Sunday, January 17, 2021

एक कदम शिक्षा की ओर❤️

उत्तराखंडी गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध दीपक पंत सर जी और वेदांश्री लर्निंग एप के संचालक आशीष सक्सेना सर और संरक्षक अरुण गुप्ता सर ने बिंदुखत्ता का रोड क्षेत्र में निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिए खोले गए अवंतिका कोचिंग सेंटर में उत्तराखंड पीसीएस के लिए तैयारी के स्मार्ट टिप्स दिए और बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित किया l बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करने के लिए किताबें निशुल्क प्रदान की तथा जो विद्यार्थी उत्तराखंड की परीक्षा की तैयारी कर रहा है उनके लिए निशुल्क ऑनलाइन शिक्षा देने का आश्वासन दिया और साथ ही अवंतिका कोचिंग कलास में निशुल्क लाइब्रेरी  के लिए अन्य मदत करने का भी आश्वासन दिया।

Saturday, January 9, 2021

एक कदम शिक्षा कि ओर✌️

                                रमेश चन्द्र शर्मा 
 बिदुखत्ता लालकुआँ क्षेत्र में विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए लाइब्रेरी खोली जा रही है जिस के लिए लगातार लोग अपनी मदद दे रहे हैं इसी बीच प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ रमेश चंद्र शर्मा जी द्वारा 4500+ ₹ की 27 किताबें लाइब्रेरी को गुप्त दान के रूप में दी और अपनी जानकारी गुप्त रखने को कहा गया परंतु यह कार्य समाज को प्रेरणा देने योग्य है इसलिए हमें सदैव ऐसे  व्यक्तित्व से कुछ ना कुछ सीखना चाहिए l
उनकी इस पहल से कई घरों का दीपक जल सकता है सदैव ऐसे व्यक्ति प्रकाश पुंज के समान होते हैं जिनका एक उपदेश होता है रोशनी फैलानाl
  धन्यवाद गुरुवार✌️
यदि कोई सहयोग करना चाहे तो संपर्क कर सकते हैं-
Ganesh Saraswati Bhatt
7248887731

Friday, January 8, 2021

हिन्दी भाषा का विकास

                 हिन्दी भाषा का विकास

भाषा- भाषा की उत्पत्ति भाष् धातु से हुई है जिसका अर्थ होता है कहना या बताना अर्थात अपने भावो या विचारों को प्रकट करना।

भाषा की परिभाषा- अपने मतव्य को सप्रेषित करने का  माध्यम भाषा है।

भाषा के प्रकार- डॉक्टर संतोष मित्तल के अनुसार भाषा के मुख्य दो प्रकार होते हैंl
1- मौखिक भाषा
2- लिखित भाषा
मौखिक भाषा को वेदों में श्रुति साहित्य भाषा कहा गया है क्योंकि वैदिक काल में शिक्षा का ज्ञान मौखिक रूप से दिया जाता था जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक दूसरे तक पहुंचता थाl इसे ही भाषा का मूल रूप माना गया हैl

Note- भाषा के तीन प्रकार भी होते हैं सांकेतिक भाषा मौखिक भाषा लिखित भाषा परंतु भाषा के विकास के क्रम को देखा जाए तो भाषा का विकास वैदिक युग से हुआ है जहां से मौखिक भाषा का उदय हुआ है अतः भाषा के मुख्य दो प्रकार होते हैंl

                     भाषा का इतिहास
👉 विश्व में 3000 भाषाएं लगभग बोली जाती है जो 13 भाषा परिवारों में वर्गीकृत हैंl
👉 सबसे प्राचीन भाषा ही परिवार भारोपीय भाषा परिवार है जिसकी जननी भाषा संस्कृत को माना जाता है इसलिए सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत को माना जाता है जिसमें ऋग्वेद की रचना की गई है भारोपीय भाषा परिवार यूरोप से भारत तक फैला हुआ है इसमें अंग्रेजी हिंदी उर्दू आदि भाषाएं आती हैl
👉 विसेंट स्मिथ का कथन था कि संस्कृत आर्यों की धरोहर है जो कि यूराल पर्वत (मध्य एशिया) से आए थे जो अफगानिस्तान पाकिस्तान के रास्ते भारत के पंजाब अर्थात सिंध प्रांत में 1500 ईसवी पूर्व पहुंचे थे उन्होंने यहां द्रविड़ जनजाति को हराया जिसके बाद द्रवीडो जनजाति उत्तर पश्चिम भाग से भागकर दक्षिण भाग में चली गईl

