्गभूमि बद्रिकाश्रम तपोभूमि कहा गया! 
Important- 
कौशिकी ब्राह्मण में लिखा गया है कि वाग्देवी का निवास स्थान बद्रिकाश्रम था यहां व्यास जी ने षष्टिलक्ष संहिता लिखि है!


2. द्वाराहाट के चंद्रेश्वर मंदिर के समीप चित्रों की खोज किसने की थी! 
A. रिवेट कानक
B. हेनवुड 
C. एमपी जोशी
D. यशोधर मठपाल

Ans- A
Note-
💗रिवेट कानक ने 1877 मैं द्वारा हटके चंद्रेश्वर मंदिर के समीप चलचित्र की खोज की जो यूरोप से प्राप्त शैल चित्रों के समान थे! 
💗हेनवुड द्वारा 1856 में चंपावत के देवीधुरा में सर्वप्रथम कब मार्क्स खोजें इसे ही उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक काल का पिता कहा जाता है! 
💗लाखु गुफा की खोज सुयाल नदी(अल्मोड़ा) के तट पर1968 में एमपी जोशी ने की! इन्हें प्रागैतिहासिक काल की पहली खोज यशवंत सिंह कठौच ने कहा! 
💗फडकानौली की खोज अल्मोड़ा में 1985 में यशोधर मठपाल ने तथा अल्मोड़ा में ही पेटसाल की खोज 1989 में यशोधर मठपाल ने की! 
❤ यशोधर मठपाल नेतराम घाटी से शवागार और कपमार्क्स खोजें थे! 
Important-
फलसीमा अल्मोड़ा से ही  योग मुद्रा व नृत्य मुद्रा में मानव आकृतियां मिली है! 
अल्मोड़ा के ल्वेथाप से हाथों में हाथ डालकर नृत्य करती हुई मानव आकृतियां मिली है तथा कसार देवी से 14 नृतकों की आकृतियां मिली! 


3. निम्नलिखित में से कौन सा स्थल अल्मोड़ा जनपद में स्थित है? 
A. धनगर
B. नैनीपातल
C. खेखड
D. A और  C

Ans- D
Note- 
🏀धनगर कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा 1998 में प्रोफेसर एमपी जोशी व डीएस नेगी के संरक्षण में उत्खनन कार्य किया गया! 
🏀नैनीपातल(पिथौरागढ) से 1999 में पांच ताम्र मानव आकृतियां प्राप्त हुए! 
🏀खेखड  से 1982 में प्रागैतिहासिक काल के मृदभांड प्राप्त हुए हैं! 
❤याद रखे- कालामाटी डीनापानी महरू उड्यार हथ्वालघोड़ा मल्लापैनाली नामक प्रागैतिहासिक स्थल अल्मोड़ा में स्थित है! 


4. ग्वारख्या गुफा की खोज कब हुई थी?
A. 1993
B. 1992
C. 1991
D. 1990

Ans-A
Note-
ग्वारख्या गुफा की खोज  चमोली के डूंगरी गांव  में अलकनंदा के तट पर 1993 में राकेश जी द्वारा खोजा गया इन शैलचित्रों का मुख्य विषय पशु संस्कृति या पशुओं को हाकता हुआ दिखाया गया है यहां से 41 आकृतियां प्राप्त हुई है! 

5. मलारी गांव चमोली के विषय में कौन सा कथन असत्य है? 
A. मलारी गांव की गुफा सर्वप्रथम 1956 में शिव प्रसाद डबराल ने खोजी थी! 
B. गढ़वाल विश्वविद्यालय ने इसका उत्खनन 1982-83  और 2002 में किया! 
C. यहां से आखेट के लिए लौह उपकरण  तथा पशु के संपूर्ण कंकाल मिले! 
D. मलारी  गांव पिंडर नदी के किनारे बसा है! 

Ans-D
Note-
❤मलारी गांव से  ज्ञात पशु की पहचान हिमालय के वृषभ जुबु(जोबा) से की जा रही है यहां से प्राप्त लोह उपकरण  उत्तराखंड के सबसे प्राचीनतम लौह  उपकरण माने जाते हैं! यह माछा जनजाति  का गांव है! यहां से लोहे का 1 जार भी प्राप्त हुआ
❤किमनी गांव चमोली के थराली के पास पिंडर नदी के किनारे बसा है यहां से सफेद रंग के चित्रित हथियार एवं पशु शैलचित्र मिले है! 

6. थापली का उत्खनन किसके निर्देशन में हुआ था? 
A. यशोधर मठपाल
B  यशवंत सिंह कटोच
C  महेश्वर प्रसाद जोशी
D. केपी नौटियाल

Ans-D
थापली का उत्खनन 1982-83 मैं केपी नौटियाल के निर्देशन में हुआ था यहां से लाल व काले रंग के बर्तन प्राप्त हुए हैं यह अलकनंदा के दाएं तट पर स्थित है तथा यहां से धान की खेती के अवशेष भी मिले है! 
❤ रणिहाट का उत्खनन भी 1977 में पीके नौटियाल जी ने किया था यहां से एक लोहे का औजार मिला है संभवत इससे यह मछली मारा करते थे! 

7. निम्न में से कौन सा स्थल उत्तरकाशी में नहीं है? 
A.पुरोला
B. हुडली
C. बनकोट
D. उपयुक्त सभी

Ans-C
Note-
पुरोला उत्तरकाशी में कमल नदी( यमुना की सहायक नदी)  के दाएं तट पर है यहां से काले रंग के आलेख प्राप्त हुए हैं जो शंख लिपि में है जिन्हें आज तक पढ़ा नहीं गया है! यहां से पक्की मिट्टी के खिलौने व मनके  भी मिले है! यहां से घोड़े की हड्डियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं पुरोला से इष्टिका  वेदिका भी प्राप्त हुई है जिसका आकार उड़ते हुए गरुड़ के समान है! यहां से पशुओं की बलि के साक्ष्य भी मिले है! 
हुडली  से नीले रंग के चलचित्र मिले यह भी उत्तरकाशी में स्थित है! 
बनकोट पिथौरागढ़ में है जहां से 8 ताम्रमानवाकृतिया मिली है! 



8. कालसी अभिलेख में कितने यमन राजाओं का उल्लेख है? 
A. 5
B. 6
C. 7
D. 8

Ans-A
कालसी शिलालेख की खोज 1860 में फॉरेस्ट ने की थी यह अभिलेख प्राकृत भाषा में व ब्राह्मी लिपि में लिखा गया! 
कालसी को कालकुट  सुधनगर( ह्वेनसांग के अनूसार) युगशैल कहा जाता है! कालसी अभिलेख को कॉल सिलाया चित्र शीला भी कहा जाता है यह 10 फीट ऊंची और 8 फुट चौड़ी है इस अभिलेख में अशोक ने इस चित्र को अपरांत तथा यहां के निवासियों को पुलिंद कहा है! किस अभिलेख में हाथी का चित्र मिला है! 
कालसी अभिलेख अमलाब नदी के तट पर है जो यमुना की सहायक नदी है यहां से खंडित अवस्था में अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिन का खंडन 1254 में नसरुद्दीन मोहम्मद ने किया था! 


9. लाखामंडल के विषय में कौन सा कथन सत्य है? 
A. लाखामंडल का प्राचीन नाम मढ है! 
B. लाखामंडल लेख में इसे उत्तराखंड का सिंहपुर कहां है! 
C. यहां से राजकुमार ईश्वर आपके अभिलेख प्राप्त हुए हैं! 
D.उपयुक्त सभी सही है


Ans-d
Note-
लाखामंडल से ब्राह्मी लिपि में श्लोक बद्ध संस्कृत लेख प्राप्त हुआ! 
 Important-
अम्बाडी गांव देहरादून से भद्रमित्र शुंग का अभिलेख प्राप्त हुआ है! 


10. त्रिशूल अभिलेख प्राप्त हुए हैं!? 
A   गोपेश्वर
B.  बाडाहाट
C. पिथौरागढ़
D. ए और बी दोनों

Ans-D

Note- त्रिशूल अभिलेख गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर तथा बाडाहाट के शक्ति मंदिर से प्राप्त हुए! गोपेश्वर से प्राप्त लेख में विशुनाग और अशोक चल्ल का नाम मिलता है तथा बाडाहाट  के लेख में गुहनाग और अशोक चल्ल का नाम मिलता है त्रिशूल अभिलेख की शंख लिपि है! 


11. (कत्यूरी घाटी) अल्मोड़ा बागेश्वर की सीमा  से कब 15 सिक्के प्राप्त हुए? 
A. 1976
B. 1977
C. 1998
D. 1979

Ans-D
Note-
अल्मोड़ा बागेश्वर की कत्यूरी घाटी से कुणिंद सिक्के प्राप्त हुए! 
इन मुद्राओं को 1981 में माहन सिंह द्वारा राजकीय संग्रहालय को दी गई थी! 


12. बास्ते ताम्रपत्र का संबंध किस जिले से हैं? 
A. पिथौरागढ़
B. चंपावत
C. अल्मोड़ा
D. देहरादून


Ans- A
Note- यह ताम्रपत्र अल्मोड़ा से प्राप्त हुआ यह ताम्रपत्र महाराज आनंदपाल का है इसमें गोरखा सेनानायक मोहन थापा का उल्लेख है! 
याद रखो-
वीरभद्र ऋषिकेश को कहा जाता तथा गोविषाण काशीपुर को कहा जाता था! 


12. गेरूए रंग की सभ्यता का नगर कहा जाता है? 
A. उत्तरकाशी
B. चमोली
C. हरिद्वार
D. इनमें से कोई नहीं

Ans-c
Note- कनखल एवं मायापुरी से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर हरिद्वार को गेरूऐ रंग की सभ्यता का नगर कहा जाता है! 


13. अलकापुरी कहां स्थित है? 
A. बद्रीनाथ
B. माणा
C. हरसिल
D. डीडीहाट

Ans-B
Note बद्रीनाथ बस सतोपंथ के मध्य माणा में  अलकापुरी स्थित है! इसे कुबेर की राजधानी भी कहा जाता था! 
ऋग्वेदिक आर्यों की सिंधु अलकापुरी की अलकनंदा ही थी! 
Important-
ऋग्वेद में अलकनंदा के लिए हिरण्यवर्तिनी शब्द का प्रयोग किया गया! 
मंदाकिनी का प्राचीन नाम कुंभा था
नयार या नालिका को  परूषणि कहा जाता था! 
नंदाकिनी का प्राचीन नाम रसा था! 
सरस्वती नदी का पुराना नाम बिपाशा था! 

14. मनसार मेला उत्तराखंड के किस जिले में लगता है! 
A. पौड़ी गढ़वाल
B. टिहरी गढ़वाल
C. चमोली
D. उत्तरकाशी

Ans-A
जन मान्यताओं के अनुसार सीता माता सितोनस्यूं पट्टी पौड़ी में पृथ्वी में समाई थी इसलिए प्रतिवर्ष यहां मनसार मेला लगता है! 

15. बाणासुर मंदिर किस जनपद में स्थित है? 
A. चंपावत
B. जोशीमठ
C. रुद्रप्रयाग
D. इनमें से कोई नहीं

Ans-C
Likhna h dist. 


16. प्राचीन काल में उत्तराखंड में  विद्यापीठ थे? 
A. बद्रिकाश्रम
B. कण्वाश्रम
C. एबी दोनों
D. इनमें से कोई नहीं

Ans- c
महाभारत के अनुसार पांडवों का जन्म स्थल बद्रीनाथ के पास पांडुकेश्वर में हुआ था! 
कण्वाश्रम का वर्तमान नाम चौकाघाट है जो मालिनी नदी के तट पर है जिसका वर्णन कालिदास ने अभियान शाकुंतलम में किया है यही चक्रवर्ती सम्राट अशोक का जन्म हुआ था! 
Important-
प्राचीन काल में गढ़वाल में खस जाति के लोग बहुत ताकतवर थे खसो के समय बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार अधिक हुआ था! 
रुद्रप्रयाग का प्राचीन नाम पुनाड या रूद्रावर्त है! 



17. कुमाऊं क्षेत्र के किस मंदिर से यशु के निवास की पुष्टि होती है? 
A. कसार देवी
B. जाखन देवी
C. एबी दोनों
D. खुजली माता मंदिर

Ans-b
जाखण देवी माता मंदिर को पुश्ती माता मंदिर भी जाता है! यहां से यक्षो के निवास की पुष्टि होती है! 
कसार देवी मंदिर अल्मोड़ा की कमस्या पहाड़ी पर स्थित है! 
खुजली माता मंदिर उधम सिंह नगर जनपद में स्थित है! 


18. प्रसिद्ध नाग मंदिर धौलीनाग  किस जनपद में स्थित है? 
A. पिथौरागढ़
B. बागेश्वर
C. चंपावत
D. उत्तरकाशी

Ans. बागेश्वर
Note. प्रसिद्ध बेरीनाग मंदिर सुंदरी नाग मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है! 
Likhna h. .. 


19. उत्तराखंड की सबसे प्राचीन पुरा प्रजाति कौन सी है? 
A. कोल
B. किरात
C. खस
D. शौका


Ans- A
Note- शिव प्रसाद डबराल ने कोल को सबसे प्राचीन पूरा प्रजाति का है! 
कोल  को प्राचीन साहित्य में मुंड या शबर कहा गया है! 
कोल  मृतक शरीर को खुले में छोड़ देते थे! 
कोल लिंग पूजा के साथ  नाग पूजा भी करते थे! 
इनमें जागर तथा पशु बलि भी प्रचलित थी! 
Note- 
ग्रियर्सन ने किरातो  को  उत्तराखंड की सबसे प्राचीन पूरा प्रजाति कहा है! 

20. किरातो के  आराध्य देव कौन थे? 
A. शिव
B. इंद्र
C. प्रजापति
D. विष्णु

Ans-A
किरातों को  किर किन्नर  किरपुरुष तथा स्कंद पुराण में इन्हें भिल्ल कहा गया है! इनमे! संयुक्त परिवार पाए जाते थे


21. खशो को शुद्र वर्ग में कब रखा गया? 
A. 1883
B. 1967
C. 1885
D. 1980

Ans-c
हंस वीर योद्धा थे जिन्हें 1885 में ब्रिटिश काल में शूद्र वर्ग में शामिल किया गया था इन्होंने महाभारत में कौरवों के समर्थन में युद्ध लड़ा था! 
इनमें घर जवाई प्रथा, जेठा प्रथा( संपत्ति में बड़े भाई का अधिकार अधिक होगा) , झटेला प्रथा( यदि कोई स्त्री दूसरा विवाह करती है तो पहले पति से उत्पन्न संतान), टेकुआ प्रथा (इस प्रथा में स्त्री वैद्य अवैध तरीके से किसी पुरुष को अपने घर में रख सकती है) 
महत्वपूर्ण-
खस अपनी ज्येष्ट पुत्री को मंदिर में दान भी करते थे तथा नरसिंह देवता नाग पूजा  और भूत प्रेत की पूजा में विश्वास रखते थे! 


22. भोटिया जनजाति को समानता कितने भागों में विभाजित किया गया है? 
A. 5
B. 6
C. 3
D. 4

Ans. B
Important-
भोटिया लोगों के समूह को स्थानीय भाषा में कंच कहा जाता था! 
रड. बड. नियम भी किसी जनजाति से संबंधित है! 
या एक घूमंतू प्रजाति है!
भोटिया वर्षा के देवता घूरमा देवता  तथा संपत्ति व्यापार से संबंधित देवता को घबला देवता कहते हैं! 


23. अमोघभूति प्रकार की मुद्राएं किस लिपि में थी? 
A. खरोष्ठी
B. ब्राह्मी
C. आरमाईक
D. ए और बी दोनों

Ans.  D
अमोघभूति की मुद्राएं खरोष्ठी तथा ब्राह्मी लिपि में थी जिनमें रज कुणिंदस अमोघभूतिस महाराजस उत्तीर्ण था! यह मुद्राएं रजत तथा ताम्र दोनों धातु में थी! 

24. परवर्ती कुणिंद मुद्राएं  कितने प्रकार की थी? 
A. 2
B. 3
C. 4
D. 5


Ans- 3
Note-  अमोघभूति प्रकार, अल्मोड़ा प्रकार,  छत्रेश्वर


25. रमक सूर्य मंदिर कहां है? 
A. चंपावत
B. पिथौरागढ़
C. टिहरी
D. अल्मोड़ा


Ans- A

Note- राज्य में सूर्य मंदिर व मूर्तियों का निर्माण शको के काल में हुआ! 
प्रमुख सूर्य मंदिर-
अल्मोड़ा के सूर्य मंदिर-
कटारमल (बुटाधारी सूर्य मंदिर) 
गुणादित्य सूर्य मंदिर

पिथौरागढ़ के सूर्य मंदिर-
दुगई आगर सूर्य मंदिर (गंगोलीहाट) 
भौनादित्य सूर्य मंदिर (गंगोलीहाट) 
मढ  का सूर्य मंदिर
चौपाटा का सूर्य मंदिर


चंपावत के सूर्य मंदिर-
रमक सूर्य मंदिर (पाटी चंपावत) 
आदित्य सूर्य मंदिर

क्यार्क सूर्य मंदिर पौड़ी जनपद में है! 
भटवाड़ी और मंजियाली सूर्य मंदिर  उत्तरकाशी जनपद में स्थित है! 
कुलसारी का सूर्य मंदिर  चमोली जनपद में स्थित है! 
प्लेठी का सूर्य मंदिर देवप्रयाग टिहरी में स्थित है जिसे कल्याण बर्मन ने बनाया! 
कंडारा सूर्य मंदिर रुद्रप्रयाग में है जिसे ललित सुरदेव ने बना है! 

