✴️1904 में लार्ड कर्जन के समय भारतीय पुरातत्व विभाग का गठन कोलकाता में हुआ जिसके प्रथम अध्यक्ष अलेक्जेंडर कनिंघम थे!
✴️1921 में जॉन मार्शल की अध्यक्षता में दयाराम साहनी के नेतृत्व में हड़प्पा की खुदाई हुई 1924 में लंदन में जॉन मार्शल ने इस सभ्यता की घोषणा की!
🌳मेसोपोटामिया की सभ्यता में मेलुहा शब्द मिला है जिसका संबंध हड़प्पा सभ्यता से है!
✴️ इस सभ्यता से जुड़ी लगभग 1400 स्थल खोजे जा चुके है इसमें से लगभग 925 भारत में तथा 475 पाकिस्तान में है!
✴️ हड़प्पा सभ्यता का उद्गम- ईरान व बलूचिस्तान की ग्रामीण संस्कृति से नगरी सभ्यता का जन्म हुआ है!
✴️ गार्डन चाइल्ड ने सिंधु सभ्यता को प्रथम नगरी क्रांति कहा है!
✴️ हड़प्पा सभ्यता की जानकारी सबसे पहले 1826 में चालर्स मैसन ने दि थी!
✴️ हड़प्पा सभ्यता का काल 2300 ई. पू. से 1740 ई. पू्. के मध्य का था!
⚫ सिंधु सभ्यता का क्षेत्र त्रिभुजाकार था इसका क्षेत्रफल 1299600 वर्ग किलोमीटर था! पूर्व से पश्चिम 1600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण 1400 किलोमीटर था!
⚫ यह सभ्यता की खुदाई से भिन्न भिन्न प्रजातियों की अस्थि पंजर प्राप्त हुए- भूमध्य सागरीय, मंगोलियन, प्रोटो ऑस्ट्रेलियड तथा अल्पाइन
⚫ सिंधु सभ्यता उत्तर में मांडा (जम्मू), दक्षिण में दैमाबाद पूर्व में आलमगीरपुर दक्षिण में मकरान समुद्र तट बलूचिस्तान और सुत्कागेंडोर तक फैली है!
⚫ पासा इस काल का प्रमुख खेल था!
⚫ माप तोल के लिए घनाकार बांटे थी और यह दशमलव पद्धति से प्रचलित थे!
🟠 यह एक कास्यंयुगी नगरी सभ्यता थी!
⚫ इनका समाज मातृसत्तात्मक था!
🟠 सिंधु सभ्यता में आर्थिक स्थिति का प्रमुख आधार व्यापार एवं वाणिज्य था!
⚫ वृक्षों में पीपल सबसे पवित्र थाl
✴️ हड़प्पा सभ्यता की लिपि की खोज 1923 में हुई जो भाव चित्रात्मक थी जो दाएं से बाएं लिखी जाती थी यह लिपि बूस्ट्रोफेडन कहलाती है सबसे ज्यादा यू (u)आकार की चित्र व मछली के चित्र मिले हैं मूल चित्र 64 थे!
✴️ मोहनजोदड़ो से शिव के पारंपरिक रूप की पूजा के अवशेष अर्थात पशुपति की मूर्ति मिली है इसे जैन अनुयाई आदिनाथ की मूर्ति बताते हैं! इस सभ्यता से मंदिर के प्रमाण नहीं मिले हैं परंतु मूर्ति के प्रमाण मिले है!
🟠 सिंधु सभ्यता के प्रमुख नगर-
✴️ हड़प्पा- दयाराम साहनी ने 1921 मे रावी नदी के तट पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मांटगोमेरी जिले में इसका उत्खनन किया था!
यहां से सबसे अधिक अभिलेख युक्त मोहरे, पीतल की इक्का गाड़ी, स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा, समाधान के गड्ढे में ईट लगाने के प्रमाण, कांसे का दर्पण, सुरमा लगाने की सलाई, कर्मचारियों के आवास, लाल पत्थर से बनी पुरुष की निर्वस्त्र छड़ की आकृति, r-37 कब्र मातरदेवी की मूर्ति, लकड़ी का ताबूत, फसल रखने का खज़ाना, ताबे गलाने का पात्र इत्यादि प्राप्त हुआ!
