सड़क परिवहन
*उत्तराखंड में कुल यातायात में सड़क यातायात का भाग 85 % से अधिक है , कुल सड़क परिवहन में से 80 प्रतिशत निजी वाहन है।
*पर्वतीय भौतिक संरचना के कारण उत्तराखंड के लगभग 40 प्रतिशत भू-भाग पर सड़कों का विकास अभी तक नहीं हो पाया है। उत्तराखण्ड के गठन के समय उत्तराखण्ड में 9 राष्ट्रीय राजमार्ग थे लेकिन फिर 5 नए राष्ट्रिय राजमार्ग घोषित करने के बाद इनकी संख्या 14 हो गयी थी। लेकिन अब 7 और राष्टीय राजमार्ग बनने से अब इनकी संख्या 21 हो गयी है।इनकी कुल लम्बाई 2954.10 किमी. है।
राज्य के गढ़वाल मंडल में सड़कों की लंबाई कुमाऊं मंडल से ज्यादा है।सबसे अधिक सड़को का विस्तार गढवाल मंडल में है।
कुल राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) उनमें से 1376 किलोमीटर का रख-रखाव सामाजिक निर्माण विभाग (Social Works Department) और शेष का रखरखाव सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation) करता है।
सड़कों के निर्माण व संरक्षण में सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation), (D.G.B.R), लोक निर्माण विभाग (P.W.D), वन विभाग (Forest Department), जिला परिषद (District Council) एवं नगर पालिका आदि संस्थाएं योगदान करती है।
अब all weather road बनने के कारण कुछ सड़को के नाम बदले गए है।
. बद्रीनाथ धाम -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 से जुड़ा है।
(अब हो जायेगा- NH 7 )NH 58 के नाम से पहचान रखने वाले ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को अब NH 7 के नाम से जाना जायेगा।
. केदारनाथ -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 109 पर स्थित है।
(अब हो जायेगा- NH 107 )NH 109 के बजाय अब NH 107 के नाम से पहचाना जायेगा। रुद्रप्रयाग - गौरी कुंड
. गंगोत्री -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 108 पर स्थित है।
(अब हो जायेगा- NH 34 ) धरासू- गंगोत्री
. यमुनोत्री -राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 94 पर स्थित है।
(अब हो जायेगा- NH 134 ) ऋषिकेश -यमनोत्री
. उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग 58 है (380.80किलोमीटर)। यू.पी. बार्डर से मंगलौर रूढ़की हरिद्वार ऋषिकेश शिवपुरी देवप्रयाग श्रीनगर खंकरा रुद्रप्रयाग कर्णप्रयाग चमोली जोशीमठ बद्रीनाथ माणा तक
. सबसे छोटा राष्ट्रीय राजमार्ग 72 A है जिसकी लंबाई उत्तराखंड में लगभग 7.5 किलोमीटर है।छुटमलपुर-देहरादून तक।
. चारों धाम को 12 महीने सुरक्षित रुप से जोड़ने वाली चार धाम सड़क परियोजना इसकी लंबाई 900 किलोमीटर है वर्तमान में निर्माणाधीन है इसकी कुल लागत 12000 करोड रुपए है इस परियोजना के तहत पुल, बाईपास और टनल के द्वारा मजबूत और अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर आधारित राजमार्ग द्वारा चार धाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और यात्रा अनुकूल बनाया जाएगा। जिससे उत्तराखंड में मौजूद पर्यटन की अवसरों का उचित दोहन हो पाएगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
टिहरी गढ़वाल जिले में पांच सड़कों वाला चौराहा स्थित है।
त्यूनी देहरादून से लोहाघाट चंपावत को जोड़ने वाली 659 किलोमीटर लंबी दो लाइन वाली परियोजना "हिमालयन हाईवे "वर्तमान में निर्माणाधीन है।गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना 1941 में कोटद्वार में हुई इसका एक कार्यालय ऋषिकेश में भी है।
कुमाऊं मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना 1939 में काठगोदाम में हुई थी इसका कार्यालय रामनगर तक टनकपुर में है।
गढ़वाल मोटर यूजर्स कोआपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसाइटी लिमिटेड की स्थापना 1958 में रामनगर में हुई।
राज्य सड़क परिवहन के अधिकांश भाग पर गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड, गढ़वाल मोटर यूजर्स को-ऑपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसायटी लिमिटेड, टिहरी गढ़वाल मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड, कुमाऊ मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड तथा सीमान्त सहकारी संघ आदि निजी कंपनियों का विस्तार है।