             भारतीय भाषा परिवार का विकास
भारतीय भाषा परिवार- जो भाषाएं जो समान गुण प्रदर्शित करती हैं उन्हें एक भाषा परिवार में रखा जाता है भारत में मुख्य 5 भाषा परिवार पाए जाते हैं।
1-भारोपीय भाषा परिवार- यह भाषा परिवार भारत के उत्तर पश्चिम क्षेत्र में बहुत अधिक फैला हुआ है इसे हिंद आर्य भाषा परिवार भी कहा जाता हैl इसमें मुख्यतः अंग्रेजी हिंदी उर्दू नेपाली कोंकणी मैथली सिंधी आदि भाषाएं आती हैl यह सबसे बड़ा भाषा परिवार हैl

2- द्रविड़ भाषा परिवार- यह भाषा परिवार दक्षिण भारत में फैला हुआl इसकी मुख्य भाषा तमिल हैl यह दूसरा सबसे बड़ा भाषा परिवार हैl इसमें मुख्य भाषा तमिल कन्नड़ मलयालम तेलुगु है तेलुगु इसकी प्रमुख भाषा है इसकी भाषाओं का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है इस भाषा परिवार का  विस्तार नर्मदा गोदावरी के दक्षिण भाग से कन्याकुमारी तक हुआ हैl

3- चीनी तिब्बती भाषा परिवार- इसका विकास सेवन सिस्टर राज्य अर्थात अरुणाचल प्रदेश मेघालय मणिपुर असम नागालैंड त्रिपुरा मिजोरम राज्य में हुआ है इसमें प्रमुख भाषाएं नागा मणिपुरी खासी चंबा तिब्बत बाडो इत्यादि है।
Note- मंदारीन भाषा परिवार का एक हिस्सा है। जो विश्व का सर्वाधिक बोली जाने वाली बोली हैl

4-आस्ट्रिक भाषा परिवार- इस भाषा परिवार का विकास झारखंड छत्तीसगढ़ असम पश्चिम बंगाल उड़ीसा आदि राज्यों में हुआ इसकी प्रमुख भाषा संथाली खड़िया सांवरा मुंडारी हो भाषा हैl जनसंख्या की दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी भाषा संथाली हैl

5- अंडमानी भाषा परिवार- इसमभाषा परिवार की खोज आवेंता अब्बी ने कि यह भाषा परिवार अंडमान निकोबार दीप समूह में बोली जाती है इसमें मुख्य भाषा अंडमानी ग्रेड निकोबारी जाखा ओंगे आदि हैं।
Note- ताई कड़ाई परिवार को छठा भाषा परिवार के रूप में भी जाना जाता है जो मेघालय  क्षेत्र में फैला हुआl

                 भारत मे भाषा वर्गीकरण 
संस्कृत भाषा को हिंदी भाषा की जननी कहा जाता है भाषा के लिए हिंदी शब्द का प्रथम प्रयोग शरफुद्दीन की जफरनामा में मिलता हैl
भारत का भाषाई इतिहास लगभग 3500 वर्षों से भी अधिक पुराना है भारत में भाषा के इतिहास का वर्गीकरण प्राचीन काल से अब तक इसे तीन भागों में बांटा गया हैl
1- प्राचीन भारतीय आर्य भाषा  (1500ई.पूर्व-500ई.पूर्व)
2- मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा (500 ईसा पूर्व से 1000ई)
3-आधुनिक भारतीय आर्य भाषा(1100ई.- अब तक)

🍁 प्राचीन आर्य भाषा परिवार- इसका कार्यकाल 1500 ईस्वी पूर्व से 500 ईसवी पूर्व तक रहा इसे मुख्य दो भागों में बांटा जाता हैl
1- वैदिक संस्कृत- इस संस्कृत में वेदों की रचना हुई है इसका काल 1500 ईसवी पूर्व से 1000 ईसवी पूर्व का हैl इस भाषा को यास्क व पाणिनी ने छान्दस नाम दिया है।
2- अलौकिक संस्कृत- संस्कृत का काल 1000 ईसवी पूर्व से 500 ईसवी पूर्व तक का हैl यह भाषा वैदिक संस्कृत के साथ बोली जाने वाली संस्कृत भाषा थीl
 