महत्वपूर्ण तथ्य- यहां से एबी नामक किला मिला है और यहां से नग्न स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा मिला है जिसे उर्वरकता कि देवी कहा जाता है, कास्य बैल गाड़ी, स्वास्तिक चिन्ह मिला!
✴️मोहनजोदड़ो- इसे मृतकों का टीला भी कहा जाता है इसकी खोज 1922 में राखालदास बनर्जी ने सिंधु नदी के तट पर पाकिस्तान के लरकाना जिले में की थी!
यहां से विशाल स्नानागार, नाव के चित्र वाली मुद्रा बौद्ध स्तूप,लिंग पूजा के प्रमाण,वृषभ की मूर्ति अन्नागार, सिटदार शौचालय, 1398 मोहरे, पुरोहित की छड, मिश्रित पशु की मूर्ति, नर्तकी की कांसे की मुर्ति, घोड़े के दांत, सभागार मिले है!
महत्वपूर्ण- विशाल स्नानागार को जॉन मार्शल ने विश्व की धार्मिक महत्व की आश्चर्यजनक निर्माण कहा है!
शिव के प्रारंभिक रूप की मुहरे मिली है जिसे तांत्रिक मुहर या समन की मुहर कहते है!
✴️लोथल- लोथल की खोज 1955-62 आर राव ने होगा नदी के तट पर अहमदाबाद गुजरात में की थी यह एक बंदरगाह है!
यहां से गोदीबाड़ा, अन्नागार, स्नानघर, नालियों की अच्छी व्यवस्था, हाथी दांत, घोड़े की मिट्टी की मूर्ति, युगल समाधान, नालियों से सोख्ता गड्ढा, औद्योगिक क्षेत्र, सेलखड़ी की मोहरे, सीप, मनके बनाने के कारखाने,अग्नि पूजा के संकेत,नगर, पीसने की चक्की के दो पाट, मिले हैं
महत्वपूर्ण तथ्य- इसे लघु हड़प्पा भी कहा जाता है यहां से 3 युग्म समाधिया मिली है जो सती प्रथा के साक्ष्य माने जाते हैं! यहां से पंचतंत्र की लोमड़ी के चित्र भी मिले!
✴️धौलावीरा-इसकी खोज वर्ष 1968 में पुरातत्त्वविद् जगतपति जोशी द्वारा की गई थी। यह गुजरात के कच्छ जिले में हैl इसे 2021 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत की श्रेणी में घोषित किया गया यह सबसे नवीनतम नगर है l
यह एकमात्र नगर जो 3 भागो में विभाजित था यहां से एक विशाल स्टेडियम के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं पोलिसदार सफेद पत्थर के साक्ष्य, तथा चट्टानों को काटकर 16 तालाब बनाने के साथ भी मिले!
महत्वपूर्ण तथ्य- यह हड़प्पा का सबसे बड़ा स्थल है! धोलावीरा का अर्थ होता है सफेद कुआं
✴️कालीबंगा- यह 1953 में बीबी लाल वीके थापर ने घाघरा नदी हनुमानगढ़ जिला गंगानगर राजस्थान से खोजा यहां से कहां थे व मिट्टी की चूड़ियां कच्ची ईंटों से बने 7 अग्निकुंड जूते हुए खेत तांबा गलाने की तकनीक ऊंट की हस्तियों के साथ चुनाव खिलौना कुआँ तीन प्रकार के समाधान प्रथाएं मिली है!