Tuesday, August 30, 2022

अर्थशास्त्र 60 दिन

1. राष्ट्रीय नियोजन समिति का गठन कब हुआ-1938( अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू) 
2. भारत के लिए नियोजन अर्थव्यवस्था नामक पुस्तक किसकी है- सर एम विश्वेश्वरैया(1934) 
3. बाम्बे प्लान योजना की नींव कब रखी गई- 1944
4. गांधीवादी योजना का मॉडल किसने दिया-
1944 एस एन अग्रवाल
5. जन योजना का सुझाव किसने दिया- 1945 एम एन राय
6. सर्वोदय योजना की प्रस्तावना किसने दी- 1950 जयप्रकाश नारायण
8. नीति आयोग का पूर्ण नाम क्या है- नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया( 1 जनवरी 2015) 
9. योजना आयोग(15 मार्च 1950) का गठन किसकी संस्तुति पर हुआ- 1946 की के सी नियोगी समिति
10. योजना आयोग के प्रथम तथा अंतिम उपाध्यक्ष कौन थे-  गुलजारी लाल नंदा, मोंटेक सिंह आहलूवालिया
11. राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन कब हुआ- 6 अगस्त 1952
12. प्रथम पंचवर्षीय योजना का प्रस्ताव किसने तैयार किया था- केएन राज
13. सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरुआत हुई-1952
14. राष्ट्रीय प्रसार सेवा का आरंभ हुआ-1953
15. बोकारो कंपनी(झारखंड) की स्थापना किसके सहयोग से हुई- 1964 रूस
16. यूनियन ट्रस्ट ऑफ इंडिया(UTI) की स्थापना कब हुई-1964
17. इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया(IDBI) की स्थापना कब हुई-1964
18. भारतीय खाद्य निगम(FIC) की स्थापना कब हुई-1965
19. कृषि कीमत आयोग(APC) की स्थापना कब हुई-1965
20. सबसे असफल पंचवर्षीय योजना कौन सी थी- तृतीय पंचवर्षीय योजना
21. लीड बैंक योजना किस की सिफारिश में शुरू हुई- 1969 नारीमन समिति
22. गरीबी हटाओ का नारा कौन सी पंचवर्षीय योजना में आया- चौथी पंचवर्षीय योजना
23. 14 वाणिज्य बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ- 19 जुलाई 1969
24.भूमिगत नाभिकीय परीक्षण (स्माइल बुद्धा) लॉन्च किया गया- 18 मई 1974
25. लियोंटिफ के आगत निर्गत मॉडल को लागू किया- चौथी पंचवर्षीय योजना
26. सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम(DPAP) की शुरुआत कब हुई- 1973-74
27. परिवार नियोजन कार्यक्रम कौन सी पंचवर्षीय योजना में लागू किए गए- चौथी पंचवर्षीय योजना
28. पांचवी पंचवर्षीय योजना का प्रारूप किसने तैयार किया- टीपी धर
29. न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम की शुरुआत कब हुई- 18 मई 1974
30. क्षेत्री ग्रामीण बैंक की स्थापना कब हुई- 2 अक्टूबर 1975
31. काम के बदले अनाज कार्यक्रम की शुरुआत कब हुई- 1977-78
32. अंत्यदय योजना का आरंभ कब हुआ- 1977-78 राजस्थान
33. ग्रामीण युवा स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम कब से शुरू है- 1979
34. ट्राइसेम में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना को शामिल किया- 1999
35. 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कब हुआ- 1980
36. नाबार्ड की स्थापना कब हुई-12 जुलाई 1982
37. एक्सिजम बैंक की स्थापना कब हुई-1982
38. हिंदू वृद्धि दर का संबंध किससे है-
39. स्पीड पोस्ट व्यवस्था कब शुरू हुई-1986
40. कर्पाट की स्थापना कब हुई- सितंबर 1986 दिल्ली
41. सेबी की स्थापना कब हुई- 1988
42. जवाहर रोजगार योजना कब शुरू हुई-
अप्रैल 1989 
43. प्रधानमंत्री रोजगार योजना की शुरुआत कब हुई- 1993
44. विश्व व्यापार संगठन का सदस्य भारत कब बना- 1 जनवरी 1995
45. वाई.के.अलघ समिति का गठन कब हुआ-1979
46. लकड़वाला समिति का गठन कब हुआ- 1993
47. सुरेश तेंदुलकर समिति का गठन कब हुआ-2001
48. सी रंगराजन समिति का गठन कब हुआ- 2004
49. अदृश्य बेरोजगारी कहां दिखाई देती है- कृषि क्षेत्र में
50. प्रधानमंत्री जनधन योजना की घोषणा कब हुई- 15 अगस्त 2014 (लागू 28 अगस्त 2014) 
51. मेक इन इंडिया योजना की शुरुआत कब हुई- 25 दिसंबर 2014
52. अटल पेंशन योजना की शुरुआत कब हुई- 9 मई 2015
53. प्रधानमंत्री जन सुरक्षा बीमा योजना की शुरुआत कब हुई- 9 मई 2015
54. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत कब हुई- 22 जनवरी 2015
55. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत कब हुई- 1 मई 2016
56. सिल्क इंडिया योजना की शुरुआत कब हुई- 15 जुलाई 2015
57. उज्ज्वला योजना की शुरुआत कब हुई- 1 मई 2015 (लागू अप्रैल 2016) 
58. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की शुरुआत कब हुई- 20 नवंबर 2014
59. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत कब हुई-2015
60. अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) की शुरुआत कब हुई- 2019
61. धरोहर विकास एवं समृद्धि योजना (ह्रदय)  की शुरुआत कब हुई- 21 जनवरी 2015
62. स्मार्ट सिटी मिशन योजना की शुरुआत कब हुई-2019
63. स्वच्छ भारत मिशन की स्थापना कब हुई-2014(लक्ष्य 2019) 


Friday, August 26, 2022

प्राचीन भारत का इतिहास

                   ✴️ प्रागैतिहासिक काल✴️
प्रागैतिहासिक काल  ऐसा काल जिसका कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला
✴️ इस काल की खोज का श्रेय रॉबर्ट ब्रूस फुट को जाता है 30 मई 1863 चिंगलपुट जिला मद्रास के पल्लवरम में लैटेराइट मृदा से निर्मित हस्त कुठार की खोज की! 
नोट- रॉबर्ट ब्रूस फुट को प्रागैतिहासिक काल का पिता कहा जाता है! 
🟠प्रागैतिहासिक काल को तीन भागों में बांटा गया-
1- पुरापाषाण काल
2- मध्य पाषाण काल
3- नवपाषाण काल
1-पुरापाषाण काल- इस काल में मनुष्य शिकार कर अपना जीवन यापन करता था इस कारण इसे आखेटक युग भी कहा जाता है इसके अध्ययन को तीन भागों में बांटा गया-
1- निम्न पुरापाषाण काल
2- मध्य पूरापाषाण काल
3- उच्च पुरापाषाण काल
✴️ निम्न पुरापाषाण काल-
👉 अग्नि का ज्ञान
👉 मानव ने सर्वप्रथम क्वार्टजाइट पत्थर का प्रयोग किया
नोट- उपकरणों के आधार पर निम्न पुरापाषाण काल को दो भागों में बांटा गया है-
1-चौपर या चापिंग पेबुल संस्कृति- इस संस्कृति का साक्ष्य पंजाब कि सोहन नदी घाटी से मिला है! 
2- हैण्ड एक्स संस्कृति- 30 मई 1863 में रॉबर्ट ब्रूस फुट ने पल्लवरम में हैंड एक्स की खोज की थी! 
Imp- 1982 अरुणसोनकिया ने हथनोरा (नर्मदा नदी के मध्य का स्थान) होशंगाबाद(mp) में मानव कपाल खोजा गया जो मानव अस्थि का पहला साक्ष्य है! 
✴️ मध्य पुरापाषाण काल- 
👉इस समय जैस्पर,चर्ट,फिलेट का प्रयोग किया गया! 
Imp- फलकों की अधिकता के कारण इस काल को एचडी संकालिया ने फलक संस्कृति की संज्ञा दी हैl
✴️ उच्च पुरापाषाण काल-
👉इस काल में धारदार हत्यारों का प्रयोग होने लगा था! 
👉आधुनिक मानव (होमोसेपियंस) का उद्गम हुआ! 
महत्वपूर्ण तथ्य-
👉 पुरापाषाण काल को खाद्य संग्रहक काल भी कहा जाता है! 
👉 यूपी के लोहदानाला नामक स्थान की बेलन घाटी  से विश्व की सबसे प्राचीन अस्थि निर्मित स्त्री की मूर्ति प्राप्त हुई है अर्थात मातृ देवी की मूर्ति प्राप्त हुई है! 
👉 भीमबेटका की गुफा (मध्य प्रदेश) से मानव की चित्रकारी का प्रथम प्रमाण मिला है इसे मानव द्वारा निर्मित पहला घर भी कहा जाता है! 

2. मध्य पाषाण काल-
इस काल में औजार छोटे छोटे पत्थरों के बने होते थे इसलिए इस काल को माइक्रोलॉपिक या  सूक्ष्मपाषाण काल कहते हैं! 
सर्वप्रथम 1857 में सी.एल. कार्लाइल ने विन्ध्यक्षेत्र से इस काल में पशुपालन के सर्वप्रथम संकेत मिले! 
मध्यपाषाण काल के प्रमुख स्थल-
✴️बागौर (भीलवाड़ा जिला राजस्थान)- 1970 में बीएन मिश्रा ने इस स्थल को कोठारी तट पर खोजा जो मध्यपाषाण काल का सबसे बड़ा स्थल है! 
 Note- बहुत से स्त्रोतों से पता चलता है कि यहां से पशुपालन के साक्ष्य मिले जो प्रथम साक्ष्य हैं! 
✴️ सराय नहर राय (उत्तरप्रदेश)- इस स्थल से युद्ध में हत्या के साक्ष्य मिले हैं और एक कब्र से तीन कंकाल मिले हैं जिसके सर में पत्थर से चोट लगी है! 
✴️महदहा- यह स्थान उत्तर प्रदेश में है यहां से स्त्री पुरुष के एक साथ दफनाने के साक्ष्य मिले हैं! 
✴️ आजमगढ़ (होशंगाबाद जिला मध्य प्रदेश)- यहां से पशुपालन के  प्रथम साक्ष्य मिले हैं! 
✴️लंघनाज- गुजरात के इस स्थान से 14 कंकाल प्राप्त हुए हैं! 

3. नवपाषाण काल-
इस काल से पाहिए और  तिथि के साक्ष्य मिले हैं! 
इस काल का प्रथम वर्णन जॉन लूबाक की पुस्तक  प्रीहिस्टोरिक में मिलता है!
इस काल का प्रथम साक्ष्य 1842 में डॉक्टर प्राइमरोज द्वारा लिंगसूगूर (कर्नाटक) से प्रथम पोलिसदार कुल्हाड़ी खोजी ! 
इस युग के प्रमुख स्थल-
✴️मेहरगढ़- यह स्थान पाकिस्तान के बलूचिस्तान में है जहां से कृषि के प्रथम साक्ष्य मिले! 
✴️बर्जहोम- यह स्थान कश्मीर में है जहां से मालिक के साथ कुत्ते को दफनाने की साक्ष्य मिले है! 
Note- मानव का पहला पालतू पशु कुत्ता था! 
सिंधु स्थल रोपड़ पंजाब से भी कुत्ते के साथ मनुष्य दफनाने के साक्ष्य मिले! 
✴️गुफकराल- यह स्थल कश्मीर में है जहां से सिलबट्टा मिला! 
✴️कोल्डिहवा- यह स्थल बेलन नदी के तट पर इलाहाबाद में है!  यहां से चावल के प्राचीनतम साक्ष्य मिले जो 6500 ई.पु. के है! 
✴️चिरांद- यह स्थान बिहार में स्थित है यहां से सबसे अधिक हड्डियों के उपकरणो की प्राप्ति हुई है! 
✴️चोपानी मांडो- यह स्थान उत्तर प्रदेश में है जहां से विश्व के सबसे प्राचीन हस्त निर्मित मृदभांडो के साक्ष्य मिले है!  


             ✴️आघ ऐतिहासिक काल✴️
ऐसा काल जिसमें लिखित साक्ष्य तो मिला है परंतु उसे आज तक पढ़ा नहीं गया! 
इस काल में मृदभांडो का प्रथम प्रयोग हुआ! 
इस काल में धातु का प्रयोग आरंभ हो गया था सबसे पहले प्रयोग लाई  धातु ताबाँ थी! 
सिंधु सभ्यता और वैदिक सभ्यता इस काल के अंतर्गत आती है! 
ताम्र पाषाण युग-
यह का 3000 ईसा पूर्व का था! 
यह कृषि प्रधान ग्रामीण सभ्यता थी! 
इस काल की प्रमुख संस्कृति-
✴️बनास या आयड संस्कृति-
यह संस्कृति राजस्थान में है! 
इसका समय का 2100 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व का था! 
इस संस्कृति को ताम्र सभ्यताओं का पालनहार कहते हैं! 
इस सभ्यता को ताम्बवती सभ्यता भी कहते हैं क्योंकि यहां से सबसे अधिक मात्रा में तांबा प्राप्त हुआ है! 
इस संस्कृति के प्रमुख स्थल- आहत, बालाथल, गिलुड
इस सभ्यता से ताबे की कुल्हाड़ी तांबे की चूड़ियां तांबे की चादर मिली है! 
इस संस्कृति का प्रमुख केंद्र गिलुड था! 

✴️कायथ संस्कृति-
यहां से स्टेराइट व कार्नेलीयन उत्तम किस्म के पत्थरो के साक्ष्य मिले! 
इस संस्कृति के प्रमुख केंद्र कायथ व एरण था! 
प्राकहडप्पा  और हडप्पोत्तर सभ्यता  भी कहते है इसका विस्तार मध्यप्रदेश में हुआ था! 
सबसे अधिक मृदभांड यहीं से प्राप्त हुऐ है! 

✴️जौर्वे संस्कृति- 
यह संस्कृति महाराष्ट्र में फैली थी! 
इस स्थान के प्रमुख स्थल थे- जौर्वे, इनामगाव, नैवामा, दैमाबाद 
✴️इनामगांव- 
ताम्र पाषाण काल की सबसे बड़ी बस्ती थी! 
यह गांव  किले व रवांई से घिरी थी! 
✴️दैमाबाद-
भारी मात्रा में कांसे के बर्तन  मिले हैं जो इसे हड़प्पा सभ्यता मैं जोड़ते हैं और यहां से हाथी गैडे भैसे के प्रमाण मिले हैं जो इसे ताम्र संस्कृति से जोड़ते हैं! 

          ✴️हड़प्पा सभ्यता का उदय✴️
✴️1904 में लार्ड कर्जन के समय भारतीय पुरातत्व विभाग का गठन कोलकाता में हुआ जिसके प्रथम अध्यक्ष अलेक्जेंडर कनिंघम थे! 
✴️भारत की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यता  हड़प्पा सभ्यता है इसे सिंधु घाटी की सभ्यता भी कहते हैं!
✴️1921 में जॉन मार्शल की अध्यक्षता में दयाराम साहनी के नेतृत्व में हड़प्पा की खुदाई हुई 1924 में लंदन में जॉन मार्शल ने इस सभ्यता की घोषणा की! 
✴️ हड़प्पा सभ्यता के नामकरण में मत-
🌳जॉन मार्शल ने इसे सिंधु घाटी सभ्यता का नाम दिया! 
🌳मार्टीमर व  व्हीलर ने इसे हड़प्पा सभ्यता कहा! 
🌳अर्नेस्ट मैके में इसे हड़प्पा संस्कृति कहा! 
🌳मेसोपोटामिया की सभ्यता में मेलुहा शब्द मिला है जिसका संबंध हड़प्पा सभ्यता से है! 
✴️ इस  सभ्यता से जुड़ी लगभग 1400 स्थल खोजे जा चुके है इसमें से लगभग 925 भारत में तथा 475 पाकिस्तान में है! 
✴️ हड़प्पा सभ्यता का उद्गम- ईरान व बलूचिस्तान की ग्रामीण संस्कृति से नगरी सभ्यता का जन्म हुआ है! 
✴️ गार्डन चाइल्ड ने सिंधु सभ्यता को प्रथम नगरी क्रांति कहा है!
✴️ हड़प्पा सभ्यता की जानकारी सबसे पहले 1826 में चालर्स मैसन  ने दि थी! 
✴️ हड़प्पा सभ्यता का काल 2300 ई. पू. से 1740 ई. पू्. के मध्य का था! 
⚫ सिंधु सभ्यता का क्षेत्र त्रिभुजाकार था इसका क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किलोमीटर था!  पूर्व से पश्चिम 1600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण 1400 किलोमीटर था! 
⚫ यह सभ्यता की खुदाई से भिन्न भिन्न प्रजातियों की अस्थि पंजर प्राप्त हुए- भूमध्य सागरीय, मंगोलियन, प्रोटो ऑस्ट्रेलियड तथा अल्पाइन 
⚫ सिंधु सभ्यता उत्तर में मांडा (जम्मू), दक्षिण में दैमाबाद पूर्व में आलमगीरपुर दक्षिण में मकरान समुद्र तट बलूचिस्तान और सुत्कागेंडोर तक फैली है! 
⚫ पासा इस काल का प्रमुख खेल था! 
⚫ माप तोल के लिए घनाकार बांटे थी और यह दशमलव पद्धति से प्रचलित थे! 
🟠 यह एक कास्यंयुगी नगरी सभ्यता थी! 
⚫ इनका समाज मातृसत्तात्मक था! 
🟠 सिंधु सभ्यता में आर्थिक स्थिति का प्रमुख आधार व्यापार एवं वाणिज्य था! 
⚫ वृक्षों में पीपल सबसे पवित्र थाl
✴️ हड़प्पा सभ्यता की लिपि की खोज 1923 में हुई जो भाव चित्रात्मक थी जो दाएं से बाएं लिखी जाती थी यह लिपि बूस्ट्रोफेडन कहलाती है सबसे ज्यादा यू (u)आकार की चित्र व मछली के चित्र मिले हैं मूल चित्र 64 थे! 
✴️ मोहनजोदड़ो से शिव के पारंपरिक रूप की पूजा के अवशेष अर्थात पशुपति की मूर्ति मिली है इसे जैन  अनुयाई आदिनाथ की मूर्ति बताते हैं! इस सभ्यता से मंदिर के प्रमाण नहीं मिले हैं परंतु मूर्ति के प्रमाण मिले है! 