गढ़वाल मोटर आनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना 1941 में कोटद्वार (पौड़ी) में हुई थी। इसका एक कार्यालय ऋषिकेश में भी है।
कुमाऊं मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना सन् 1939 में काठगोदाम में हुई थी। इसका कार्यालय रामनगर तथा टनकपुर में है।
रेल परिवहन
.पर्वतीय भौगोलिक संरचना के कारण प्रदेश में रेल पत्र का विस्तार बहुत कम है लगभग 345 किलोमीटर।
उत्तराखंड में 6 जिलो हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, उधमसिंह नगर , नैनीताल और चम्पावत में ही रेल परिवहन की सुविधा उपलब्ध है।
.राज्य में छोटे बड़े कुल 41 रेलवे स्टेशन है।
उयतराखंड के 6 जिलों में सर्वाधिक रेलपथ वाला जिला हरिद्वार तथा सबसे कम रेलपथ वाला जिला पौड़ी गढ़वाल है। पौड़ी का एक मात्र रेलवे स्टेशन कोटद्वार है।
उत्तराखंड में बिछाई गई प्रथम रेल लाइन रामपुर से किच्छा से लाल कुआं से काठगोदाम है जो 1884 से परिचालन में है।
देश की प्रथम मालगाड़ी रूडकी से PIRAN कलियर 1851 चली थी
देश में पहली बार रेल के सफर की शुरुआत 16 अप्रैल, 1853 से मानी जाती है, जब मुंबई से थाणे के बीच पटरियों पर दौडी थी। लेकिन हकीकत यह है कि भारत में रेल सबसे पहले 22 दिसंबर, 1851 को चली थी। तब रेल (मालगाड़ी) ने रुड़की से पिरान कलियर तक करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय की थी।
हरिद्वार से कानपुर के बीच पांच सौ किलोमीटर लंबी गंग नहर बनाने वाले तत्कालीन इंजीनियर कर्नल प्रोबी टी कॉटले ने गंगनहर पर लिखी अपनी रिपोर्ट "रिपोर्ट ऑन द गंगनहर कैनाल वर्क्स" में इसका वर्णन किया है। यह रिपोर्ट आज भी रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की सेंट्रल लाइब्रेरी में मौजूद है।
देहरादून रेलवे स्टेशन मार्च 1900 में स्थापित किया गया। यह उत्तर रेलवे का सबसे आखिरी रेलवे स्टेशन है।
देहरादून, रायवाला, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर, रामनगर, रुद्रपुर, किच्छा, लालकुआं, हल्द्वानी, काठगोदाम तथा टनकपुर आदि राज्य के प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जिनसे यात्री एवं माल का परिवहन होता है और इनमे टनकपुर (चंपावत) को छोड़कर सभी बड़ी रेल लाइनों के टर्मिनल स्टेशन है। टनकपुर (चंपावत) छोटी रेल लाइन का टर्मिनल स्टेशन है।
यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ एवं बदरीनाथ को 12 महीने चलने वाले चौड़े राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पर काम शुरू होने के बाद यहाँ के चारों धाम को रेललिंक से जोड़ने का परियोजना प्रस्तावित है जिसका सर्वेक्षण कार्य जारी है।
इस परियोजना के अंतर्गत रेल लाइन बिछाने के अलावा भूस्खलन एवं पर्यावरण बचाव पर भी काम किया जायेगा.
हवाई सेवा
राज्य के प्रमुख हवाई अड्डे निम्नलिखित है
1-दून (जौली ग्रान्ट ) हवाई अड्डा – देहरादून
*देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जाना जाएगा।
2-पंतनगर (फूलबाग) – उधम सिंह नगर
3-नैनी सैनी – पिथोरागढ़
4-गौचर – चमोली
5-चिन्यलिसैण – उत्तरकाशी
*नैनी-सैनी एयरपोर्ट को ATR-72 के विमानों के परिचालन लायक बनाया जा रहा है।
*पंतनगर को कार्गो एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है।
*जॉली ग्रांट हवाई अड्डे को विस्तृत कर बोइंग और एयरबस उतारने लायक बनाया गया है।
*देहरादून-नई दिल्ली के बीच नियमित वायु सेवा प्रारंभ की गई है।
*गोचर में स्थित गोचर हवाई अड्डे को हेलीकॉप्टर सर्विस हब के रुप में विकसित किया जाना है।
*इसके अलावा राज्य में सेना के 10 हेलिपैड है।
*केदारनाथ के लिए 16 मई, 2003 से पवन हंस कंपनी (Pawan Hansh Company) द्वारा हेलीकाप्टर सेवा प्रारंभ की गई है। यह हेलीकॉप्टर अगस्त्यमुनि तथा फाटा नामक स्थान से संचालित होते है।
यह सेवा केवल केदारनाथ के पट खुले रहने तक ही उपलब्ध होती है।
*हरिद्वार में एक एविएशन अकादमी और हवाई अड्डे का निर्माण किया जा रहा है।
जलमार्ग यातायात
राज्य में प्रभावित होने वाली गंगा, यमुना तथा कुछ अन्य नदियों में छोटी-बड़ी नौकाओं द्वारा आस-पास के क्षेत्रों में आवागमन किया जाता है। लेकिन उत्तराखंड में कोई भी राष्टीय जलमार्ग नहीं है।