महत्वपूर्ण बिंदु-
कालीबंगा का अर्थ होता है काले रंग की चूड़ियां
इसे इस सभ्यता की तीसरी राजधानी डॉ दशरथ शर्मा ने कहा है
यहां से ग्रिड पेटर्न विधि से जूते खेत मिले है
यहां से शल्य चिकित्सा का वर्णन मिला है
मिट्टी से जनन अंगों के प्रतीत मिले हैं
भूकंप के साक्ष्य मिले है
मिट्टी की मूर्तियां नहीं मिली
✴️बालाकोट- यह अरब सागर के तट में कराची के निकट का बंदरगाह है जहां से प्राग् सैंधव व विकसित सैंधव सभ्यता के अवशेष मिले!
✴️चंहुदडो- इसकी खोज 1931 में गोपाल मजूमदार ने की थी यह पाकिस्तान की सिंध में स्थित है यहां से लिखने की चौकियां मसीपत्र सील या मुद्राओं के निर्माण के कारखाने मनका बनाने के कारखान ईटों से बनी भड्डीया मिली है!
महत्वपूर्ण तथ्य- जहां एक मात्र स्थान था जहां से वक्राकार ईट मिली है यह एक मात्र स्थान था जहां से दुर्ग के साक्ष्य नहीं मिले! यह सभ्यता का औद्योगिक स्थल था! ईद पर एक बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पंजों के निशान मिले!
✴️बणवाली- इसकी खोज 1973-74 में रविंद्र सिंह बिष्ट ने घाघरा नदी के तट पर हिसार (हरियाणा) में की यहां से मिट्टी का हाल प्राप्त हुआ है!
एक अर्ध वृत्ताकार ढांचा प्राप्त हुआ है जिससे मंदिर होने की संभावना व्यक्त की गई है!
यहां से मिट्टी का खिलौना वाला हल मिला है!
यहां से एक जोहर का मकान और बास बेसिग भी मिला है!
✴️रोपड़- इसकी खोज 1955-56 में यज्ञदत्त शर्मा ने पंजाब सतलज नदी के तट पर की यहां से मानव कब्र के नीचे कुत्ते का सवाधान मिला है!
इसके वर्तमान का नाम रूपनगर है!
यहां से ताबे की कुल्हाड़ी मिली है
मनुष्य के साथ कुत्ता दफनाने का साक्ष्य मिला!
✴️ सुरकोटदा- इस स्थल की खोज 1972 में कच्छ गुजरात में यज्ञदत्त शर्मा जी ने की!
यहां से घोड़े की अस्तियां प्राप्त हुई है!
यहां से पत्थर से ढकी हुई कब्र मिली है!
यहां से कलश समाधान भी मिले है!
✴️रंगपुर- इस स्थान की खोज 1953-54 में रंगनाथ राव ने भादर नदी के तट पर गुजरात के काठियावाड़ जिले में की!
नष्ट होती सभ्यता के संकेत यही से मिले
यहां से चावल के साथ भी मिले!
Note- हड़प्पा सभ्यता के लोग चावल घोड़े लोहे से प्रचलित थे!
✴️ राखीगढ़ी- हड़प्पा का दूसरा सबसे बड़ा स्थल है जो घघगर नदी के तट पर हरियाणा में है
यहां से स्तंभ आयुक्त मंडप के प्रमाण मिले!
मई 2012 में इसे यूनेस्को ने ग्लोबल हेरिटेज फंड में शामिल किया!
✴️शोर्तुगोई- यह स्थान अफगानिस्तान में है एक मात्र स्थान जहां से नहरो की जानकारी मिली है!
🎇हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण-
1. मार्टिमर व्हीलर व गार्डन चाइल्ड के अनुसार इस सभ्यता का अंत आर्य या बाह्य आक्रमण के कारण हो
2. कनेडी महोदय के अनुसार इस सभ्यता का पतन महामारी के कारण हुआ!
3. जॉन मार्शल के अनुसार इस सभ्यता का पतन प्रशासनिक शिथिलता (गृह युद्ध) के कारण हुआ!
4. एमआर साहनी के अनुसार इस सभ्यता का पतन भूकंप के कारण हुआ है!
5. अमलानंद घोष और ऑरेंज स्स्टेइन के अनुसार इस सभ्यता का अंत जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ!
🌅हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख अन्य स्थल-
1. मुण्डीगाटक- यह स्थान अफगानिस्तान में था!