🟠 सिंधु सभ्यता के प्रमुख नगर-
✴️ हड़प्पा- दयाराम साहनी ने 1921 मे रावी नदी के तट पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मांटगोमेरी जिले में इसका उत्खनन किया था! 
यहां से सबसे अधिक अभिलेख युक्त मोहरे, पीतल की इक्का गाड़ी, स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा, समाधान के गड्ढे में ईट लगाने के प्रमाण, कांसे  का दर्पण, सुरमा लगाने की सलाई, कर्मचारियों के आवास, लाल पत्थर से बनी पुरुष की निर्वस्त्र छड़ की आकृति, r-37 कब्र मातरदेवी की मूर्ति, लकड़ी का ताबूत, फसल रखने का खज़ाना, ताबे गलाने का पात्र इत्यादि प्राप्त हुआ! 
महत्वपूर्ण तथ्ययहां से एबी नामक किला मिला है और यहां से   नग्न स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा  मिला है जिसे उर्वरकता कि देवी कहा जाता है, कास्य बैल गाड़ी, स्वास्तिक चिन्ह मिला! 
✴️मोहनजोदड़ो- इसे मृतकों का टीला भी कहा जाता है इसकी खोज 1922 में राखालदास बनर्जी ने सिंधु नदी के तट पर पाकिस्तान के लरकाना जिले में की थी! 
यहां से विशाल स्नानागार, नाव के चित्र वाली मुद्रा बौद्ध स्तूप,लिंग पूजा के प्रमाण,वृषभ की मूर्ति अन्नागार, सिटदार शौचालय, 1398 मोहरे,  पुरोहित की  छड, मिश्रित पशु की मूर्ति, नर्तकी की कांसे की मुर्ति, घोड़े के दांत, सभागार मिले है! 
महत्वपूर्ण- विशाल स्नानागार को जॉन मार्शल ने विश्व की धार्मिक महत्व की आश्चर्यजनक निर्माण कहा है! 
शिव के  प्रारंभिक रूप की मुहरे मिली है जिसे तांत्रिक मुहर या समन की मुहर कहते है! 
✴️लोथल- लोथल की खोज 1955-62 आर राव ने होगा नदी के तट पर अहमदाबाद गुजरात में की थी यह एक बंदरगाह है! 
यहां से गोदीबाड़ा, अन्नागार, स्नानघर, नालियों की अच्छी व्यवस्था, हाथी दांत, घोड़े की मिट्टी की मूर्ति, युगल समाधान, नालियों से सोख्ता गड्ढा, औद्योगिक क्षेत्र, सेलखड़ी की मोहरे, सीप, मनके बनाने के कारखाने,अग्नि पूजा के संकेत,नगर, पीसने की चक्की के दो पाट, मिले हैं
महत्वपूर्ण तथ्य- इसे लघु हड़प्पा भी कहा जाता है यहां से 3 युग्म समाधिया मिली है जो सती प्रथा के साक्ष्य माने जाते हैं! यहां से पंचतंत्र की लोमड़ी के चित्र भी मिले! 
✴️धौलावीरा-इसकी खोज वर्ष 1968 में पुरातत्त्वविद् जगतपति जोशी द्वारा की गई थी। यह गुजरात के कच्छ जिले में हैl इसे 2021 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत की श्रेणी में घोषित किया गया यह सबसे नवीनतम नगर है l
यह एकमात्र नगर जो 3 भागो में विभाजित था यहां से एक विशाल स्टेडियम के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं पोलिसदार सफेद पत्थर के साक्ष्य, तथा चट्टानों को काटकर 16 तालाब बनाने के साथ भी मिले! 
महत्वपूर्ण तथ्य- यह हड़प्पा का सबसे बड़ा स्थल है! धोलावीरा का अर्थ होता है सफेद कुआं
✴️कालीबंगा- यह 1953 में बीबी लाल वीके थापर ने घाघरा नदी हनुमानगढ़ जिला गंगानगर राजस्थान से खोजा यहां से कहां थे व मिट्टी की चूड़ियां कच्ची ईंटों से बने 7 अग्निकुंड जूते हुए खेत तांबा गलाने की तकनीक ऊंट की हस्तियों के साथ चुनाव खिलौना कुआँ तीन प्रकार के समाधान प्रथाएं मिली है! 
महत्वपूर्ण बिंदु-
कालीबंगा का अर्थ होता है काले रंग की चूड़ियां
इसे इस सभ्यता की तीसरी राजधानी डॉ दशरथ शर्मा ने कहा है
यहां से ग्रिड पेटर्न विधि से जूते खेत मिले है
यहां से शल्य चिकित्सा का वर्णन मिला है
मिट्टी से जनन अंगों के प्रतीत मिले हैं
भूकंप के साक्ष्य मिले है
मिट्टी की मूर्तियां नहीं मिली
✴️बालाकोट- यह अरब सागर के तट में कराची के निकट का बंदरगाह है जहां से प्राग् सैंधव व  विकसित सैंधव सभ्यता के अवशेष मिले! 
✴️चंहुदडो- इसकी खोज 1931 में गोपाल मजूमदार ने की थी यह पाकिस्तान की सिंध में स्थित है यहां से लिखने की चौकियां मसीपत्र सील या मुद्राओं के निर्माण के कारखाने मनका बनाने के कारखान ईटों से बनी भड्डीया मिली है! 
महत्वपूर्ण तथ्य- जहां एक मात्र स्थान था जहां से वक्राकार ईट मिली है यह एक मात्र स्थान था जहां से दुर्ग के साक्ष्य नहीं मिले!  यह सभ्यता का औद्योगिक स्थल था!  ईद पर एक बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजों के निशान मिले! 
✴️बणवाली- इसकी खोज 1973-74 में रविंद्र सिंह बिष्ट ने घाघरा नदी के तट पर हिसार (हरियाणा) में की  यहां से मिट्टी का हाल प्राप्त हुआ है! 
एक  अर्ध  वृत्ताकार ढांचा प्राप्त हुआ है जिससे मंदिर होने की संभावना व्यक्त की गई है! 
यहां से मिट्टी का खिलौना वाला हल मिला है! 
यहां से एक जोहर का मकान और बास बेसिग भी मिला है! 
✴️रोपड़- इसकी खोज 1955-56 में यज्ञदत्त शर्मा ने पंजाब सतलज नदी के तट पर की यहां से मानव कब्र के नीचे कुत्ते का सवाधान मिला है! 
इसके वर्तमान का नाम रूपनगर है! 
यहां से ताबे की कुल्हाड़ी मिली है
मनुष्य के साथ कुत्ता दफनाने का साक्ष्य मिला! 
✴️ सुरकोटदा- इस स्थल की खोज 1972 में कच्छ गुजरात में यज्ञदत्त शर्मा जी ने की! 
यहां से घोड़े की अस्तियां प्राप्त हुई है! 
यहां से पत्थर से ढकी हुई कब्र मिली है! 
यहां से कलश समाधान भी मिले है! 
✴️रंगपुर- इस स्थान की खोज 1953-54 में रंगनाथ राव ने भादर नदी के तट पर गुजरात के काठियावाड़ जिले में की! 
नष्ट होती सभ्यता के संकेत यही से मिले
यहां से चावल के साथ भी मिले! 
Note- हड़प्पा सभ्यता के लोग चावल घोड़े लोहे से प्रचलित थे! 
✴️ राखीगढ़ी- हड़प्पा का दूसरा सबसे बड़ा स्थल है जो घघगर नदी के तट पर हरियाणा में है 
यहां से स्तंभ आयुक्त मंडप के प्रमाण मिले! 
मई 2012 में इसे यूनेस्को ने ग्लोबल हेरिटेज फंड में शामिल किया! 
✴️शोर्तुगोई- यह स्थान अफगानिस्तान में है एक मात्र स्थान जहां से नहरो की जानकारी मिली है! 
🎇हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण-
1. मार्टिमर व्हीलर व गार्डन चाइल्ड के अनुसार इस सभ्यता का अंत आर्य या बाह्य आक्रमण के कारण हो
2. कनेडी महोदय के अनुसार इस सभ्यता का पतन महामारी के कारण हुआ! 
3. जॉन मार्शल के अनुसार इस सभ्यता का पतन प्रशासनिक शिथिलता (गृह युद्ध) के कारण हुआ! 
4. एमआर साहनी के अनुसार इस सभ्यता का पतन भूकंप के कारण हुआ है! 
5. अमलानंद घोष और ऑरेंज स्स्टेइन के अनुसार इस सभ्यता का अंत जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ! 

🌅हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख अन्य स्थल-
1. मुण्डीगाटक- यह स्थान अफगानिस्तान में था! 
2. कुंतागी,देशलपुर,मालवण,रोजदी- ये स्थान गुजरात में था! 
3. कुनाल,राखीगढ़ी,बनवाली, मीताथल- यह स्थान हरियाणा में है! 
4. बडगांव,अम्बखेडी- यह स्थान उत्तर प्रदेश में स्थित है! 
5. दैमाबाद प्रवरा नदी के तट पर महाराष्ट्र में है! 
6. सुत्कागेंडोर- राजस्थान 1927 में दशक नदी के तट पर ऑरेंज स्टाइन ने बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में खोजा! 
7. कोटदीजी- यह स्थान 1955-57 में सिंध प्रांत के खैरपुर नगर में फजल अहमद खा ने खोजा! 
8. आलमगीरपुर- यह स्थान 1958 में हिंडन नदी मेरठ से यज्ञदत्त शर्मा जी ने खोजा! 
9. मालवण- यह स्थान ताप्ती नदी के तट पर गुजरात में अल्विन ने खोजा! 

🏵 हड़प्पा सभ्यता से महत्वपूर्ण तथ्य🏵
✴️ इस सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह लोथल रंगपुर सुरकोटड़ा प्रभासपाटन था! 
✴️  लोथर से प्राप्त मृदभांड में एक व्यक्ति पर मुंह में मछली पकड़े हुए चिड़िया और नीचे एक लोमड़ी का चित्र बनाया गया है जो पंचतंत्र की कहानी के समान है! 
✴️ सामान्यत मृदभांड गुलाबी रंग या लाल रंग के होते थे! 
✴️ यह सभ्यता शांतिप्रिय मानी जाती है परंतु लोथल वह रोपड़ से ताबे की कुल्हाड़ी के  साक्ष्य से मिले! 
✴️ ताबे की मुहरे लोथल व देसलपुर से मिली है! सबसे अधिक मुहरे मोहनजोदड़ो से मिली है! 
✴️ कालीबंगा और मोहनजोदड़ो से प्राप्त मुहरे पशु बलि के साथ प्रकट करती है! 
✴️ मुहरो में वृषभ, हाथी, गैडे, हिरण मछली घडियाल के चित्र बने थे! 
✴️यह लोग गन्ने से अप्रचलित है
✴️कपास का ज्ञान सबसे पहले इन्हीं को था यूनानी ने कपास को सिण्डल कहा है! 
✴️ हड़प्पा और चंहुदडो से कांसे  की बैलगाड़ी मिली है! 
✴️ लोथर से आटा पीसने वाली चक्की  और हाथी दांत का पैमाना के साक्ष्य मिले है! 
✴️ इस सभ्यता का एक बर्तन ओमान (सऊदी अरब) से मिला! 
✴️ इस सभ्यता की मुख्य फसल गेहूं और जौ थी! 
✴️ डैडमैन लाइन(कंकालो से भरी गली) और कुऐं के साक्ष्य मोहनजोदड़ो से मिले है! 
🏵 इस सभ्यता के प्रमुख आयतीय वस्तुएं-
1. लाजवर्द(भवन निर्माण सामग्री)- अफगानिस्तान
2. सोना- फारस
3. चांदी- ईरान
4. टीन- अफगानिस्तान


                    ✴️वैदिक सभ्यता✴️
इस सभ्यता का समय काल 1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तथा इसे दो भागों में बांटा जाता है! 
1- ऋग्वैदिक काल(1500-1000 ईसा पूर्व) 
2- उत्तर वैदिक काल(1000-600 ईसा पूर्व) 
Note- वैदिक सभ्यता की स्थापना का श्रेय आर्यो को जाता है  इस शब्द का अर्थ श्रेष्ठ उत्तम अभिजात कुलीन होता है! 
✴️1853 मैक्समूलर ने आर्य जाति को श्रेष्ठ जाति कहकर संबोधित किया उसने कहा कि यह मध्य एशिया से भारत आए थे! 
✴️ एक समान भाषा बोलने वालों को भी आर्य कहा जाता है तथा  इंडो-यूरोपियन भाषा बोलने वाले समूह को भी आर्य कहते हैं! 
🟠 मूल स्थान से संबंधित मत-
1- मध्य एशिया या बैक्टीरिया से संबंधित मत-जर्मन विद्वान मैक्स मूलर ने देखा कि इरानी ग्रंथ जेन्द अवेस्ता से इस सभ्यता की कई बातें मिलती है! अतः आर्य  मुल रूप से मध्य एशिया के निवासी थे यहां एक प्रमाणित मत है! 
2- उत्तर ध्रुव से संबंधित मत- बाल गंगाधर तिलक ने अपनी पुस्तक द ऑर्थोटिक होम आफ आर्यन मे आर्यों को उत्तरी ध्रुव का मूल निवासी माना है! 
3- तिब्बत संबंधित मत- दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में इन्हें तिब्बत से संबंधित बताएं! 
4- सप्तसैंधव क्षेत्र- अविनाश चंद ने आर्यो को सप्तसिंधु क्षेत्र का बताया है! 
🟠आर्यो के जानकारी के साधन-
1- बोगजकोई अभिलेख- यह विश्व का सबसे प्राचीन अभिलेख है जो ईरान से प्राप्त हुआ इसे एशिया माइनर अभिलेख भी कहते हैं इसमें ऋग्वेद के देवता इंद्र वरुण मित्र नासत्य का वर्णन मिलता है! 
Note- भारत में सबसे प्राचीन अभिलेख अशोक के अभिलेख है! 
2- वेद-  वे शब्द विद धातु से बना है जिसका अर्थ होता है जानना या ज्ञान प्राप्त करना था इसके संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास जी थे इसकी उपनाम श्रुति ग्रंथ साहित्य ग्रंथ और अपौरुषेय ग्रंथ है! 
Note- श्रुति ग्रंथ- सुनकर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जान पहुंचाएं अर्थात गुरु शिष्य परंपरा
अपौरुषेय ग्रंथ- देवताओं द्वारा रचित ग्रंथ
महत्वपूर्ण- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद को वेदत्रेयी कहा जाता है! 
वेदों के प्रकार- वे चार प्रकार के होते हैं! 
1- ऋग्वेद- 
सबसे प्राचीन वेद है! 
इसको पढ़ने वाले को होर्त या होता कहा जाता है! इसका उपवेद आयुर्वेद है!जिसके रचनाकार प्रजापति है! 
इसमें 10 मंडल 1028 सूक्त और 10462 मंत्र है! 
इसके ब्राह्मण ग्रंथ ऐतरैय व कोषीतकी  है!
इसमें पहला आठवां नौवां और दसवां मंडल बाद में जोड़ा गया! 
इसमें सबसे पवित्र नदी सरस्वती है! 
चौथे मंडल में कृषि का वर्णन है! 
तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र है! 
दसवीं मंडल में चतुर्वर्ण व्यवस्था का उल्लेख है! 
इसमें नवे मंडल में सोम देवता का वर्णन है! 
इसमें साथ में मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन है! 
असतो मा सद्गमय वाक्य भी इसी वेद से लिया गया