🍁 मध्यकालीन आर्य भाषा- इस भाषा का काल 500 ईसवी पूर्व से 1000 ईसवी तक था इसमें पाली प्राकृत अपभ्रंश और अवहट्ट भाषा आई थीl
1- पाली भाषा- इस भाषा का काल 500 ईसवी पूर्व से 100 ईसवी तक का था इस भाषा में महात्मा बुद्ध ने अपने उपदेश दिए थे जिस कारण इसे पहली देशज भाषा कहा जाता हैl
2- प्राकृत भाषा- इसका काल 100 ईसवी से 500 ईसवी तक था इस भाषा में महावीर स्वामी ने उपदेश दिए थे इसे द्वितीय देशज भाषा कहा जाता हैl
3-अपभ्रंश भाषा- इस भाषा का काल 500 ईसवी से 1000 ईसवी तक का था इसमें कई भाषा तथा उपभाषाओं का उदय हुआ जिनमें से प्रमुख भाषाएं निम्न है-
1- शौरसेनी अपभ्रंश- इसके अंतर्गत पश्चिमी हिंदी गुजराती,पहाड़ी और राजस्थानी आती है! 
2- पैशाची- पंजाबी और लहंदा
3- ब्राचड.- सिन्धी
4- महाराष्ट्री- मराठी
5- मागधी- बिहारी, बंगाली, उडिया, असमिया
6- अर्द्धमागधी- पूर्वी हिन्दी

पश्चिमी हिंदी से विकसित होने वाली बोलियां- खड़ी बोली (कौरवी)ब्रजभाषा हरियाणवी बुंदेली कन्नौजी
बिहारी से विकसित होने वाली बोलियां-भोजपुरी मगही मैथिली
पूर्वी हिंदी से विकसित होने वाली बोलियां- अवधी बघेली छत्तीसगढ़ी
राजस्थानी से विकसित होने वाली बोलियां-मारवाड़ी मेवाती जयपुरी(ढुढनी) मालवी
पहाड़ी से विकसित होने वाली बोलियां- पूर्वी पहाड़ी पश्चिमी पहाड़ी मध्यवर्ती पहाड़ी

Note- अपभ्रंश से आधुनिक भारतीय भाषाओं का विकास हुआ।
स्वयंभू को अपभ्रंश का बाल्मीकि कहा जाता है।
विद्यापति ने इसे देशील बयना का है! 

अवहट्ट काल- हिंदी के विकास का यह काल 500-1100 ई. तक चला यह काल अपभ्रंश व पुरानी हिन्दी के बीच का काल था! इसे संक्रमणकालीन या संक्रांति कालीन भाषा कहा है! 
Note- चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने संक्रांति काल में प्रयुक्त की जाने वाली भाषा को पुरानी हिंदी कहां है! 

आधुनिक भारतीय आर्य भाषा (हिंदी) -
प्राचीन हिंदी (1100-1400ई.) 
मध्यकालीन हिंदी(1400-1850ई.) 
आधुनिक हिंदी(1850-अब तक) 

देवनागरी लिपि का विकाश-
ब्राह्मी लिपि🏹उत्तर शैली🏹 गुप्त लिपि 🏹 सिद्ध मातृका 🏹 कुटिल लिपि 🏹 देवनागरी लिपि

❤ नागरी लिपि का सर्वप्रथम प्रयोग गुजरात के राजा जय भट्ट के शिलालेख में मिलता है! 

यह अक्षरात्मक लिपि है परंतु इसका विकास वर्णनात्मक लिपि से हुआ है! 