2. कुंतागी,देशलपुर,मालवण,रोजदी- ये स्थान गुजरात में था!
3. कुनाल,राखीगढ़ी,बनवाली, मीताथल- यह स्थान हरियाणा में है!
4. बडगांव,अम्बखेडी- यह स्थान उत्तर प्रदेश में स्थित है!
5. दैमाबाद प्रवरा नदी के तट पर महाराष्ट्र में है!
6. सुत्कागेंडोर- राजस्थान 1927 में दशक नदी के तट पर ऑरेंज स्टाइन ने बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में खोजा!
7. कोटदीजी- यह स्थान 1955-57 में सिंध प्रांत के खैरपुर नगर में फजल अहमद खा ने खोजा!
8. आलमगीरपुर- यह स्थान 1958 में हिंडन नदी मेरठ से यज्ञदत्त शर्मा जी ने खोजा!
9. मालवण- यह स्थान ताप्ती नदी के तट पर गुजरात में अल्विन ने खोजा!
🏵 हड़प्पा सभ्यता से महत्वपूर्ण तथ्य🏵
✴️ इस सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह लोथल रंगपुर सुरकोटड़ा प्रभासपाटन था!
✴️ लोथर से प्राप्त मृदभांड में एक व्यक्ति पर मुंह में मछली पकड़े हुए चिड़िया और नीचे एक लोमड़ी का चित्र बनाया गया है जो पंचतंत्र की कहानी के समान है!
✴️ सामान्यत मृदभांड गुलाबी रंग या लाल रंग के होते थे!
✴️ यह सभ्यता शांतिप्रिय मानी जाती है परंतु लोथल वह रोपड़ से ताबे की कुल्हाड़ी के साक्ष्य से मिले!
✴️ ताबे की मुहरे लोथल व देसलपुर से मिली है! सबसे अधिक मुहरे मोहनजोदड़ो से मिली है!
✴️ कालीबंगा और मोहनजोदड़ो से प्राप्त मुहरे पशु बलि के साथ प्रकट करती है!
✴️ मुहरो में वृषभ, हाथी, गैडे, हिरण मछली घडियाल के चित्र बने थे!
✴️यह लोग गन्ने से अप्रचलित है
✴️कपास का ज्ञान सबसे पहले इन्हीं को था यूनानी ने कपास को सिण्डल कहा है!
✴️ हड़प्पा और चंहुदडो से कांसे की बैलगाड़ी मिली है!
✴️ लोथर से आटा पीसने वाली चक्की और हाथी दांत का पैमाना के साक्ष्य मिले है!
✴️ इस सभ्यता का एक बर्तन ओमान (सऊदी अरब) से मिला!
✴️ इस सभ्यता की मुख्य फसल गेहूं और जौ थी!
✴️ डैडमैन लाइन(कंकालो से भरी गली) और कुऐं के साक्ष्य मोहनजोदड़ो से मिले है!
🏵 इस सभ्यता के प्रमुख आयतीय वस्तुएं-
1. लाजवर्द(भवन निर्माण सामग्री)- अफगानिस्तान
2. सोना- फारस
3. चांदी- ईरान
4. टीन- अफगानिस्तान
✴️वैदिक सभ्यता✴️
इस सभ्यता का समय काल 1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तथा इसे दो भागों में बांटा जाता है!
1- ऋग्वैदिक काल(1500-1000 ईसा पूर्व)
2- उत्तर वैदिक काल(1000-600 ईसा पूर्व)
Note- वैदिक सभ्यता की स्थापना का श्रेय आर्यो को जाता है इस शब्द का अर्थ श्रेष्ठ उत्तम अभिजात कुलीन होता है!
✴️1853 मैक्समूलर ने आर्य जाति को श्रेष्ठ जाति कहकर संबोधित किया उसने कहा कि यह मध्य एशिया से भारत आए थे!
✴️ एक समान भाषा बोलने वालों को भी आर्य कहा जाता है तथा इंडो-यूरोपियन भाषा बोलने वाले समूह को भी आर्य कहते हैं!