2- सामवेद-
भारत में संगीत का जनक किसी वेद को कहा जाता है! 
इसको पढ़ने वाले को उद्रगाता  कहा जाता है! 
इसका उपयोग गंधर्व वेद है जिसकी रचना महर्षि नारद ने की है! 
इसका ब्राह्मण ग्रंथ पंचवीस है जिसके रचनाकार जैमिनी है! 
इसमें मूल मंत्र 75 है! 
3- यजुर्वेद-
यजु का अर्थ होता है- यज्ञ से
इसमें गद्य तथा पद्य दोनों है अर्थात यह चम्पू शैली का वेद है! 
इसको पढ़ने वाले को अध्वर्यु कहा जाता है! 
किस वेद में हाथी पालन का वर्णन भी मिलता है! 
यह दो प्रकार का होता है-
1- कृष्ण यजुर्वेद- इसमें  गद्य तथा पद्य दोनों है! 
2- शुक्ल यजुर्वेद- इसमें केवल पद होते हैं इसे वाजसनेयी  संहिता भी कहते है! 
4- अथर्ववेद-
यह वेद अथर्व ऋषि द्वारा रचित है! 
इस वेद में औषधियों वशीकरण जादू टोना आदि का वर्णन है
इसका उपवेद शिल्प वेद है जिस के रचनाकार विश्वामित्र है! 
इसका ब्राह्मण ग्रंथ गोपथ है! 
इसमें  काशी का वर्णन तथा मगध महामारी फैलने का वर्णन  भी किया गया! 
🟠 पुराण- पुराणों की संख्या 18 इनके संकलनकर्ता लोमहर्ष तथा उसके पुत्र उग्रश्रवा है सबसे प्राचीन तथा प्रमाणित पुराण मत्स्य पुराण है
🟠 आरण्यक ग्रंथ- 
वनों में रचे गए यह ग्रंथ है जो वानप्रस्थ आश्रम के ऋषि द्वारा लिखे जाते हैं! 
इनका उद्देश्य है ईश्वर की उपासना में बोल देना! 
इनकी संख्या 7 है- ऐतरेय तैत्तिरीय माध्यन्दिन शंखायन  मैत्रायणी मलवकार वृहदारण्यक ! 
🟠 उपनिषद-
गुरु के समीप निष्ठा पूर्वक बैठना उपनिषद का अर्थ होता है! 
यह दार्शनिक विचारधारा के ग्रंथ है! 
इनकी संख्या 108 है इसमें 11 वह13 प्रमुख है! 
दारा शिकोह ने उपनिषदों का फारसी अनुवाद किया था! 
शंकराचार्य ने उपनिषदों में भारतीय की रचना की जिसे वेदांत दर्शन कहा जाता है! इनकी संख्या 6 है शिक्षा ज्योतिष कल्प व्याकरण निरुक्त छंद! 
सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया! 
        ऋग्वेदिक सभ्यता(1500-1000 ईसा पूर्व) 
🟠भौगोलिक विस्तार- यह सप्त सैंधव क्षेत्र में फैली था! अर्थात  7 नदियों से घिरा क्षेत्र यह नदियां सिंधु सरस्वती सतलाज व्यास रावी झेलम चिनाब थी! 
🟠 राजनीतिक जीवन- आर्यो  को पंच जन कहते थे क्योंकि इनके 5 कबीले होते थे- पुरू अनु द्रुहू  तुर्वस यदु थे! 
महत्वपूर्ण प्रशासनिक शब्द-
राजन या गोप- राष्ट्री का मालिक
पुरोहित- जन का मालिक
विशापति- विश का मालिक
ग्रामीणी- गांव या ग्राम का मालिक
कुलुप- कुल का मालिक
Note- ऋग्वैदिक काल में कुल सबसे छोटी इकाई थी
सभा और समिति दोनों ऋग्वैदिक काल की जनतांत्रिक संस्थाएं मानी जाती है! 
महत्वपूर्ण-
विदथ सबसे प्राचीन संस्था थी, इसका ऋग्वेद में 122 बार उल्लेख हुआ है जबकि समिति का 9 बार और सभा का 8 बार उल्लेख हुआ है। सभा वृद्ध जनों एवं कुलीन लोगों की संस्था थी। समिति कबीले की आम सभा होती थी।  जिसका राजा पर पूर्ण नियंत्रण होता था स्त्रियां सभा और समिति में भाग लेती थी !विदथ के संगठन और कार्यों के बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
बली एक प्रकार का कर था जो जनता स्वेच्छा से राजा को देती थी! 
ऋग्वेद के सातव मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन किया गया है जो परुष्णी अर्थात रावी नदी के तट पर भरत जन तथा 10 अन्य जनों के बीच हुआ था इसमें भरत जन के प्रमुख सूदास की विजय हुई! 
🟠 आर्थिक स्थिति- 
यह सभ्यता एक कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाली सभ्यता थी जिसका प्रमुख व्यवसाय पशुपालन था! 
गाय को अघग्या कहा जाता था! और सबसे उपयोगी पशु घोड़ा था! 
इस काल में लोहे का प्रचलन नहीं था और सर्वप्रथम ताबे का प्रयोग किया था! 
✴️ आर्थिक स्थिति से जुड़ी शब्दावली-
त्वष्ठा या तक्षण- बढ़ई
कमरि- धातुकार
यव- जौ
उर्दर- अनाज मापने वाला एक पात्र
हिरण्य- सोना
अयस- तांबा
🟠 सामाजिक स्थिति-
ऋग्वेद के दसवें मंडल में पुरुष सूक्त चार वर्णों की उत्पत्ति का उल्लेख है परंतु यह अस्तित्व में उत्तर वैदिक काल में आए! 
ऋग्वैदिक काल पितृसत्तात्मक था परंतु स्त्रियों की स्थिति काफी अच्छी थी! परिवार के मुखिया को कुलक(पिता) कहा जाता था
इस समय बाल विवाह सती प्रथा दहेज प्रथा पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था! 
सोम रस प्रमुख पेय पदार्थ था! 
समाज में विधवा विवाह  दास प्रथा नियोग प्रथा का प्रचलन था! 
Note- जब किसी स्त्री के बच्चे नहीं होते या उसके पति की अकाल मृत्यु हो जाती है तो वह अपने देवर या संबंधी द्वारा गर्भ धारण करती है इसे ही नियोग प्रथा कहते हैं! 
इस काल की प्रमुख स्त्रियां लोपमुद्रा घोषा अपाला  विश्ववरा थी! 
 Note- जीवन भर अविवाहित स्त्री को अमाजु कहा जाता था! 

🟠 धार्मिक स्थिति-
आर्यों ने प्राकृतिक शक्तियों का दैव्यकरण किया! 
यासक ने देवताओं को तीन भागों में बांटा-
1- आकाशवासी देवता-
धौ/धौस- सबसे प्राचीन देवता इन्हें सर्जन का देवता कहा जाता था 
इनकी तुलना यूनानी देवता ज्यूस के सामान की जाती है! 
सूर्य- उगता हुआ सूरज इन्हें तेज का देवता कहा जाता है! 
वरुण- इसे ऋत का संरक्षक या ऋतस्यगोप को कहा जाता है इनका ऋग्वेद में सातवें मंडल मे 30 बार उल्लेख है इन्हें देवताओं का देवता कहा जाता है! समुद्र का देवता, विश्व के नियामक और शासक सत्य का प्रतीक, आकाश, पृथ्वी एवं सूर्य का निर्माता के रूप में जाना जाता है। 
Note- ऋतस्यगोप का मतलब होता है ऋतु परिवर्तन एवं दिन रात का कर्ताधर्ता! 
उषा- इन्हें उत्थान की देवी या प्रगति की देवी कहा जाता है! 
सविता(सावीत्री)- इन्हें अमृत की देवी कहा जाता है ऋग्वेद का तीसरा मंडल में वर्णित गायत्री मंत्र इन्हीं को समर्पित है! 
षूषन- पशुओं के देवता थे जो उत्तर वैदिक काल में शूद्रों के प्रमुख देवता बन गए! 
अश्वनी- चिकित्सा के देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक

2.अंतरिक्ष के देवता-
इंद्र- इन्हें युद्ध का देवता कहा जाता था यह आर्यों के प्रमुख देवता थे जिनके लिए ऋग्वेद में 250 सूक्त है! 
मरुत- इन्हें तूफान का देवता कहा जाता है! 
पर्जन्य (बादल)- इन्हें वर्षा का देवता कहा जाता है! 

3. पृथ्वी के देवता-
पृथ्वी- सर्जन की देवी
अग्नि- इन्हें अतिथि देवता या आर्यों का पुरोहित कहा जाता है इनके लिए ऋग्वेद में 200 श्लोक है! 
सोम- इन्हें वनस्पति का देवता कहते हैं इनका वर्णन ऋग्वेद के नवे मंडल में है इनके लिए 120 श्लोक है!
बृहस्पति- यज्ञ के देवता

      उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व) 

✴️ इस काल को ब्राह्मण धर्म काल भी कहते हैं! 
✴️ लोहे की खोज होने के कारण इसे लोगों प्रौद्योगिकी युग भी कहा जाता है! 
✴️ इस काल में सर्वप्रथम चित्रित मृदभांड मिले हैं! 
✴️ इस काल का केंद्र गंगा यमुना का दोआक था जो कुरुक्षेत्र तक था! 

राजनीतिक स्थिति-
इस काल में राजा के दैवीय उत्पत्ति का सिद्धांत अस्तित्व में आया जिसका पहला वर्णन ऐतरेय ब्राह्मण में मिलता है! 
राजा का  वंशानुगत  हो गया था जिसे सम्राट या एकराट कहा जाता था! 
बली एक अनिवार्य कर हो गया था जो ऊपर का 1/16वा भाग  हो गया था! 
Important- प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार कर की दर 1/6 भाग थीl
विजयनगर राजवंश प्राचीन धर्म ग्रंथों मे वर्णित  कर की दर पर आधारित कर वसूल करता था! 

🟠प्रमुख अधिकारी-
रत्नी- राज्य के उच्च अधिकारी को रत्नी कहते हैं जिसका वर्णन  शतपथ ब्राह्मण में 12 बार आया है! 
सूत- सारथी
भागदूध- कर संघकर्ता
महिषी- प्रमुख रानी
पालागत- विद्वान
श्रमण- वेद विरोधी अध्यापक

🟠आर्थिक स्थिति-
इस काल का मुख्य व्यवसाय कृषि था! 
अतरंजीखेड़ा (यूपी) से कृषि के लोहे के यंत्र मिले हैं जो लोहे का प्रथम प्रमाण है! 
इस काल में मुद्रा का प्रचलन हो गया था निष्क जो ऋग्वैदिक काल में स्वर्ण आभूषण था! यह उत्तर वैदिक काल मैं प्रमुख मुद्रा बन गई थी! 
इस काल में उर्फ(उन) और शज(सन) का उल्लेख मिलता है! 
🟠 धार्मिक स्थिति-
इस काल में कर्मकांड ओं का उदय हुआ! 
सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में पुर्वजन्म व मृत्यु का उल्लेख है जबकि मोक्ष का वर्णन उपनिषदों  मे मिलता है! 
इस काल के प्रमुख देवता-
प्रजापति- सर्वोच्च देवता तथा सर्जन के देवता
रुद्र- पशु का देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक
पूषक- यह शूद्रों के देवता थे! 

🟠 सामाजिक स्थिति-
चार वर्णो का उदय हुआ- ब्राह्मण क्षेत्रीय शूद्र वैश्य
इस काल में स्त्रियों की स्थिति मैं गिरावट आई इस काल की प्रमुख स्त्रियां- गार्गी गंधर्व गृहिता मैत्रीय वेदवती थी! 
जाबालोपनिषद में चार आश्रमों का उल्लेख है! 
✴️इस काल में त्रिऋण का उल्लेख है-
1.पितृ ऋण- संतान उत्पन्न करने से
2. ऋषि ऋण- वेदों के अध्ययन से
3. देव ऋण- यज्ञ करने से

🟠 विवाह के 8 प्रकार-
1- ब्रह्मा विवाह- योग्य वर के साथ विवाह
2- देव विवाह- पुरोहित के साथ विवाह
3- आर्ष विवाह- दो गायों के बराबर धन देकर किया जाने वाला विवाह! 
4- प्रजापत्य विवाह- पिता द्वारा कन्या का हाथ माग कर के किया गया विवाह
Note- ब्रह्मा विवाह देव विवाह आर्ष विवाह प्रजापत्य विवाह इन विवाह को प्रसन्न विवाह कहते है! 
5- असुर विवाह- धन के बदले किया जाने वाला विवाह
6- गंधर्व विवाह- प्रेम विवाह
7- पैचास विवाह- बलात्कार करके किया जाने वाला विवाह
8- राक्षस विवाह- बलपूर्वक किया जाने वाला विवाह

🟠 प्रमुख यज्ञ-
अश्वमेघ यज्ञ- राजा द्वारा साम्राज्य विस्तार के लिए घोड़ा छोड़ दिया जाता है! 
Note- अंतिम अश्वमेघ यज्ञ सवाई जयसिंह ने कराया था! 
राजसुय यज्ञ- राज अभिषेक के दौरान किया गया यज्ञ! 
वाजपेई यज्ञ- शक्ति प्रदर्शन के लिए रथ दौड
अग्निष्टोम यज्ञ- पापों से मुक्त से संबंधित यज्ञ
सौत्रामंणि यज्ञ- पशु बलि
पुरुषमेध यज्ञ- राजनीतिक वर्चस्व के लिए विद्वान पुरुष की बलि दी जाती थी! 

🟠षड्दर्शन- 
1. लोकायत दर्शन- इसके लेखक चार्वाक है! 
2. योग दर्शन- पतंजलि
3. साख्य दर्शन- कपिल
4. न्याय दर्शन- गौतम
5. उत्तर मीमांसा- बादरायण
6. पूर्व मीमांसा- जैमिनी

                       ✴️जैन धर्म✴️
जैन शब्द संस्कृत के जिन से बना है जिसका अर्थ होता है विजय! 
जैन परंपराओं के अनुसार जैन धर्म में 24 तीर्थ करते हैं! 
प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ या ऋषभदेव  और 22वें तीर्थ कर अरिष्टनेमी थे  इन दोनों का वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है! 
23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जो काशी (कौशल) के इच्छवाकु वंश के राजा अश्वसेन के पुत्र थे! इनके अनुयायी  निग्रंथ कहलाते हैं! 
पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित किए गए चार महाव्रत-
1. सत्य
2. अहिंसा
3. अस्तेय- चोरी ना करना
4. अपरिग्रह- धन का संचय ना करना! 
Note- पांचवा महाव्रत महावीर स्वामी ने जोड़ा जिसे ब्रह्माचार्य (इंद्रयो पर विजय प्राप्त करना) कहते हैं! 
पार्श्वनाथ के कारण ही जैन धर्म में महिलाओं को प्रवेश मिला था! 
✴️ महावीर स्वामी-
यह जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे! 
जैन धर्म का इन्हें वास्तविक संस्थापक भी माना जाता है! 
इनका जन्म 540 ई.पु. कुंडलगांव वैशाली (बिहार) में हुआ था
उनके पिता का नाम सिद्धार्थ था जो वज्जी संघ के ज्ञातृक कुल के प्रधान थे
इनकी माता का नाम त्रिशला था  जो लिच्छवी शासक चेटक की बहन थी! 
उनकी पत्नी का नाम यशोदा था जो कुंडिय गोत्र के राजा समरवती की पुत्री थी! 
इनकी पुत्री का नाम प्रियदर्शना या अणोज्जा था! 
इनके दामाद का नाम जामालि था जो इनका प्रथम शिष्य था! 
इनके बचपन का नाम वर्धमान था
इनके जन्म का प्रतीक सिंह था
इन्होंने 30 वर्ष की आयु में अपने भाई नांदिवर्मन की आशीर्वाद से ग्रह त्यागा था! 
इन्हें 42 वर्ष की आयु में ऋजुपालिका नदी(बाराकर नदी) के तट मे जम्भिक गांव (बिहार) सारे वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई! 
प्रथम शिष्या चंदना थी! 
Note- बहुत से स्त्रोतों के अनुसार उनकी पहली शिष्या चंपा की राजकुमारी पद्मावती थी! 
इन्होंने अपना पहला उपदेश विपुलांचल पहाडी (राजगृह)  मे ऋजुपालिका नदी के तट में दिया! 
इनकी मृत्यु 468 ईसा पूर्व पावापुरी मे  मल्ली राजा सुक्तपाल के वहां हुई! 
महावीर ने अपने जीवन काल में 11 सदस्यों का एक संघ बनाया जिसे गणधर कहा जाता था! 
जैन धर्म का सर्वोच्च ज्ञान केवल्य कहलाता  था! 
जैन धर्म के त्रिरत्न-
1. सम्यक दर्शन
2. सम्यक ज्ञान
3. सम्यक आचरण
✴️ जैन साहित्य-
प्रारंभ में जैन साहित्य अर्धमगधी भाषा में था परंतु बाद में प्राकृत भाषा को अपनाया गया है सबसे अंत में कन्नड़ व संस्कृत भाषा में भी जैन साहित्य दिखता है! 
जैन साहित्य को आगम कहा गया है जिसने 12 अंग 12 उपांग 10 प्रकीर्ण 6 छेद सूत्र 4 मूल सूत्र 1 नदी सूत्र है! 
आगम ग्रंथ महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद का है! 
जैन धर्म से कुछ प्रमुख ग्रंथ-
आचारंग सुत्र- इसमें भिक्षुको के नियम व विधि विधानो का उल्लेख था! 
भगवती सूत्र- यह महावीर स्वामी की जीवनी है इससे हमें 16 महाजनपदों का भी पता चलता है! 
भद्रबाहुचरित्र- इसमें चंद्रगुप्त मौर्य के राज्य काल की जानकारी मिलती है! 
कल्पसूत्र- भद्रबाहु द्वारा लिखित संस्कृत ग्रंथ है इसमें जैन तीर्थ करो के जीवनों का वर्णन है! 

✴️जैन दर्शन-
1. अनेकान्तवाद- बहुरूपा का सिद्धांत
2. सप्तभंगीनयवाद- सापेक्षता का सिद्धांत(स्यादवाद का सिद्धांत) के नाम से भी जाना जाता है! 
3. नवावाद- आर्थिक दृष्टिकोण का सिद्धांत

✴️ जैन संगीतियां-
1. प्रथम जैन संगीति-
प्रथम जैन संगीति 300 ई. में पाटलिपुत्र में हुई इसकी अध्यक्षता स्थुलभद्र ने की
इस संगति का परिणाम विखरे एवं लुप्त  ग्रंथों का संचय किया गया! 
जैन धर्म को दो संप्रदायों में विभाजित कर दिया गया! 
1. श्वेतांबर
2. दिगंबर
श्वेतांबर-
इसकी स्थापना स्थूलभद्र ने की इसमें मोक्ष प्राप्ति करने के लिए वस्त्र का त्याग नहीं करना पड़ता था! 
आगम साहित्य स्वीकार किया
स्त्रियों को निर्वाण के योग्य समझा

दिगंबर-
इसकी स्थापना भद्रबाहु ने की इसे समैया भी कहा जाता है! 
इतने मोक्ष के लिए वस्त्रों का त्याग करना आवश्यक था! 
इन्होंने आगम साहित्य स्वीकार नहीं किया
स्त्रियों को के निर्वाण योग्य  नहीं समझा जाता था! 

द्वितीय जैन संगीति-
यह जैन संगीति 383 ईसवी में वल्लभी गुजरात में हुई! 
इस संगीति की अध्यक्षता क्षमाश्रवण(देवर्धिगण) ने की थी! 