राजभाषा हिंदी-
राजभाषा हिंदी का वर्णन अनुच्छेद 343 से 351 तक किया गया है इसका वर्णन भाग 17 अनुसूची आठवीं में किया गया है! 
स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी भाषा को भारत संघ की राजभाषा की मान्यता दी
अनुच्छेद 343- संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है
अनुच्छेद 344- संविधान के लागू होने के 5 वर्ष बाद राष्ट्रपति एक आयोग और संसद की समिति का गठन करेगा इसके तहत प्रथम आयोग जून 1955 में  बीजी खेर की अध्यक्षता में गठित किया गया था सितंबर 1957 में अनुच्छेद 344(2)के अनुसार तत्कालीन गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत की अध्यक्षता में एक संसदीय समिति का गठन किया गया! 
अनुच्छेद 345- किसी राज्य की विधान मंडल विधि द्वारा राज्य के राजकीय प्रयोजनों के लिए उस राज्य में प्रयुक्त होने वाली भाषा या भाषाओं में किसी एक या अनेक को या हिंदी को अंगीकार कर सकता है! 
अनुच्छेद 346- संघ में राजकीय प्रयोजनो के लिए तत्समय भाषा एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच में तथा किसी राज्य संघ के बीच में संचार के लिए राजभाषा होगी! 
अनुच्छेद 347- यदि किसी राज्य का पर्याप्त अनुपात चाहता है कि उसके द्वारा बोली जाने वाली कोई भाषा राज्य द्वारा अभी ज्ञात की जाए तो राष्ट्रपति उस भाषा को सरकारी अभिज्ञा दे सकता है समय-समय पर राष्ट्रपति ऐसी अभिज्ञा देते रहते हैं जो आठवीं अनुसूची में स्थान पाते हैं जैसे इस अनुसूची में प्रारंभ में 14 भाषाएं थी- असमिया बंगला गुजराती हिंदी कन्नड़ कश्मीरी मलयालम मराठी उड़िया पंजाबी संस्कृत तमिल तेलुगू उर्दू! 
बाद में 12 वे संविधान संशोधन द्वारा 1967 में सिंधी और 71 वें संविधान संशोधन द्वारा 1995 में कोंकणी मणिपुरी नेपाली एवं 92 वे संविधान संशोधन द्वारा बोडो डोगरी मैथिली संथाली भाषा जोड़ी गई अब आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हो गई है ! 
अनुच्छेद 348- जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबंध ना करें तब तक उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय और प्रत्येक न्यायालय में सब कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी तथा संसद व राज्य मंडल में विधेयक नियम आदेश विनिमय आदि के लिए प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी में होगा! 
अनुच्छेद 349- संविधान कब आरंभ से 15 वर्षों की कालावधी तक अनुच्छेद 345(1) में वर्णित प्रयोजनों में से किसी के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के लिए उप बंद करने वाला कोई विधायक या संशोधन संसद के किसी सदन में राष्ट्रपति के पूर्व मंजूरी के बिना पुनः स्थापित या प्रस्तावित नहीं किया जाएगा! 
अनुच्छेद 350- व्यथा के निवारण के लिए कोई भी भाषा का प्रयोग जैसे भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा तथा अल्पसंख्यक वर्गों के लिए विशेष अधिकार की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है! 
अनुच्छेद 351- हिंदी के विकास के लिए संघ को निर्देश दिए गए हैं कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए और उसका विकास करें! 

विश्व हिंदी सम्मेलन-

पहला सम्मेलन-

  • अवधि :10-14जनवरी 1975
  • स्थान :नागपुर(महाराष्ट्र),भारत
  • उद्घाटन द्वारा : इंदिरा गांधी ,प्रधान मंत्री ,भारत
  • प्रतिभागी देश :30
  • प्रतिनिधियों की संख्या :122
  • सुवाक्य : वसुधैव कुटुम्बकम्
  • 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है

दूसरा सम्मेलन

  • अवधि :28-30 अगस्त 1976
  • स्थान :पोर्ट लुइस, मॉरीशस,
  • उद्घाटन द्वारा :
  • प्रतिभागी देश :17
  • प्रतिनिधियों की संख्या :181

तीसरा सम्मेलन

  • अवधि :28-30 अक्टूबर 1983
  • स्थान :नई दिल्ली ,भारत
  • उद्घाटन द्वारा :
  • प्रतिभागी देश :30
  • प्रतिनिधियों की संख्या :260

चौथा सम्मेलन

  • अवधि :02-04 दिसंबर 1993
  • स्थान :पोर्ट लुइस ,मारीसस,
  • उद्घाटन द्वारा : श्री म्युक्तेश्चर चुनी
  • प्रतिभागी देश :10
  • प्रतिनिधियों की संख्या :203

पांचवाँ सम्मेलन

  • अवधि :04-08 अप्रैल 1996
  • स्थान :पोर्ट ऑफ़ स्पेन ,त्रिनिदाद और टुबैगो
  • उद्घाटन द्वारा :
  • प्रतिभागी देश :10
  • प्रतिनिधियों की संख्या :201

छठा सम्मेलन

  • अवधि :14-18 सितम्बर 1999
  • स्थान :लंदन ,यू के
  • उद्घाटन द्वारा :
  • प्रतिभागी देश :21
  • प्रतिनिधियों की संख्या :700

सातवां सम्मेलन

  • अवधि :06-09 जून 2003
  • स्थान : पारामारिबो, सूरीनाम
  • उद्घाटन द्वारा :
  • प्रतिभागी देश:16
  • प्रतिनिधियों की संख्या :500

आठवां सम्मेलन

  • अवधि :13-16 जुलाई 2007
  • स्थान :न्यू यॉर्क ,यू एस ए
  • उद्घाटन द्वारा :
  • प्रतिभागी देश:20
  • प्रतिनिधियों की संख्या :800

नवां सम्मेलन

  • अवधि :22-24 सितम्बर 2012
  • स्थान : जोहानसबर्ग ,दक्षिणी अफ्रीका
  • उद्घाटन द्वारा :
  • प्रतिभागी देश :30
  • प्रतिनिधियों की संख्या :200