🟠 मूल स्थान से संबंधित मत-
1- मध्य एशिया या बैक्टीरिया से संबंधित मत-जर्मन विद्वान मैक्स मूलर ने देखा कि इरानी ग्रंथ जेन्द अवेस्ता से इस सभ्यता की कई बातें मिलती है! अतः आर्य मुल रूप से मध्य एशिया के निवासी थे यहां एक प्रमाणित मत है!
2- उत्तर ध्रुव से संबंधित मत- बाल गंगाधर तिलक ने अपनी पुस्तक द ऑर्थोटिक होम आफ आर्यन मे आर्यों को उत्तरी ध्रुव का मूल निवासी माना है!
3- तिब्बत संबंधित मत- दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में इन्हें तिब्बत से संबंधित बताएं!
4- सप्तसैंधव क्षेत्र- अविनाश चंद ने आर्यो को सप्तसिंधु क्षेत्र का बताया है!
🟠आर्यो के जानकारी के साधन-
1- बोगजकोई अभिलेख- यह विश्व का सबसे प्राचीन अभिलेख है जो ईरान से प्राप्त हुआ इसे एशिया माइनर अभिलेख भी कहते हैं इसमें ऋग्वेद के देवता इंद्र वरुण मित्र नासत्य का वर्णन मिलता है!
Note- भारत में सबसे प्राचीन अभिलेख अशोक के अभिलेख है!
2- वेद- वे शब्द विद धातु से बना है जिसका अर्थ होता है जानना या ज्ञान प्राप्त करना था इसके संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास जी थे इसकी उपनाम श्रुति ग्रंथ साहित्य ग्रंथ और अपौरुषेय ग्रंथ है!
Note- श्रुति ग्रंथ- सुनकर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जान पहुंचाएं अर्थात गुरु शिष्य परंपरा
अपौरुषेय ग्रंथ- देवताओं द्वारा रचित ग्रंथ
महत्वपूर्ण- ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद को वेदत्रेयी कहा जाता है!
वेदों के प्रकार- वे चार प्रकार के होते हैं!
1- ऋग्वेद-
सबसे प्राचीन वेद है!
इसको पढ़ने वाले को होर्त या होता कहा जाता है! इसका उपवेद आयुर्वेद है!जिसके रचनाकार प्रजापति है!
इसमें 10 मंडल 1028 सूक्त और 10462 मंत्र है!
इसके ब्राह्मण ग्रंथ ऐतरैय व कोषीतकी है!
इसमें पहला आठवां नौवां और दसवां मंडल बाद में जोड़ा गया!
इसमें सबसे पवित्र नदी सरस्वती है!
चौथे मंडल में कृषि का वर्णन है!
तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र है!
दसवीं मंडल में चतुर्वर्ण व्यवस्था का उल्लेख है!
इसमें नवे मंडल में सोम देवता का वर्णन है!
इसमें साथ में मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन है!
असतो मा सद्गमय वाक्य भी इसी वेद से लिया गया
2- सामवेद-
भारत में संगीत का जनक किसी वेद को कहा जाता है!
इसको पढ़ने वाले को उद्रगाता कहा जाता है!
इसका उपयोग गंधर्व वेद है जिसकी रचना महर्षि नारद ने की है!
इसका ब्राह्मण ग्रंथ पंचवीस है जिसके रचनाकार जैमिनी है!
इसमें मूल मंत्र 75 है!
3- यजुर्वेद-
यजु का अर्थ होता है- यज्ञ से
इसमें गद्य तथा पद्य दोनों है अर्थात यह चम्पू शैली का वेद है!
इसको पढ़ने वाले को अध्वर्यु कहा जाता है!
किस वेद में हाथी पालन का वर्णन भी मिलता है!
यह दो प्रकार का होता है-
1- कृष्ण यजुर्वेद- इसमें गद्य तथा पद्य दोनों है!
2- शुक्ल यजुर्वेद- इसमें केवल पद होते हैं इसे वाजसनेयी संहिता भी कहते है!