जैन धर्म के महत्वपूर्ण प्रश्न-
जैन धर्म में युद्ध व कृषि दोनों वर्जित थी! 
जैन धर्म पुनर्जन्म व कर्मवाद पर विश्वास करता था
फार्म में मूर्ति का प्रचलन नहीं था बाद में जैन धर्म में मूर्ति का प्रचलन होने लगा! 
ये वेद की अपौरुषेयता व ईश्वर का अस्तित्व शिकार करते थे! 
जैन धर्म मे 18 पापा की कल्पना की गई है! 
महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद सुधर्मन संघ का अध्यक्ष बना बाद में जम्बू संघ का अध्यक्ष बना! 
✴️ जैन धर्म के अनुयायी राजा-
चंद्रगुप्त मौर्य- पहली जैन संगीति इसी के समय में आयोजित की गई थी! 
कलिंग राजा खारवेल- उदयगिरि की पहाड़ी में इतने गुफा बनाई थी! 
राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष- इतने रतनमलीका ग्रंथ की रचना की! 
गंग राजा राजमल चतुर्थ- इसके  मंत्री चामुंड राय ने 974 ई. में श्रवणबेलगोला कर्नाटक में बाहुबली की मूर्ति बनाई यह चट्टान के सहारे खड़ी सबसे ऊंची मूर्ति है यहां प्रत्येक 12 वर्ष में दूध से अभिषेक होता है जिसे महामस्तकाभिषेक कहते हैं! 


                         बौद्ध धर्म
बुद्ध का अर्थ होता प्रकाशमान  या जागृत
एडविन अर्नोल्ड नए महात्मा बुद्ध को लाइट ऑफ एशिया कहा है! 
महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ई.पु. लुंबिनीवन (कपिलवस्तु नेपाल) में हुआ था! 
बुद्ध के जन्म के समय कालदेवल नामक  तपस्वी व कोडिनीय नामक ब्राह्मण ने बुद्ध के बारे में कहा था यह चक्रवर्ती सम्राट या सन्यासी बनेगा! 
इनके पिता जी शुद्धोधन थे जो शाक्य प्रधान थे! 
इनकी माता का नाम महामाया देवी था जो कौलीय राज्य की राजकुमारी थी! 
इनका पालन-पोषण इनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया था जिसका गौतम बुद्ध भी कहा जाता है! 
इनकी मौसी प्रजापति गौतमी इन की पहली शिष्या थी! 
इनका विवाह यशोधरा से हुआ था उनके पुत्र का नाम राहुल था! 
इन्होंने 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग दिया था इस घटना को बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहते हैं! 
ग्रह त्याग की घटना का प्रतीक घोड़ा है उनके घोड़े का नाम कथक व सारथी का नाम चनना था! 
इनके प्रारंभिक गुरु आचार्य आरंभ आलारकलाम और  धर्माचार्य रुद्रकराम पुत्र थे! 
इन्हें 35 वर्ष की आयु में निजरना  (पुनपुन नदी) नदी के तट पर पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई! 
महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश ऋषिपतनम  (सारनाथ) में दिया था! इस समय उनके  अनुयायी पांच सन्यासी थे इनने पाली भाषा में यह उपदेश दिया था जिसे बौद्ध धर्म में धर्मचक्रप्रवर्तन कहते हैं
इन्होंने अपना अंतिम उपदेश सुभद्र के वहां कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) में दिया था! 
इनकी मृत्यु 483 ईसवी में अपने शिष्य चुंद के वहां शुकरमादव भोजन सामग्री खाने से हिरण्यवती नदी के तट पर हुआ इस घटना को बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहते हैं! 
✴️महात्मा बुद्ध के जीवन के महान संकेत-
वृद्ध व्यक्ति,बीमार व्यक्ति,मृत व्यक्ति,सन्यासी व्यक्ति

✴️ बौद्ध धर्म के त्रिरत्न-
बुद्ध, धम्म,संघ

✴️ बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य-
दुख, दुख समुदाय, दुख निरोध, दुख निरोध गामिनी मार्ग
✴️ बौद्ध धर्म के अष्टागिक मार्ग-
बौद्ध धर्म में दुखों को दूर करने के लिए मध्य प्रतिपदा या मध्य मार्ग बताया गया है जिनके 8 सोपान होते हैं जिस कारण इसे अष्टागिक मार्ग कहा जाता हैl
प्रज्ञा- सम्यक दृष्टि और सम्यक संकल्प
सील- सम्यक वाणी, सम्यक आजीविका, सम्यक क्रमात
समाधि- सम्यक व्यायाम,  सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि
✴️ बौद्ध धर्म का दर्शन-
अनिश्वरवाद- ईश्वर की सत्ता पर विश्वास नहीं करते थे
शुन्यतावाद- संसार की समस्त वस्तुएं शुन्य है
अनात्मवाद- आत्मा चेतना पर सर्वाधिक बोल देना
क्षणिकवाद- संसार में कोई चीज स्थिर नहीं है
✴️ बौद्ध संगीतियां-
1. प्रथम  बौद्ध संगीति(483Bc)- यह बौद्ध संगीति अजातशत्रु के काल में राजग्रह (बिहार) में हुई थी जिसकी अध्यक्षता महाकस्प ने की! 
2. द्वितीय बौद्ध संगीति(383Bc)- यह बौद्ध संगीति कालाशोक के समय वैशाली बिहार में हुई थी जिसकी अध्यक्षता शाबकवीर ने की थी! 
3. तृतीय बौद्ध संगीति(251Bc)- यह बौद्ध संगति अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र बिहार में हुई जिसकी अध्यक्षता मोगलीपुत्ततिस्स की! 
4. चतुर्थ बौद्ध संगीति(100ई.)- यह बौद्ध संगीती कुंड वन कश्मीर में कनिष्क के समय हुई इस संगिति की अध्यक्षता वासु मित्र ने की! 

✴️बौद्ध साहित्य का विवरण-
1. त्रिपिटक- यह तीन ग्रंथ है जिनसे हमें बौद्ध धर्म के बारे में पता चलता है-
⚫सुत्तपिटक- इसकी रचना का आनंद थे इसके 5 भाग होते हैं यह सबसे बड़ा पिटक है! 
1. दीर्घ निकाय
2. अंगूत्तर निकाय
3. मज्झिम निकाय
4. खुद्दक निकाय
5. संयुक्त निकाय
 विनय पिटक- इसकी रचना उपाली ने की थी! बौद्ध भिक्षुको के अनुशासन के नियम इसी में वर्णित है! 
अभिधम्म पिटक- इसकी रचना सम्राट अशोक के समय मोगल्लीपुत्त तिस्स ने की  इस में बौद्ध धर्म के दर्शन का उल्लेख है! 
2. मिलिंदपन्हो- यूनानी शासक मिनांडर तथा बौद्ध भिक्षु नागसेन  के बीच का संवाद है! 
3. दीपवंश- इस ग्रंथ से श्रीलंका के इतिहास का पता चलता है! 
4. महावंश- इसके रचनाकार महंत महानामा थे! इससे हमें मगध के राजाओं की  सूची मिलती है! 
5. जातक कथाएं- यह पाली भाषा में है इसमें बुद्ध के पूर्व जन्म की कहानियां है! 

✴️ बौद्ध धर्म को संरक्षण देने वाले राजा-
बिंबिसार और उसकी पत्नी क्षेमा और उनका पुत्र अजातशत्रु! 
कौशल नरेश प्रसेनजीत और उनकी पत्नी मल्लिका
कौशांबी नरेश उदयन और उनकी पत्नी समावती
अवंती नरेश पद्योत
मौर्य नरेश अशोक और दशरथ, कुषाण नरेश कनिष्क
 हर्षवर्धन( अंतिम राजा जिसने बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया) 

✴️बौद्ध धर्म से जुड़े मुख्य तथ्य-
महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्य आनंद के कहने में संघ में औरतों का प्रवेश किया! 
इनके चचेरे भाई देवव्रत ने इन्हें दो बार मारने की कोशिश की!
महात्मा बुद्ध ने श्रावस्ती के डाकू अंगुलिमाल को अपना शिष्य बनाया
बुद्ध ने तपस्सु और भल्लिक नामक दो शूद्रों को अपना शिष्य बनाया! 
महात्मा बुद्ध ने अपने सबसे अधिक उपदेश कौशल की राजधानी श्रावस्ती में दिए! 
बौद्ध धर्म का प्रचार का मुख्य केंद्र मगध था! 
बौद्ध धर्म के सबसे अधिक मठ सिक्किम में है! 
✴️ बौद्ध धर्म से जुड़े मठ-
जम्मू और कश्मीर में स्थित मठ- हेमिस मठ, माथे मठ, थाकसे मठ
अरुणाचल प्रदेश में स्थित मठ- नामग्याल मठ और लवांग मठ( भारत का सबसे बड़ा बौद्ध मठ) 
सिक्किम के मठ- रूमटेक मठ
हिमाचल प्रदेश के मठ- ताबों मठ( इसे हिमाचल का अजंता कहा जाता) 
✴️ बौद्ध धर्म के संप्रदाय- बौद्ध धर्म के दो संप्रदाय हैं-
1.हीनयान संप्रदाय-
इसका अर्थ होता है निम्न मार्ग
इस संप्रदाय के ग्रंथ पाली भाषा में होते थे
यह महात्मा बुद्ध को महापुरुष मानते थे! 
2. महायान संप्रदाय-
इसका अर्थ होता है- उत्कृष्ट मार्ग
इनके ग्रंथ संस्कृत भाषा में होते थे
यह महात्मा बुद्ध को देवता मानते हैं




















Tuesday, August 16, 2022

विकीपीडिया टेस्ट नंबर 19

1.ऋग्वेद में आर्य शब्द का उल्लेख कितनी बार है? 
A. 30 बार
B. 36 बार
C. 7  बार
D. 10 बार
उत्तर- B
ऋग्वेद में आर्य शब्द का वर्णन 36 बार किया गया है सबसे अधिक वर्णित नदी सिंधु नदी है और सबसे पवित्र नदी सरस्वती है तथा गंगा का वर्णन एक बार और यमुना का तीन बार है! 



2.ब्राह्मण सर्वस्व  के लेखक हलायुध किसके दरबार में थे? 
A. बल्लाल सेन
B. महिर भोज
C. महिपाल द्वितीय
D. लक्ष्मण सेन
उत्तर-D लक्ष्मण सेन  जिस के दरबार में गीत गोविंद के रचयिता का जयदेव तथा ब्राह्मण सर्वस्व के लेखक हलायुध थे! हलायुध लक्ष्मण सेन का प्रधान न्यायाधीश एवं प्रधानमंत्री था! 



3.बहिष्कृत भारत पत्रिका किस भाषा की थी? 
A. मराठी
B. तेलुगू
C. अंग्रेजी
D. हिंदी
उत्तर- A
बहिष्कृत भारत पत्रिका के लेखक भीमराव अंबेडकर थे यह मराठी भाषा में थी इनकी एक प्रसिद्ध पत्रिका मूकनायक भी थी! 

4.उद्देशिका को संविधान सभा ने कब अपनाया था? 
A. 22 जनवरी 1947
B. 13 दिसंबर 1946
C. 26 जनवरी 1950
C. 15 अगस्त 1947
उत्तर-A
उद्देशिका को सर्वप्रथम 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्तुत किया परंतु इसे संविधान सभा ने 22 जनवरी 1947 को अपनायाl



5.भारत के महान्यायवादी के पद का वर्णन कौन से अनुच्छेद में है? 
A. अनुच्छेद 75
B. अनुच्छेद 73
C. अनुच्छेद 76
D. अनुच्छेद 96
उत्तर- C
अनुच्छेद 76 मे भारत के महान्यायवादी का वर्णन है! यह भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है! अनुच्छेद 76(3) के तहत महान्यायवादी को सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार होगा! अनुच्छेद 88 के तहत महान्यायवादी संसद के किसी भी सदन में बैठ सकता है परंतु सदन में मत देने का अधिकार नहीं है! 


6. ग्राम सभा का वर्णन कौन से अनुच्छेद में है? 
A. अनुच्छेद 40
B. अनुच्छेद 243(A) 
C. अनुच्छेद 243(I) 
D. इनमें से कोई नहीं
उत्तर- B
अनुच्छेद 243(A)में ग्राम सभा का वर्णन हैl  अनुच्छेद 243(I) में  राज्य वित्त आयोग का वर्णन है! अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के संगठन हेतु निर्देश दिए गए हैं! 



7.भारत की अंतिम सीमा का पूर्वी बिंदु है? 
A. इंदिरा पॉइंट
B. गुहार मोती
C. कीबिधु
D. इंदिरा कॉल
उत्तर- C
भारत का पूर्वी बिंदु किबिधु (अरुणाचल प्रदेश) , पश्चिमी बिंदु गुहार मोती (गुजरात), दक्षिणी बिंदु इंदिरा प्वाइंट (ग्रेट निकोबार दीप) उत्तरी बिंदु इंदिरा कॉल (लद्दाख), मुख्य भूमिका दक्षिणी सीमा का बिंदु कन्याकुमारी है



8.शिपकिला दर्रा स्थित है? 
A. हिमाचल प्रदेश
B. अरुणाचल प्रदेश
C. जम्मू कश्मीर
D. सिक्किम
उत्तर- A



9.भारत में दैनिक मौसम मानचित्र जारी करता है? 
A. भारतीय सर्वेक्षण विभाग
B. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग
C. भारतीय कृषि विज्ञान विभाग
D. राज्य मौसम विज्ञान विभाग
उत्तर-B


10.ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस की अवधारणा कब आए? 
A. 1965
B. 1970
C. 1976
D. 1980
उत्तर- B
ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस की अवधारणा को 1970 में भूटान ने अपनायाl

11.जीएसटी कौन से अधिनियम के तहत आई? 
A. अधिनियम 2014
B. अधिनियम 2015
C. अधिनियम 2016
D. अधिनियम 2017
उत्तर- C
भारतीय संविधान के संविधान संशोधन 101 अधिनियम 2016 के तहत जीएसटी का प्रधान आया!  यह 1 जुलाई 2017 से लागू! जीएसटी संबंधी अनुच्छेद हैं- 246(A), 269(A), 279(A) 


12.कालशी अभिलेख की खोज कब हुई थी? 
A. 1852
B. 1856
C. 1858
D. 1860
उत्तर- D


13.कत्यूरीयों की दरबारी भाषा क्या थी? 
A. कुमाऊनी
B. गढ़वाली
C. संस्कृत
D. प्राकृत
उत्तर- C


14.महेंद्र चंद्र और गोरखाओं के बीच किस मैदान में युद्ध लड़ा गया था? 
A. रानी बाग
B. हवालाबाग
C. खुडबुडा मैदान
D. डीडीहाट मैदान
उत्तर- B



15. ललित शाह और मोहन चंद के बीच युद्ध कब हुआ? 
A. 1777
B. 1778
C. 1779
D. 1780
उत्तर- C



16. प्रतापशाह इंटर कॉलेज की स्थापना कब हुई? 
A. 1884
B. 1891
C. 1940
D. 1962
उत्तर- C


17. गढ़वाल मंडल की स्थापना कब हुई? 
A. 1968
B. 1970
C. 1969
D. 1939
उत्तर- A


18. राज्य की पहली बाल फिल्म कौन सी है? 
A. चेली
B. चेला
C. मधुली
D. गुल्लू
उत्तर- D


19. लोसर मेला कौन सी जनजाति से संबंधित है? 
A. भोटिया
B. जौनसारी
C. राजी
D. बुक्सा
उत्तर- A


20. निम्न में से कौन सा शुद्ध वर्तनी है? 
A. कैलाश
B. कैलास
C. कैलाष
D. कौलाश
उत्तर- B



21. साहचर्य का विलोम क्या होता है? 
A. वैमनस्य
B. असहयोग
C. विनियोग
D. अलगाव
उत्तर-D


22. कनक का निम्न में से अनेकार्थक शब्द नहीं है? 
A. सोना
B. समूह
C. धतूरा
D.  गेहूं
उत्तर- B


23. "झगड़ा लगाने वाले मनुष्य" के लिए एक शब्द क्या होगा? 
A. जय चंद्र
B. शकुनी
C. विभीषण
D. नारद
उत्तर-D

24. निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक प्रेमचंद की नहीं है? 
A. कायाकल्प
B. जय पराजय
C. रंगभूमि
D. प्रेमाश्रम
उत्तर- B


25.जब कोई सरकारी पत्र कार्यालय ज्ञापन या ज्ञापन एक साथ अनेक प्रेषितियो को भेजा जा रहा हो उसे क्या कहा जाता है? 
A. कार्यालय आदेश
B. अधिसूचना
C. अनुस्मारक
D.  परिपत्र
उत्तर- D

26. निम्न में से कौन सा वाक्य अशुद्ध है? 
A. यह एक गंभीर समस्या है! 
B. मुझे बड़ी भूख लगी हैl
C. मैंने राम से पूछा? 
D. वह घर गया|
उत्तर- B


27. रचना के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं? 
A. 3
B. 5
C. 6
D. 9
उत्तर-A (सरल वाक्य,मिश्रित वाक्य,संयुक्त वाक्य) 



🙏 आज का प्रश्न-
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना कब शुरू की गई? ????????????? 