दसवां सम्मलेन

  • अवधि :10-12 सितम्बर 2015 
  • स्थान :भोपाल, भारत
  • उद्घाटन द्वारा :नरेंद्र मोदी, प्रधान मंत्री, भारत 
  • प्रतिभागी देश:27
  • प्रतिनिधियों की संख्या :2000

ग्यारहवां सम्मलेन

  • अवधि :अगस्त 2018
  • स्थान :पोर्ट लुई, मॉरीशस
12 वां विश्व हिंदी सम्मेलन-
इस आयोजन 2021 में मध्य प्रदेश में जगह देवास में किया जाएगा| इसके अलावा मॉरिशस पूरी दुनिया में एक ही देश है ,जो 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन के साथ तीसरी बार विश्व हिंदी सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है| 

राजभाषा अधिनियम- राजभाषा अधिनियम 1963 में पारित किया गया था जिसमें 9 धाराएं थी संविधान के अनुसार संविधान लागू होने के 15 वर्ष के पश्चात अर्थात 26 जनवरी 1965 के बाद सभी कार्यों में केवल हिंदी का प्रयोग होगा लेकिन राजभाषा अधिनियम 1963 के प्रावधान किया गया कि 26 जून 1965 से हिंदी संघ की राजभाषा तो रहेगी ही पर उस समय से हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भी संघ के सभी सरकारी प्रयोजनों के लिए बराबर प्रयुक्त होती रहेगी
27 नवंबर 1967 को संसद में सरकार के राजभाषा संकल्प के रखे जाने के साथ-साथ 1963 के अधिनियम को संशोधित करने के लिए संसद के एक विधायक भी प्रस्तुत किया गया और अंततः इसे 8 जनवरी 1968 को अधिनियम कर दिया 1967 के संशोधन द्वारा यह व्यवस्था कर दी गई है कि जब-जब हिंदी भाषी राज्यों की विधानसभा तथा संसद सहमति ना दे तब तक हिंदी के सांसद अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा! 

राजभाषा नियम 1976- राजभाषा अधिनियम की धारा 8(2) के अंतर्गत राजभाषा नियम 1976 में जारी किए गए नियम 4 के अनुसार समस्त देश को 'क' 'ख' 'ग' इन 3  क्षेत्रो मे वर्गीकृत किया गया
'क' क्षेत्र के अंतर्गत- वेयर राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र सम्मिलित हैं जिन्होंने हिंदी को अपनी राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है जैसे बिहार हरियाणा राजस्थान हिमाचल प्रदेश मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश दिल्ली तथा केंद्र शासित प्रदेश में अंडमान निकोबार दीप समूह

'ख' क्षेत्र के अंतर्गत- वे राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र जिन्होंने केंद्र सरकार के साथ पत्र व्यवहार में हिंदी को अपनाने का निर्णय दिया है जैसे गुजरात महाराष्ट्र पंजाब तथा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़

'ग' क्षेत्र के अंतर्गत- शेष सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेश को 'ग' क्षेत्र मैं रखा गया हैं जिन्होंने हिंदी में भेजे जाने वाले पत्रों को अंग्रेजी अनुवाद भी भेजा जाता है! 
1976 में राजभाषा नियम बनाए गए जिसके अनुसार त्रिभाषा फार्मूला को अपनाया गया जिसमें निम्न तीन भाषाओं के प्रयोग का प्रवधान है-
1-प्रधान राजभाषा- हिंदी
2- सहायक राजभाषा- अंग्रेजी
3- प्रादेशिक भाषा
प्रमुख संस्थान-
1- फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना 4 मई 1800 में कोलकाता में  हुई! 
2- नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना 16 जुलाई 1893 को काशी में हुई! 
3- हिंदी साहित्य सम्मेलन 1910 में प्रयाग में हुआ! 
4- हिंदी विद्यापीठ की स्थापना देवघर में 1929 में हुई! 
5- राष्ट्रीय भाषा प्रचार समिति की स्थापना 1936 वर्धा में हुई! 
6- संगीत नाटक एकेडमी की स्थापना 28 जनवरी 1953 में दिल्ली में हुई! 
7- केंद्रीय हिंदी निदेशालय की स्थापना 1960 को नई दिल्ली में हुई! 
8- केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना 1962 आगरा में हुई! 
9- नागरी लिपि परिषद की स्थापना 1975 नई दिल्ली में हुई! 
10- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना वर्धा(महाराष्ट्र) 1997 में हुई! 

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न-





 लेखन जारी है.............