4- अथर्ववेद-
यह वेद अथर्व ऋषि द्वारा रचित है!
इस वेद में औषधियों वशीकरण जादू टोना आदि का वर्णन है
इसका उपवेद शिल्प वेद है जिस के रचनाकार विश्वामित्र है!
इसका ब्राह्मण ग्रंथ गोपथ है!
इसमें काशी का वर्णन तथा मगध महामारी फैलने का वर्णन भी किया गया!
🟠 पुराण- पुराणों की संख्या 18 इनके संकलनकर्ता लोमहर्ष तथा उसके पुत्र उग्रश्रवा है सबसे प्राचीन तथा प्रमाणित पुराण मत्स्य पुराण है
🟠 आरण्यक ग्रंथ-
वनों में रचे गए यह ग्रंथ है जो वानप्रस्थ आश्रम के ऋषि द्वारा लिखे जाते हैं!
इनका उद्देश्य है ईश्वर की उपासना में बोल देना!
इनकी संख्या 7 है- ऐतरेय तैत्तिरीय माध्यन्दिन शंखायन मैत्रायणी मलवकार वृहदारण्यक !
🟠 उपनिषद-
गुरु के समीप निष्ठा पूर्वक बैठना उपनिषद का अर्थ होता है!
यह दार्शनिक विचारधारा के ग्रंथ है!
इनकी संख्या 108 है इसमें 11 वह13 प्रमुख है!
दारा शिकोह ने उपनिषदों का फारसी अनुवाद किया था!
शंकराचार्य ने उपनिषदों में भारतीय की रचना की जिसे वेदांत दर्शन कहा जाता है! इनकी संख्या 6 है शिक्षा ज्योतिष कल्प व्याकरण निरुक्त छंद!
सत्यमेव जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया!
ऋग्वेदिक सभ्यता(1500-1000 ईसा पूर्व)
🟠भौगोलिक विस्तार- यह सप्त सैंधव क्षेत्र में फैली था! अर्थात 7 नदियों से घिरा क्षेत्र यह नदियां सिंधु सरस्वती सतलाज व्यास रावी झेलम चिनाब थी!
🟠 राजनीतिक जीवन- आर्यो को पंच जन कहते थे क्योंकि इनके 5 कबीले होते थे- पुरू अनु द्रुहू तुर्वस यदु थे!
महत्वपूर्ण प्रशासनिक शब्द-
राजन या गोप- राष्ट्री का मालिक
पुरोहित- जन का मालिक
विशापति- विश का मालिक
ग्रामीणी- गांव या ग्राम का मालिक
कुलुप- कुल का मालिक
Note- ऋग्वैदिक काल में कुल सबसे छोटी इकाई थी
सभा और समिति दोनों ऋग्वैदिक काल की जनतांत्रिक संस्थाएं मानी जाती है!
महत्वपूर्ण-
विदथ सबसे प्राचीन संस्था थी, इसका ऋग्वेद में 122 बार उल्लेख हुआ है जबकि समिति का 9 बार और सभा का 8 बार उल्लेख हुआ है। सभा वृद्ध जनों एवं कुलीन लोगों की संस्था थी। समिति कबीले की आम सभा होती थी। जिसका राजा पर पूर्ण नियंत्रण होता था स्त्रियां सभा और समिति में भाग लेती थी !विदथ के संगठन और कार्यों के बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
बली एक प्रकार का कर था जो जनता स्वेच्छा से राजा को देती थी!
ऋग्वेद के सातव मंडल में दसराज युद्ध का वर्णन किया गया है जो परुष्णी अर्थात रावी नदी के तट पर भरत जन तथा 10 अन्य जनों के बीच हुआ था इसमें भरत जन के प्रमुख सूदास की विजय हुई!
🟠 आर्थिक स्थिति-
यह सभ्यता एक कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था वाली सभ्यता थी जिसका प्रमुख व्यवसाय पशुपालन था!
गाय को अघग्या कहा जाता था! और सबसे उपयोगी पशु घोड़ा था!