Sunday, July 31, 2022

राजनीतिक विज्ञान 1000+ बहुविकल्पी प्रश्न

1-किस अधिनियम के अंतर्गत भारतीय विधान परिषद को बजट पर बहस करने की शक्ति प्राप्त हुई? 
A-भारतीय परिषद अधिनियम 1861
B-भारतीय परिषद अधिनियम 1892
C-भारतीय परिषद अधिनियम 1909
D-भारतीय शासन अधिनियम 1919


2-संविधान सभा में सदस्यों का चुनाव कैसे हुआ था? 
A-सीधे जनता द्वारा
B-भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नामांकन द्वारा
C-भारतीय राज्यों के शासकों के नामांकन द्वारा
D-प्रांतीय विधानसभा द्वारा

3-किस अधिनियम द्वारा कोलकाता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई? 
A-रेगुलेटिंग एक्ट 1773
B-पिट्स इंडिया एक्ट 1784
C-चार्टर एक्ट 1813
D-चार्टर एक्ट 1833



4-केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना किस अधिनियम के द्वारा हुई? 
A. भारत सरकार अधिनियम 1909
B. भारत सरकार अधिनियम 1919
C. भारत सरकार अधिनियम 1935
D. भारत सरकार अधिनियम 1947

5-किस निर्वाचित संविधान सभा द्वारा सर्वप्रथम भारत के संविधान का निर्माण करने का प्रस्ताव किया गया था? 
A.साइमन कमीशन द्वारा
B.भारत सरकार अधिनियम 1935
C.क्रिप्स मिशनमिशन
D.ब्रिटिश कैबिनेट डेलिगेशन द्वारा

6- राष्ट्रपति को अध्यादेश निर्गत करने की शक्ति किस अधिनियम के द्वारा मिली? 
A.भारत सरकार अधिनियम 1919
B.भारत सरकार अधिनियम 1935
C.भारत सरकार अधिनियम 1909
D.इनमें से कोई नहीं

10-भारत परिषद की समाप्ति किस अधिनियम के द्वारा हुई? 
A.भारत शासन अधिनियम 1909
B.भारत शासन अधिनियम 1919
C.भारत शासन अधिनियम 1947
D.भारत शासन अधिनियम 1935

11-किस अधिनियम के द्वारा भारतीयों को अपने देश के प्रशासन में कुछ हिस्सेदारी करना संभव हुआ? 
A.चार्टर एक्ट 1833
B.चार्टर एक्ट 1853
C.भारतीय शासन अधिनियम 1935
D.भारतीय शासन अधिनियम 1919

12-अखिल भारतीय महासंघ स्थापित करने का प्रावधान शामिल किया गया था? 
भारत सरकार अधिनियम 1935
अगस्त प्रस्ताव 1940
भारत सरकार अधिनियम 1919
कैबिनेट मिशन 1946

13- किस अधिनियम द्वारा संवैधानिक निरंकुशता का सिद्धांत प्रस्तुत किया गया? 
A.भारतीय काउंसिल अधिनियम 1909
B.भारत सरकार अधिनियम 1919
C.भारत सरकार अधिनियम 1935
D.भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947

14- भारत के लिए संविधान की रचना हेतु संविधान सभा का सर्वप्रथम विचार प्रस्तुत किया? 
A.स्वराज पार्टी 1934
B.कांग्रेस पार्टी 1936
C.मुस्लिम लीग 1942
D.सर्वदलीय सम्मेलन 1946

15-भारतीय संविधान सभा की स्थापना कब हुई? 
A.10 जून 1946
B. 9 दिसंबर 1946
C. 26 नवंबर 1949
D. 9 दिसंबर 1946

16- भारतीय संविधान को बनाने हेतु संविधान सभा के कितने अधिवेशन हुए? 
A.7
B.9
C.11
D.12

17-1935 के अधिनियम द्वारा स्थापित संघ में अवशिष्ट शक्तियां किसको दी गई थी? 
A. संघीय विधानपालिका को
B. प्रांतीय विधान मंडल को
C. गवर्नर जनरल को
D. प्रांतीय गवर्नर को

18. 1935 के अधिनियम के तहत कराए गए विधानसभा चुनाव में किस राज्य में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त हुआ? 
A.बंगाल 
B. उड़ीसा 
C. बिहार 
D. मद्रास

19. किस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश संसद ने चाय और चीनी के साथ व्यापार को छोड़कर ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिए थे? 
A.चार्टर अधिनियम 1813
B.चार्टर अधिनियम 1833
C.चार्टर अधिनियम 1853
D.चार्टर अधिनियम 1873

20. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा की प्रारूप समिति में कितने अन्य सदस्य थे? 
A. 6 
B. 7 
C. 8 
D. 5

21-1937 के चुनाव के पश्चात यूपी में गठित मंत्रिमंडल में किसको वित्त विभाग दिया गया था? 
A.गोविंद बल्लभ पंत
B. केएन काटजू
C. रफी अहमद किदवई
D. के एम मुंशी

22- डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में प्रारूक समिति का गठन कब किया? 
A.13 दिसंबर 1946
B. 22 जनवरी 1947
C. 3 जून 1947
D. 29 अगस्त 1947

23- किस अधिनियम ने संविधान निरंकुशता के सिद्धांत का अनुमोदन किया? 
A.1919 के अधिनियम द्वारा
B. 1909 के अधिनियम द्वारा
C. 1947 के भारत स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा
D. 1935 के अधिनियम द्वारा


24- डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म और मृत्यु कब हुआ?
A. 1886,1951
B. 1891, 1956
C. 1877, 1961
D. 1889, 1961

25- किस वर्ष में जन गण मन को भारत का राष्ट्रीय गान के रूप में अपनाया गया? 
A.1940
B.1950
C.1946
D.1947

26-भारत की स्वतंत्रता के समय इंग्लैंड में कौन सी पार्टी थी? 
A.कॉन्ग्रेस पार्टी
B. लिबरल पार्टी
C. लेबर पार्टी
D. इनमें से कोई नहीं

27- भारत के स्वतंत्रता के पश्चात प्रथम मंत्रिमंडल में कानून मंत्री कौन थे? 
A.सच्चिदानंद सिन्हा
B.भीमराव अंबेडकर
C.जगजीवन राम
D.बलदेव सिंह 

28- संविधान सभा द्वारा स्थापित मौलिक अधिकार और अल्पसंख्यक हेतु सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे? 
A.पंडित जवाहरलाल नेहरू
B.सरदार वल्लभभाई पटेल
C.भीमराव अंबेडकर
D.जे बी कृपलानी

29- भारत के संघीय न्यायालय की स्थापना कब की गई? 
A.1935 
B. 1936 
C. 1937 
D. 1950

30. वर्ष 1937 के चुनाव में कितने प्रांतों में कांग्रेस का मंत्रिमंडल बना था? 
A. 8
B. 9
C. 10
D. 11



Friday, May 13, 2022

अर्थशास्त्र भाग 1

        ✴️अर्थशास्त्र का सामान्य परिचय✴️
✴️अर्थशास्त्र का पिता एडम स्मिथ को कहा जाता है इन्होंने अपनी पुस्तक द वेल्थ ऑफ नेशन(1776) में अर्थशास्त्र को धन का विज्ञान कहा है यह पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के पक्ष में थे! 
✴️ अर्थशास्त्र का पितामह जांच मेनार्ड केंस कहा जाता है  इनकी पुस्तक द जनरल थ्योरी ऑफ एंप्लॉयमेंट और इंटरेस्ट एंड मनी (1936) थी  इनके अनुसार  पूंजीवादी अर्थव्यवस्था द्वारा समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपने में समाहित करना चाहिए! 
✴️ 1950 में ऑस्कर लांज ने सुझाव दिया कि समाजवादी अर्थव्यवस्था को पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के अच्छे तत्वो को अपने में समाहित करने चाहिए! 
✴️ समाजवादी अर्थव्यवस्था केंद्रीकृत अर्थव्यवस्था होती है जिसे सर्वप्रथम 1917 में सोवियत संघ ने अपनाया था! 
✴️ समाजवादी अर्थव्यवस्था का पहला मत दास कैपिटल में कॉल मार्स ने दिया! 
✴️ प्राथमिक क्षेत्र में सर्वाधिक श्रमिक होते हैं हित में कार्य करने वाले श्रमिकों को रेड कॉलर जॉब कहते हैं! यह किसी क्षेत्र पर आधारित होता है! 
✴️ द्वितीय क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है जिसमें कार्य करने वाले श्रमिकों को ब्लू कॉलर जॉब कहते हैं! यह औद्योगिक क्षेत्र पर आधारित होता है! 
✴️ तृतीय क्षेत्र को सेवा का क्षेत्र कहते हैं इस में कार्य करने वाले श्रमिकों को व्हाइट कॉलर जॉब के अंतर्गत रखा जाता है! 
Note- द्वितीयक क्षेत्र के कुशल श्रमिकों को भी व्हाइट कॉलर जॉब के अंतर्गत रखा जाता है! 
✴️ पूंजीवादी अर्थव्यवस्था बाजार की शक्ति अर्थात मांग  तथा पूर्ति पर आधारित होती है! 
✴️ वाशिंगटन समिति का संबंध विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति को सुधारने से है इसे यह नाम अमेरिका के अर्थशास्त्री जॉन विलियमसन ने 1989 में दिया था इसकी कमियों को दूर करने के लिए जोशुआ कुपर रेमो द्वारा 2004 में ब्राजील समिति का प्रस्ताव पारित किया! 

Wednesday, May 4, 2022

उत्तराखंड के 2100 महत्वपूर्ण प्रश्न संग्रह-

            ✴️उत्तराखंड 2100 प्रश्न संग्रह✴️
1.हल्द्वानी में 1955 में टाउन एरिया कमेटी की स्थापना की! 
2.हल्द्वानी नगर पालिका की स्थापना 1897 में हुई! 
3.22 मई 2011 को हल्द्वानी नगर को निगम का दर्जा प्राप्त हुआ! 
4.कैचुलीं मंदिर नैनीताल जनपद में स्थित है! 
5.नैनीताल के रानीबाग में चित्रश्वर गुफा/सिला है! 
6 भक्ति धाम नकुचियाताल के पास है  इसकी स्थापना मौनी माई  (बसंती) ने की थी! 
7.बद्रीनाथ व केदारनाथ की पैदल यात्रा करने वाला प्रथम यूरोपियन पी.बैरन था! 
8.घोड़ाखाल में सैनिक स्कूल की स्थापना 21 मार्च 1966 को जयमाल सिंह ने की! 
9.रामगढ़ को फलोद्यान का देश कहा जाता है यहां पर गागर नामक स्थान भी है जो गर्ग ऋषि की तपस्थली है! 
10.रामगढ़ में ही महादेवी वर्मा ने मीरा कुटिया बनाई थी! 
11.गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर 1913 तक रामगढ़ एलन गार्डन में रहे! 
12.तालो का ताल  नलपाल अर्थात कमलताल को कहा जाता है! 
13.लैण्डस एंड नैनीताल का एक पर्यटक स्थल है जहां से खुरपाताल दिखता है! 
14.कालाढूंगी को नया हल्द्वानी कहते हैं जो वोर नदी के तट पर है! 
16.कार्बेट फॉल कालाढूंगी में स्थित है! 
17.भीमताल झील का सर्वेक्षण 1871 में डॉक्टर एम्सवरी ने किया था! 
18.सातताल अश्व के खुर के समान है!
19.नलदमयंती ताल पांच कोनो वाला ताल है! 
20.लोखाम देवता मंदिर ओखल कांडा में किसी के पास लोखामताल तथा हरीश ताल है! 
21.सत्कुमार सरोवर नकुचियाताल को कहते हैं! 
22. सन 1912 ईस्वी में टीवी रोग के लिए टीवी सेनिटोरीयम खोला गया जिसकी स्थापना किंग जॉर्ज एडम सप्तम ने की! 
22.राजकीय वेधशाला की स्थापना 20 अप्रैल 1954 को वाराणसी में हुई इसे 1955 में नैनीताल लाया गया और 1961 से यह मनेरा पिक पर स्थित है! 
23.डोरो थी सीट  टिफिन टॉप का नाम है जो नैनीताल में है! 
24.1993 में यशोधर मठपाल ने खुटानी में लोक संस्कृति संग्रहालय की स्थापना की! 
25.ककड़ीघाट कोसी तथा सीरता नदी के संगम पर है यहीं पर कर्कटेश्वर महादेव मंदिर है! 
26. गुफा महादेव मंदिर नैनीताल के कृष्णापुर क्षेत्र में कृष्णा शाह ने बनाया था! 
27. हनुमानगढ़ी की स्थापना 1940 में बाबा नीम करौली ने की थी! इसी के पास लीलाशाह आश्रम भी है! 
28.चीना बाबा मंदिर,केब गार्डन नैनीताल में स्थित है! 
29.मैथोडिस्ट चर्च की  नींव 1858 में  पडी  पर यह अस्तित्व में 1860 में आया! पादरी विलियम बटलर ने यहां गिरजाघर बनाया था! 
30.1890 ईस्वी में नैनीताल में  एल्फेड विल्फोर्ड निकोलस चर्च की नींव रखी जो बनकर 1896 में तैयार हुई! 
31.किलवरी नैनीताल की एक चोटी है! 
32. सेंट्रल जोन्स चर्च एक प्राचीन स्मारक है जो 2 अप्रैल 1848 को खोला गया! 
33. हिडिंबा पर्वत नैनीताल में स्थित है तथा हिडिंबा मंदिर चंपावत में स्थित है! 
34. नैनीताल का उपनाम नयनशार भी है! 
35. हिमालय संग्रहालय की स्थापना 2005 में कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल में हुई! 
36. तितली संग्रहालय नकुचियाताल के पास स्थित है! 




Monday, May 2, 2022

संघीय कार्यपालिका राजनीति विज्ञान भाग 10

                    ✴️संघीय कार्यपालिका✴️
संघीय कार्यपालिका का वर्णन संविधान के भाग 5 के अनुच्छेद 52 से 78 तक किया गया है इसके अंतर्गत राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल तथा महान्यायवादी शामिल है! 
✴️राष्ट्रपति-
⚫अनुच्छेद 52 के तहत भारत का 1 राष्ट्रपति होगा! 
⚫ अनुच्छेद 53 के तहत यह कार्यपालिका की शक्ति इस पर नहीं तो होगी तथा यह तीनों सेनाओं का प्रमुख होगा! 
⚫ अनुच्छेद 54 में राष्ट्रपति के निर्वाचन का वर्णन किया गया है! 
⚫ अनुच्छेद 55 के तहत राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति है जिसमें यह पता चलता है कि राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से अनुपाती प्रतिनिधि प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति से गुप्त मतदान द्वारा होगा! 
नोट- डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का चुनाव संविधान सभा द्वारा हुआ! 
अनुच्छेद 56 के तहत राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष तथा उपराष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र देगा! 
⚫ अनुच्छेद 57 के तहत राष्ट्रपति कार्यकाल खत्म होने के बाद फिर से पुनः निर्वाचित हो सकता है! 
⚫ अनुच्छेद 58 में राष्ट्रपति बनने के लिए मुख्य शर्ते हैं! 
⚫ अनुच्छेद 59 में राष्ट्रपति बनने के लिए प्रमुख योग्यताओं का वर्णन है! 
⚫ अनुच्छेद 60 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या उसकी अनुपस्थिति में वरिष्ठ न्यायाधीश शपथ दिलाएगा! 
⚫ अनुच्छेद 61 में  राष्ट्रपति पर महाभियोग प्रक्रिया है जो संसद के किसी भी सदन में हो सकती है! 
⚫ अनुच्छेद 71 के तहत राष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधित विवाद उच्चतम न्यायालय हल करेगा 
⚫ अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को क्षमादान का  अधिकार है! 
⚫ अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सिफारिश पर मंत्रिमंडल का निर्माण करेगा! 
⚫ अनुच्छेद 75 के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करेंगा! 
⚫ अनुच्छेद 77 के तहत भारत सरकार के सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम पर किए जायगे! 
⚫ अनुच्छेद 79 के तहत  राष्ट्रपति संसद का एक अंग होगा! 
⚫ अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत कर सकता है! 
नोट- राष्ट्रपति अनुच्छेद 331 के तहत लोकसभा में दो एंग्लो इंडियन सदस्य को मनोनीत कर सकता है! 
⚫ अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति सदनों की बैठक बुलाता है संबोधित करता है और संसद को शुरू कर सकता है और विघटित कर सकता है! 
नोट- अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाता है परंतु इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है! 
⚫ अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति नए चुनाव के बाद प्रत्येक वर्ष संसद के प्रथम अधिवेशन को संबोधित करता है! 
⚫ अनुच्छेद 111 में राष्ट्रपति के पास पॉकेट वीटो शक्ति है जिसका प्रयोग सर्वप्रथम 1986 में सबसे युवा राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी ने किया!  यह पॉकेट वीटो का संबंध डाक विभाग से था! 
⚫ अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है परंतु यह संयुक्त बैठक धन विधेयक संबंध में नहीं होगी! 
⚫ अनुच्छेद 109 के तहत धन विधेयक प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की अनुमति लेना अनिवार्य है! 
⚫ अनुच्छेद 117 के तहत राष्ट्रपति  वित्त विधेयक संबंधित शक्ति अभी प्राप्त है! 
⚫ अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है! 
⚫ अनुच्छेद 143 के तहत न्यायाधीशों से परामर्श का अधिकार भी राष्ट्रपति को है! 
⚫ राष्ट्रपति अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन और अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल लगा सकते हैं! 

Friday, April 29, 2022

डीडी शर्मा उत्तराखंड ज्ञानकोष

अंगारी मठ- यह सिद्धपीठ टिहरी जनपद में स्थित है! 
अंचल विवाह- इसमें वर एवं वधू के कंधों पर डाले गए आचलो के कोनो को बाध कर उनमे गांठ लगाकर फेरे लिए जाते हैं! 
अप्सरा ताल- यह ताल टिहरी जनपद में स्थित है! 
अकता(इकता) - यह भू व्यवस्था का एक कर था! 
अंकितरि- जौनसार भाबर क्षेत्र में भेड़ पालको के रक्षक देवता है! 
अकर- कृषि योग्य भूमि को कहा जाता है जो राज्य की ओर से व्यक्ति विशेष को राजस्व मुक्त रूप में प्रदान की जाती है! 
अख्वाडी- कुमाऊं क्षेत्र में मक्के का नमकीन दलिया
अखिलतरणी मंदिर- खिलपति या उग्रतारा मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है यह मंदिर लोहाघाट (चंपावत) में है! 
अगस्तमुनि- यह मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है यहां पर बड़ी गद्दी को राम का सिहासन कहा जाता है ऐसी दो गद्दी है यहीं पर योगादित्य मंदिर भी है! 
अजयपाल- इन्होंने गढ़वाल का एकीकरण किया था और प्रथम राजा थे जिन्होंने कुमाऊं पर आक्रमण किया था!  इन्हें उत्तराखंड का नेपोलियन और बिस्मार्क कहा जाता है! 
अटारिया देवी मंदिर- इस मंदिर का निर्माण चंद्र राजाओं के समय हुआ था! 
अनुसूइया मंदिर- यह मंदिर कत्यूरी शैली का चमोली जनपद में स्थित है! 
अट्टटा सट्टा- यह एक विवाह पड़ता है जिसे श्वर सांटो भी कहा गया है जो विनिमय विवाह है ! 
अठवाड- उत्तराखंड में बली पूजा का एक रूप है! 
अणवाल- धारचूला पिथौरागढ़ में एक जनजाति का कार्य है  पशुओं की देखभाल करना
अन्यारी देवता- जौहर क्षेत्र पिथौरागढ़ में यह मंदिर स्थित है
अपरहण विवाह- उत्तरकाशी की जाड जनजाति में यह विवाह प्रचलित है! 
कलमटिया पहाड़ी- अल्मोड़ा का कसार देवी मंदिर इसी चोटी पर स्थित है! 
अष्ठाव्रक महादेव मंदिर- यह मंदिर पौड़ी के खिरसू में स्थित है! 
अस्कोट- यह अभय पाल ने बसाया था! 
अच्छा/अस्के- यहां एक खाद्य पदार्थ है! 
आदित्य महादेव मंदिर- यह मंदिर चंपावत जनपद में है! 
आदि केदार- यह चमोली जनपद में है! 
आदि बद्री- यह चमोली में स्थित है यहां से उत्तर नारायण गंगा (दुधातोली) निकलती है! 
लठमार मेला- यहां मेला आदि बद्री में लगता है परंतु लठमार होली मथुरा में होती है! 
आलम- भोज वृक्ष का कटा हुआ तना! 
आलम सैन्यो चुमौ- यह उत्सव धारचूला पिथौरागढ़ में हर 12 वर्ष में मनाया जाता है! 
इंडरा- यह एक भोज व्यंजन है! 
इंजरान/इरन- यह एक बंजर भूमि होती है! 
इंद्रकिल पर्वत- जहां पर्वत टिहरी जनपद में स्थित है
उखलभेद- तंत्रिका अनुष्ठान
उजयाली देवी मंदिर- यह मंदिर द्वाराहाट अल्मोड़ा में स्थित है!. 
वरिष्ठ गुफा- यह गुफा रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है
कोटेश्वर गुफा- यह गुफा उत्तरकाशी जनपद में स्थित है! 
ष्यम्बक गुफा- द्वाराहाट अल्मोड़ा मैं यह गुफा स्थित है
गोरखनाथ गुफा- यह गुफा पौड़ी जनपद में स्थित है
कपरकोट गुफा-  यह गुफा अल्मोड़ा जनपद में स्थित है! 
कुचियादेव उड्यार- यह गुफा मंदिर है जो पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है! 
उखीमठ- जब केदारनाथ के द्वार शीतकाल में बंद हो जाते हैं उनकी डोली उठी मटके ओंकारेश्वर मंदिर में रखी जाती है  इसके अतिरिक्त शीतकाल में मद्महेश्वर की मूर्ति भी उत्सव के साथ यहीं पर रखी जाती है
उधम सिंह नगर- चंद्र शासकों के समय इस स्थान को नौलखा माल चौरासीकोस तल्लादेश कहा जाता था अभी इसे कुमाऊ का अन्न भंडार कहा जाता है
एक हथिया देवाल- पिथौरागढ
एक हथिया नौला-  चम्पावत
एकेश्वर महादेव मंदिर- पौडी
भेलछडा  जलप्रपात- पिथौरागढ़
एगास- यह एक पशु उत्सव है
माउंट एबॉट- यह लोहाघाट चंपावत में स्थित है यहां सर्वप्रथम ऑस्ट्रेलिया निवासी सर एवर्ट ने अपना निवास स्थान बनाया था! 
एलरमाठी की मार- जौनसार बावर क्षेत्र देहरादून में दशहरे के दिन मनाया जाने वाला एक उत्सव है! 
ऐडी(अहेडी) - यह पशु चारक वर्ग के देवता है! 
कस्तूरी मृग विवाह- यह पिथौरागढ़ में देखने को मिलता है! 
ऐडीधुरा मंदिर- यहां चंपावत में स्थित है! 
औसर- चमोली का एक नृत्य है
ओडाल प्रथा- यह एक वैवाहिक प्रथा है
कुबेर पर्वत- यह पर्वत चमोली जनपद में स्थित है यहां से अलकनंदा की सहायक नदी कंचनगंगा निकलती है
कंडार देव मंदिर- उत्तरकाशी जनपद
कंस मर्दिनी शक्तिपीठ- पौड़ी जनपद
कोटरा दुर्ग प्रसाद- यह एक महल है जो  काशीपुर में स्थित है! 
कठपुडिया या कठपतिया देवी- यह शौका जनजाति की देवी है इसका ना कोई मंदिर है ना मूर्ति ना पूजा
कठाले- घर जमाई का मित्र घर में रह सकता है जौनसार बावर क्षेत्र में इसे कठाले कहते हैं! 
कठैतगर्दी- गढ़वाल के इतिहास में पांच भाई कठैतो के अत्याचार को कठैतगर्दी कहा जाता है उत्तराखंड के इतिहास में! 
कपिलेश्वर मंदिर- यह मंदिर कुमिया व सकुनी नदी के संगम में अल्मोड़ा जनपद में स्थित है! 
कमीण- राजस्व अधिकारी को
करकोटक नाग मंदिर- भीमताल के पांडे गांव में
करगैत मंदिर- बद्रीनाथ मंदिर के लिए यह प्रसिद्ध मंदिर अल्मोड़ा जनपद में स्थित है
कर्ण देवता मंदिर- उत्तरकाशी
कर्मान्त- कत्यूरी प्रशासन मे तहसील स्तर की प्रशासन इकाय जिस का उल्लेख धुतीवर्मन तथा सुमिक्षराज के  ताम्रपत्रों में किया गया! 
करवीरपपुर- यह भी कत्यूरी प्रशासन की एक इकाई थी जिसका वर्णन धुतीवर्मन के तलेश्वर ताम्रपत्र में मिलता है
कलियर शरीफ- यह रुड़की में स्थित है हजरत मोहम्मद अलाउद्दीन अली अहमद साबिर की दरगाह है
कवल्लीकुर्मो- कुमाऊं के दारमा आर्थिक दंड सूचक शब्द है! 
कव्वालेख - यह बागेश्वर जनपद में स्थित है! यहां पर हजारों कौवे के पंख दिखते हैं
कंसेरी- यहां उत्तराखंड का एक वाद्य यंत्र है
काकभुसंडीताल- इसका आकार अर्धचंद्राकार है इस साल के विषय में यह कथा प्रचलित है यहां सारे कौवे अपना शरीर त्याग दें! 
काजा- जौनसार बावर क्षेत्र में महिलाओं के सौंदर्य प्रशासन की विद्या है जिसमें लड़की अपने शरीर पर सुई से टैटू गुदवाती है! 
गुलाब घाटी- काठगोदाम को गुलाब घाटी कहा जाता है! 
कार्तिकेय मंदिर- क्रौंच पर्वत रुद्रप्रयाग में यह मंदिर स्थित है यही हरियाली देवी मंदिर और कंडोलिया देवता मंदिर भी है! 
हेली नेशनल पार्क- इस पार्क की स्थापना 1936 में हुई थी इसका नाम संयुक्त प्रांत अवध के तत्कालीन राज्यपाल सर जॉन मैकलन हैली के नाम पर रखा गया था! 
कालकुट- कालसी का प्राचीन नाम कालकूट था जो कुणिंदो की राजधानी थी कालसी में अशोक के अभिलेख की खोज 1860 में फॉरेस्टर ने की थी! 

कालसिन मेला- यहां मेला चंपावत में लगता है
कालाढूंगी- यह नगर बोर नदी के तट पर है
कालामुनि पहाड़- यह पहाड़ पिथौरागढ़ में स्थित है! 
काशीपुर- बाज बहादुर चंद्र के समय 1640 में इनके अधिकारी काशीनाथ अधिकारी ने इसकी स्थापना की थी 1803 ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र पर ले लिया था! 
बाला सुंदरी मंदिर- यह मंदिर काशीपुर में स्थित है इसे उज्जैनी देवी मंदिर भी कहते हैं
कीमोद- जौनसार बावर का एक उत्सव है
किरजी- कंडाली महोत्सव के नाम से इसे जाना जाता है यह पिथौरागढ़ की चौदास घाटी में होता है  इसमें नृत्य करते समय युवा और प्रौढ महिलाएं भाग लेती है! 
किलकेलेश्वर महादेव मंदिर- यह मंदिर श्रीनगर पौड़ी जनपद में स्थित है
कीर्ति नगर- शहीदी नगर के नाम से इसे जाना जाता है  इसकी स्थापना 1896 में कीर्ति शाह ने की थी! 
कुकुछिना- यह गुफा अल्मोड़ा में स्थित है! 
कुकुरालो- यहां चंद्र वंश के समय एक टेक्स था जो बाज बहादुर चंद्र के समय शुरू हुआ था! 
कटकु (पढवा) -  यह कुमाऊं मंडल की एक वीरगाथा है कटकु  नौला पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है! 
बाबा कालू सैय्यद- बीड़ी वाले बाबा के कहा जाता है यहां प्रसाद के रूप में बीड़ी दी जाती है! 
कुत- चंद्र कालीन भू व्यवस्था के अंतर्गत नगद के बदले अन्न दिया जाने वाला कर कुत कहलाता था! 
कुजांपुरी देवी- टिहरी
कुटेटी देवी- उत्तरकाशी के वर्णावत पर्वत पर यह मंदिर है इसे ऐरासु गढ कहा जाता है! 
कुण्डाखाल प्रथा- यहां भोटिया तथा तिब्बत व्यापारियों की गमय्या प्रथा है! 
कुमाऊं- चंद्रवरदाई के पृथ्वीराज रासो ग्रंथ में इसको कुमाऊं गढ़ कहा गया है इसका पूर्वांचल नाम सर्वप्रथम राजा कल्याण चंद्र के चंपावत स्थित नागनाथ मंदिर के शिलालेख में पाया गया है रुद्र चांद के नाटक उषा रुद्र गौरेया मे इसे कुर्मागिरी कहा गया है! कुमाऊं शब्द का प्रयोग मुस्लिम इतिहासकार अब्दुल्ला के ग्रंथ तारीखें दाऊदी में दिल्ली के सुल्तान इस्लाम शाह के समय किया गया था 1802 मेला ज्वेलरी ने यहां की वन संपदा एवं जलवायु की जानकारी के लिए मिस्टर गाट को यहां भेजा था! 
1811-12 में मूरक्राट और हेयरसी  भी कुमाऊं के रास्ते तिब्बत गए थे लार्ड हेस्टिंग्स भी गुप्त रूप से सर्वेक्षण पर यहां आया था! 
पशुपति मंदिर- यह मंदिर नेपाल में स्थित है! 
कुमासेण देवी मंदिर- यह मंदिर उत्तरकाशी जनपद में स्थित है
कुम्हडी देवी- यह मंदिर टिहरी जनपद में स्थित है
कुल्लेयवाप- यह कुमाऊं मंडल में रेका शासनकाल में भूमि माप का बोधक है! 
कुस्मांडादेवी- यह देवी मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है! 
केदार गंगा- यह नदी चमोली में बहती है स्वर्गारोहिणी से निकलती है! 
केदारनाथ मंदिर- भगवान शिव के 52 ज्योतिर्लिंगों मे  केवल यही ऐसा है जो शिलात्मक है  यह लिंगात्मक नहीं है  यह मंदिर कत्यूरी शैली मैं नागर शिखर युक्त है! 
कैंची धाम- 15 जून 1976 को जहां पर माता वैष्णो और हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई यह मंदिर बाबा नीम करौली द्वारा बनाया गया! 
कैलाशी या कलावीर- मुस्लिम पीर  या वीर बाबा इनकी आराधना केवल गढ़वाल मंडल में होती है यह टिहरी जनपद में स्थित है! 
छोटा कैलाश धारचूला (पिथौरागढ़) और नैनीताल जनपद में स्थित है
किन्नर कैलाश हिमाचल प्रदेश में स्थित है! 
केलुवा विनायक- यह चमोली जनपद में स्थित है
कोकरसी या कुकरसी- यह जौनसार क्षेत्र के देवता होते हैं और उनकी प्रगति बहुत ही क्रोधित स्वभाव की होती है! 
कोकीलादेवी- पिथौरागढ़ में स्थित है
कोटगाडी देवा- यह मंदिर पिथौरागढ़ में स्थित है
कोटयुला या कोटुली- छोटे आकार के किलो को कोटयूडा कहा जाता है
कोटकांगडा देवी- यह मंदिर द्वाराहाट अल्मोड़ा में स्थित है! 
कोटकीमायी- अल्मोड़ा में कत्यूरी वंश की देवी कोट भ्राभरी देवी के नाम से जानी जाती है! 
कोटवी देवी- पिथौरागढ़ का यह मंदिर असुर कुल से संबंधित यह मंदिर है
कोटाल-  ग्राम प्रधान के अधीन एक कर्मचारी
कोटीप्रयाग- रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है
क्युकालेश्वर मंदिर- यह श्रीनगर पौड़ी के कीकांश पर्वत पर स्थित है! 
क्युसरदेवता मंदिर- टिहरी में स्थित नाग देवता का मंदिर
कोटालगढ- बाणासुर के किले का अन्य नाम है! 
कौसानी- कौसानी को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने का श्रेय रैम्जे साहब को जाता है  कौसानी में गांधीजी की  शिष्या सरला बहन ने कस्तूरबा महिला आश्रम की शुरुआत की थी! 
खडगेश्वर महादेव- पिथौरागढ़ के अस्कोट के रजवार शासक खड्कपाल ने बनाया था
खलियाप्रथा- यहां पर था किसानों के जीवन का एक अंग है! 
खसमंडल- बाराही संहिता व  वायु पुराण में केदारखंड को खसमंडल कहां गया है! 
खसरा या खतौनी- जमीनों से संबंधित जो देखा जो का होता है उसे खसरा कहते हैं
खरसाली- सोमेश्वर देवालय में 5 मंजिला भवन! 
खिचड़ी नृत्य- थारू जनजाति में होली के समय दो नृत्य प्रसिद्ध है होली नृत्य और खिचड़ी नृत्य
सादी होली नृत्य मैं केवल पुरुष स्त्रियों की वेशभूषा में नृत्य करते हैं परंतु खिचड़ी नृत्य में दो पुरुषों के बीच एक महिला या दो महिलाओं के बीच एक पुरुष नृत्य करता है! 
खील/कटिल- यह शब्द बंजर भूमि के लिए प्रसिद्ध है! 
खेल- पिथौरागढ़ का एक लोक नृत्य है! 
गंगनाथ मंदिर- यह  कुमाऊं मुख्य रूप से sc जनजाति के  इष्ट देवता माने जाते हैं! 
गढ़ मुक्तेश्वर - लोहावती व  महाकाली नदी के संगम पर  स्थित है उत्तराखंड के चंपावत जनपद के अंतर्गत यह स्थल आता है भारत में गढ़मुक्तेश्वर नामक स्थल बिजनौर में भी है! 
गणनाथ- यह स्थल अल्मोड़ा जनपद में स्थित है 23 अप्रैल 1815 में हस्तीदल चौथे  को यहां वीरगति प्राप्त हुई यहीं पर हर्ष देव जोशी की भी मृत्यु हुई थी! 
गणेश गंगा- गरुढ हिमानी के नाम से प्रसिद्ध यह नदी चमोली जनपद में है! 
गणयात मेला- जौनसार बावर क्षेत्र का प्रसिद्ध मेला! 
गवलादेव मंदिर- यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है
गर्खो- चंद्र शासन कालीन राजस्व संबंधी एक प्रशासन इकाई थी जिसका प्रधान कोने की कहा जाता था
गमोरी गुफा- पाषाण कालीन यह गुफा चंपावत जनपद में स्थित  है! 
गिर का कौतिक- यह मेला अल्मोड़ा जनपद में लगता है! 
गिरथी गंगा- यह चमोली के किंगरी बिंगरी पर्वत कि पश्चिमी ढाल से निकलती है! 
गुढकेदार का मेला- अल्मोडा
गुणादित्य का मंदिर- यह सूर्य मंदिर अल्मोड़ा जनपद में स्थित है! 
मणिकर्णिका कुंड रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है परंतु मणिकर्णिका घाट उत्तरकाशी जनपद में स्थित है! 
गुरु बेनी-गुरु भाई- चमोली में यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था है  इसका उद्देश्य सामाजिक स्तर पर युवक-युवतियों के बीच भाई-बहन के संबंध को बनाए रखना है! 
गैडागर्दी- कुमाऊ के इतिहास में 720-29 तक का समय गया ड गर्दी के नाम से जाना जाता है इस समय राजा देवी चंद था! 
शोंकर्णेश्वर महादेव मंदिर- यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है
रति कुंड- गोपेश्वर चमोली
गोविषाण- काशीपुर का यह प्राचीन नाम है यहां 1745 में शिवदत्त जोशी ने किला बनाया था 1764 में इनकी हत्या हो गई थी! 
गोरखा किला- यह किला पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है! 
गोरखनाथ धुनी- चंपावत के क्रांतेश्वर पर्वत पर यह धुनी है! 
गौरिल चौड- चम्पावत
गोलदार- राजाओं के रक्षा अधिकारी
गोलक्ष- पौड़ी गढ़वाल
1963 में गोपेश्वर चमोली राजमार्ग को बनाया गया था! 
घटकु देवता- यह मंदिर चंपावत जनपद में है यह भीम पुत्र घटोत्कच का मंदिर इसी के पास इनकी माता हिडिंबा का मंदिर है इसे हिंगला देवी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है! 
Note- हिडिम्बा पर्वत  नैनीताल जनपद में स्थित है
घड़ियाल उत्सव- यह उत्सव तेरी जनपद में होता है
घुनशेरा उत्सव- यह उत्सव पिथौरागढ़ जनपद में होता है! 
घोडाखाल- यह नैनीताल जनपद में स्थित है यहां गोलू देवता का प्रसिद्ध मंदिर है जिसे बाज बहादुर चंद्र ने बनाया था और यहीं पर 21 मार्च 1966 को सैनिक स्कूल की स्थापना की गई थी! 
चण्डाक का मंदिर- यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है इसी के पास मोस्टामानु मंदिर भी है! 
Note- चण्डाक कोट  का किला चंपावत जनपद में स्थित है! 
चंडी  देवी मंदिर- हरिद्वार में नील पर्वत में स्थित इस मंदिर का निर्माण 1866 में जम्मू के राजा सुरचैत सिंह द्वारा कराया गया था 1997 में यहां पर रोपवे की शुरुआत की गई! 
चंद्रकुवंर बतर्वाल- इनके पिता का नाम भोपाली सिंह था उनका जन्म 20 अगस्त 1919 को रुद्रप्रयाग में हुआ! 
चंद्रबदनी मंदिर- चंद्रकुट पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर  टिहरी जनपद में स्थित है जहां किसी देवी की मूर्ति नहीं है! 
चंद्र सिंह गढ़वाली- उनका जन्म 24 दिसंबर 1891 को पौड़ी में हुआ इनके पिता का नाम जाथली सिंह था  लखनऊ जेल में रहते हुए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मार्क्सवाद से प्रभावित हुए थे 26 सितंबर 1941 को एक 11 वर्ष 3 माह 18 दिन के बाद जेल से मुक्त हुए थे 1942 में वर्धा आश्रम (गुजरात)  में श्री देव सुमन उनसे मिले थे! 
17 साल बाद 22 सितंबर 1946 को इन्हें गढ़वाल में प्रवेश करने की अनुमति मिली और वहां सबसे पहले कोटद्वार पहुंचे! 
चम्पूली- यह पूर्वी शौक  जनजाति का लोक नृत्य है
चमदेवल मंदिर- यह मंदिर चंपावत में है
चित्ररेश्वर महादेव मंदिर- यह मंदिर चित्रसिला घाट अर्थात रानीबाग नैनीताल में स्थित है
छिपुलाकोट- यह पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है
छुरमल देवता- यह पिथौरागढ़ की राजी जनजाति के लोक देवता है
जगदीश्वरी या जग्देई मंदिर- यह मंदिर उत्तरकाशी जनपद में स्थित है
जगात- नेपाल सरकार द्वारा चंद्र ठेकेदारों से प्रति जानवर लिया जाने वाला कर था! 
जरीब- अंग्रेजों के समय भू व्यवस्था संबंधित एक भूमि माप कि लोहे की श्रृंखला इस का सर्वप्रथम प्रयोग विकेट द्वारा किया गया इसे विकेट चैन भी कहा जाता है जो 20 गज लंबी थी! 
जाख देवता मंदिर-  रुद्रप्रयाग
जाखनदेवी/यक्षर्णी देवी मंदिर- अल्मोडा
जागेश्वर मंदिर- यह मंदिर आठवीं से 10 वीं शताब्दी के आसपास का है इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी शैली में हुआ है इसी मंदिर मैं हाथ में दीपक लिए हुए राजा दीपचंद्र और उसकी रानी की कास्य मूर्ति है यहां राजा   त्रिमलचंद्र की 40 किलो की रजत मूर्ति थी जो 1968 में चोरी हो गई
जाजलदेवी- यहां मंदिर सिरा क्षेत्र पिथौरागढ़ में स्थित है
जाती मेला- यहां मेला पांडुकेश्वर चमोली जनपद में लगता है! 
जाह्नवी नौला- यह नौला अल्मोड़ा जनपद में स्थित है
जिम कार्बेट- जिम कार्बेट का जन्म 24 जुलाई 1875 नैनीताल में हुआ  इन्होंने बंगाल नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे में नौकरी की तथा 1914 के प्रथम विश्व युद्ध में मेजर के रूप में अफगानिस्तान के सहायता शिविर में कार्य किया था 1928 में यह नगर पालिका परिषद नैनीताल के उपाध्यक्ष भी रहे 19 अप्रैल 1955 को इनका निधन के केन्या हुआ! 
जोश्यानी कांड(1785) - वर्ष 1785 में हर्ष देव जोशी ने जयकृत शाह पर आक्रमण किया था इस घटना को जोश्यानी कांड कहा जाता है इसके बाद 1786 में जयकृत शाह ने आत्महत्या कर ली थी! 
जिया रानी अर्थात मौला देवी- राजा अमर देव पुंडीर की पुत्री जिन्हें कुमाऊ की झांसी की रानी कहा जाता है इनके विवाह का वर्णन सरमन ओकले साहब ने  अपनी पुस्तक हिमालयन फोकलोर में किया है! 
जौलजीवी मेला- विकासखंड डीडीहाट में यह मेला लगता है जिसका प्रारंभ अस्कोट के राजा राजेंद्र बहादुर सिंह ने कराया था! 
ज्युला- अन्य की माप का परिमाण
ज्वाला देवी मंदिर काशीपुर में स्थित है और ज्वालपा देवी मंदिर पौड़ी जनपद में स्थित है! 
झांकर सैंण - यह मंदिर नाग देवता का मंदिर है जो अल्मोड़ा में स्थित है! 
झाल- उत्तराखंड का धातु निर्मित वाद्य यंत्र
झाली माली देवी- यह मंदिर हिडिंबा मंदिर के पास चंपावत में स्थित है इसकी खोज यशोधर मठपाल जीने की! 
झूठा मंदिर- झूमा तथा झूठा मंदिर चंपावत में है परंतु झूला देवी मंदिर रानीखेत अल्मोड़ा में स्थित है! 
टनकपुर-: कुमाऊ का गास्टिगंज कहा जाता है इसकी स्थापना मिस्टर टलक ने की  इसे 1972 में नगरपलिका का रूप दिया गया! 
ट्रेलपास- यहां दर्रा पिथौरागढ़ को चमोली से जोड़ता  इसकी खोज सर्वप्रथम 1830 में कमिश्नर जॉर्ज विलियम ट्रेल ने की! 
टोकरियाँ मेला- यह मेला पिथौरागढ़ जनपद में लगता है! 
डांगबुगडयागंल ताल- सलया देवता  मंदिर यहीं पर स्थित है जहां पत्थर का प्रसाद चढ़ाया जाता है! 
डांडा नागराजा- यह मंदिर पौड़ी जनपद में स्थित है
ढुढेश्वर मंदिर- यह मंदिर टिहरी जनपद में स्थित है! 
तख्त- बुक्सा जनजाति में एक न्याय सकता है
तप्त कुंड- यमुनोत्री उत्तरकाशी में स्थित इस कुंड का सर्वाधिक गर्म है! 
तपोवन- यह उत्तराखंड के 4 जगह में फैला हुआ है ऋषिकेश चमोली पिथौरागढ़ उत्तरकाशी
त्यूनी- पत्थर से बना सिराहना
ताडीखेत- कमला लेख पहाड़ी पर स्थित है यही 1929 में गांधी जी के आगमन पर गाजी कुटिया का निर्माण कराया गया! 
तामाढौन- यह युधिस्टर अल्मोड़ा में स्थित है यहां प्रदीप साह और दीपचंद्र के बीच युद्ध हुआ था
तारा ताल- यह ताल रानीखेत अल्मोड़ा में है
ताडकेश्वर- यह पौड़ी जनपद में स्थित है
तारकेश्वर- यह चंपावत में स्थित है यही सीताकुंड भी स्थित है! 
तिलका देवी मंदिर- यह मंदिर टिहरी जनपद में स्थित है! 
रावण शिला- यह सिला रुद्रप्रयाग में स्थित है रावण माठ भी यही है!. 
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर- इस मंदिर का निर्माण उद्धोत चंद्र ने  अल्मोड़ा में कराया था! 
त्रिपुरा सुंदरी देवालय -यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है! 
तिमुंडिया देवता का नृत्य- यह नृत्य उत्सव जोशीमठ चमोली के नरसिंह मंदिर के प्रांगण में होता है! 
बद्रीनाथ के कपाट खुलने से पूर्व तिमुडिया देवता नृत्य का आयोजन किया जाता है! 
त्रिजुगी नारायण मंदिर- रुद्रप्रयाग बद्रीनाथ में बद्री विशाल के दर्शन उसे पहले जोशीमठ के नरसिंह मंदिर के दर्शन करना आवश्यक माना जाता है इस प्रकार केदारनाथ के दर्शन उसे पहले त्रिजुगीनरायण के दर्शन आवश्यक माने जाते हैं! 
थर- चंद्रवंशी मैं 6 प्रकार के थर नियुक्त किए गए थे- देव देख मेहरा फर्त्याल धोनी करायार
थर्प- कत्यूरी सामंत के प्रशासनिक भवन रजवाड़ों के महल को भी थर्प कहा जाता है! 
भूससेण देवता- थारू जनजाति में भूमि और किसी की रक्षक देवता होते हैं! 
दक्षिण काली देवालय- यह मंदिर चमोली जनपद में स्थित है! 
दामतारो या दामघडी- वधू मूल्य
दिखनौरी प्रथा- थारु में देख दिखावा प्रथा
देवरिया ताल- रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है
देवीधार- चंपावत जनपद में लगता है! 
भारतीय वन्यजीव संस्थान की स्थापना 1982 देहरादून में हुई भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थापना 1767 में हुई जिसे 1942 में देहरादून लाया गया! 
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन की स्थापना 14 अगस्त 1956 को देहरादून में हुई राष्ट्रीय दृष्टि बाधितार्थ संस्थान की स्थापना 1979 देहरादून में हुई
घौंसिहा मंदिर- यह मंदिर चमोली जनपद में है! 
घुरमा देवता- इन्हें वर्षा का देवता कहा जाता है! 
नकुलेश्वर मंदिर- यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है थल केदार पहाड़ी में
नंदा देवी शिखर- 25689 फीट
नठाली- चल अचल संपत्ति
नागथात- इसे वासुकी नाग मंदिर के नाम से जाना जाता है जो देहरादून जनपद में है नागपुर रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है! 
नागफनी- सुशीर वाद्य यंत्र जो पीतल और तांबे से बना होता है! 
नागिनी देवी मंदिर- यहां मंदिर उत्तरकाशी जनपद में स्थित है! 
नागनाथ पोखरी- यह मंदिर क्रोंच से पर्वत रुद्रप्रयाग में स्थित है
नंदा राज जात यात्रा- पहली 1881 दूसरी 1905 तीसरी 1925 और आखिरी 2014
नागार्जुन पर्वत- यह अल्मोड़ा के द्वाराहाट में स्थित है यही विमाण्डेश्वर  महादेव मंदिर भी स्थित है! 
नीलकंठ महादेव मंदिर- पौड़ी के यम्केश्वर विकासखंड में झिलमिल गुफा के पास यह मंदिर स्थित है! 
नलिया आदित्य मंदिर- चंपावत में स्थित है
नैथीनी देवी मंदिर- यह मंदिर अल्मोड़ा जनपद में स्थित है! 
नैनीताल- इसकी को 1841 में पी बैरन ने की  यह पहला विदेशी था जिसने बद्रीनाथ और केदारनाथ की पैदल यात्रा की थी यह कविता पिलग्रिम नाम से लिखता था  1845 में नैनीताल नगर पालिका की स्थापना हुई! 
नौढा कौतिक- यह मेला रुद्रप्रयाग में लगता है जिसे लठमार मेला भी कहा जाता है! 
पंचगंगा- गंगा यमुना अलकनंदा भागीरथी धौलीगंगा पंचगंगा में आती है! 
पटरंगवाली प्रथा- इंद्रचंद के समय चली
प्रतापनगर- इसकी स्थापना 1877 में प्रताप शाह ने की थी
प्लेठी  का सुर्य मंदिर- इसकी स्थापना कल्याण बर्मन ने देवप्रयाग में की थी यह उत्तराखंड का पहला सूर्य मंदिर
पागल नाला- यह नाला चमोली जनपद में स्थित है
पांडुकेश्वर चमोली जनपद में पांडूखोली गुफा अल्मोड़ा जनपद में है
पाथा- अन्न मापने का एक पैमाना
पाली पछाऊ क्षेत्र- द्वाराहाट रानीखेत के क्षेत्र को पाली पछाऊ क्षेत्र कहते हैं! 
पावनेश्वर का सूर्य मंदिर- अल्मोड़ा
पिंडारी ग्लेशियर- यह ग्लेशियर बागेश्वर जनपद में है जिसकी खोज 1846 मेंडेन की! 
पिथोरागढ- इसकी स्थापना  कत्यूरी राजा पिथौरा शाही ने की  इसकी स्थापना लगभग 1398 ईस्वी में हुई! 
पिंगनाथ- बागेश्वर अल्मोड़ा
पीपलकोटी- चमोली में अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा के संगम में बसा है! 
पिनाकेश्वर मंदिर- इस मंदिर का निर्माण बहादुर चंद ने किया था
पुंगेश्वर महादेव मंदिर- यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है
पुष्ठि देवी मंदिर- यह मंदिर अल्मोड़ा जनपद में हैं जहां प्रसाद को ग्रहण नहीं किया जाता है! 
फडकानौली- इन शैल चित्रों की खोज यशोधर मठपाल ने अल्मोड़ा में की! 
फतेह पर्वत- उत्तरकाशी में टोंस नदी के किनारे स्थित है! 
फिक्कवाल- यह प्रथा ज्योतिष के आधार पर हाथ देखना होती है! 
फूलों की घाटी- फूलों की घाटी की खोज सिडनी निवासी फ्रैंक स्माइथ ने1931 मे की थी  1939 में लंदन निवासी जवान मार्गरेट लैलिन यहां पर चल कर मर गई
फेनीनाग- यह नाग देवता मंदिर बागेश्वर में स्थित है! 
फेराभात- चंद्रवंशी के समय कर्मचारियों के खाने पीने के लिए दिया जाने वाला कर
फैला देवता-मारछा  जनजाति की प्रमुख देवता है जो चमोली में निवास करते हैं
बग्वालीपोखर- क्या अल्मोड़ा में स्थित है 
❤बाज बहादुर शाहजहां की सेना में भर्ती हो गए थे बाज बहादुर ने कवि अनंत देव को आश्रय दिया था स्मृति कौस्तुभ अनंत देव की रचना है
लोकपाल झील- इस ताल की खोज सोहन सिंह ने 1936 में की
हंदिया नृत्य- जौनसारी जनजाति में बूढ़ी दिवाली के अवसर में किया जाने वाला नृत्य
सेलकु उत्सव- यह उत्सव उत्तरकाशी में होता है! 
सेरा/सेरी- कृषि भूमि
सूर्या देवी मंदिर- तराई भाबर की रक्षक देवी सूर्या देवी का मंदिर नैनीताल में है! 
सीमार- ऐसी जलीय भूमि जो किसी योग्य नहीं हो! 
सातो आठो महोत्सव- पिथौरागढ़
सलिया देवता- यह मंदिर टिहरी जनपद में स्थित है
शिव प्रयाग- अलकनंदा और खाडव नदी के संगम में यह प्रयाग चमोली जनपद में है! 
सूर्य प्रयाग- मंदाकिनी और अलसतरंगिनी नदियों के संगम में यह प्रयाग चमोली जनपद में है! 
मलकटिया देवी- यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में
मासी का मेला- यह मेला अल्मोड़ा जनपद में लगता है जहां सामूहिक रूप से मछली मारने की कला का प्रदर्शन किया जाता है! 
मायावती आश्रम- 1901 में स्वामी विवेकानंद यहां आए थे इसकी स्थापना का श्रेय कैप्टन सैवियर को जाता है  आरंभ में इसे मेंबाट कहा जाता है! 
मनीला देवी मंदिर- रानीखेत अल्मोड़ा में
बाबा मनिक नाथ मंदिर- तेरी जनपद में
लंढौर बाजार- 1828 मसूरी
मसूरी- 1823 में कैपिटल यंग और एफ जे शोर यहां आए थे  मसूरी को विकसित करने का श्रेय सर्वाधिक जॉन मैककिनन को जाता है! 
शिवलिंग शिखर- यह उत्तरकाशी जनपद में स्थित है
मल्लिकार्जुन और मलिका देवी मंदिर- यह दोनों मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है और अल्मोड़ा जनपद में भी! 
मनीभदू- तोरछा और  मारछा  जनजाति के देवता
मढ. का सुर्य मंदिर- यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है
मंझरा- थारू जनजाति की जाति पंचायत
मंजूघोष  मंदिर- यह मंदिर पौड़ी जनपद में स्थित है
मक्कुमठ- शीतकाल में जब जब तुंगनाथ के कपाट बंद हो जाते हैं तो उनकी डोली मक्कुमठ में रखी जाती है! 
भोटिया- इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग विलियम ट्रैल के शासनकाल में किया गया! 
भीलेश्वर मंदिर- टिहरी
भाटकोट का किला- पिथौरागढ़ जनपद में स्थित है
भवाली- रविंद्र नाथ टैगोर ने गीतांजलि यही लिखी थी! 
बौराडी या बौराणी- यह मेला पिथौरागढ़ में लगता है इसे जुआ मेला आया धुत कीड़ा मेला भी कहते हैं! बेकर- चंद्र वंश के समय लिया जाने वाला भूमि करता
बाला सुंदरी मंदिर- यहां मुगल शैली का मंदिर है जिसे औरंगजेब ने बनाया था
बूढ़ी दिवाली- दिवाली से 11 दिन बाद मनाई जाने वाली दिवाली! 
विष्ठाली- इस कचहरी का निर्माण शक्ति गुसाई ने किया था जिसे उत्तराखंड का धृतराष्ट्र कहा जाता है !