इस काल में लोहे का प्रचलन नहीं था और सर्वप्रथम ताबे का प्रयोग किया था!
✴️ आर्थिक स्थिति से जुड़ी शब्दावली-
त्वष्ठा या तक्षण- बढ़ई
कमरि- धातुकार
यव- जौ
उर्दर- अनाज मापने वाला एक पात्र
हिरण्य- सोना
अयस- तांबा
🟠 सामाजिक स्थिति-
ऋग्वेद के दसवें मंडल में पुरुष सूक्त चार वर्णों की उत्पत्ति का उल्लेख है परंतु यह अस्तित्व में उत्तर वैदिक काल में आए!
ऋग्वैदिक काल पितृसत्तात्मक था परंतु स्त्रियों की स्थिति काफी अच्छी थी! परिवार के मुखिया को कुलक(पिता) कहा जाता था
इस समय बाल विवाह सती प्रथा दहेज प्रथा पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था!
सोम रस प्रमुख पेय पदार्थ था!
समाज में विधवा विवाह दास प्रथा नियोग प्रथा का प्रचलन था!
Note- जब किसी स्त्री के बच्चे नहीं होते या उसके पति की अकाल मृत्यु हो जाती है तो वह अपने देवर या संबंधी द्वारा गर्भ धारण करती है इसे ही नियोग प्रथा कहते हैं!
इस काल की प्रमुख स्त्रियां लोपमुद्रा घोषा अपाला विश्ववरा थी!
Note- जीवन भर अविवाहित स्त्री को अमाजु कहा जाता था!
🟠 धार्मिक स्थिति-
आर्यों ने प्राकृतिक शक्तियों का दैव्यकरण किया!
यासक ने देवताओं को तीन भागों में बांटा-
1- आकाशवासी देवता-
धौ/धौस- सबसे प्राचीन देवता इन्हें सर्जन का देवता कहा जाता था
इनकी तुलना यूनानी देवता ज्यूस के सामान की जाती है!
सूर्य- उगता हुआ सूरज इन्हें तेज का देवता कहा जाता है!
वरुण- इसे ऋत का संरक्षक या ऋतस्यगोप को कहा जाता है इनका ऋग्वेद में सातवें मंडल मे 30 बार उल्लेख है इन्हें देवताओं का देवता कहा जाता है! समुद्र का देवता, विश्व के नियामक और शासक सत्य का प्रतीक, आकाश, पृथ्वी एवं सूर्य का निर्माता के रूप में जाना जाता है।
Note- ऋतस्यगोप का मतलब होता है ऋतु परिवर्तन एवं दिन रात का कर्ताधर्ता!
उषा- इन्हें उत्थान की देवी या प्रगति की देवी कहा जाता है!
सविता(सावीत्री)- इन्हें अमृत की देवी कहा जाता है ऋग्वेद का तीसरा मंडल में वर्णित गायत्री मंत्र इन्हीं को समर्पित है!
षूषन- पशुओं के देवता थे जो उत्तर वैदिक काल में शूद्रों के प्रमुख देवता बन गए!
अश्वनी- चिकित्सा के देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक
2.अंतरिक्ष के देवता-
इंद्र- इन्हें युद्ध का देवता कहा जाता था यह आर्यों के प्रमुख देवता थे जिनके लिए ऋग्वेद में 250 सूक्त है!
मरुत- इन्हें तूफान का देवता कहा जाता है!
पर्जन्य (बादल)- इन्हें वर्षा का देवता कहा जाता है!
3. पृथ्वी के देवता-
पृथ्वी- सर्जन की देवी
अग्नि- इन्हें अतिथि देवता या आर्यों का पुरोहित कहा जाता है इनके लिए ऋग्वेद में 200 श्लोक है!
सोम- इन्हें वनस्पति का देवता कहते हैं इनका वर्णन ऋग्वेद के नवे मंडल में है इनके लिए 120 श्लोक है!
बृहस्पति- यज्ञ के देवता
उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व)
✴️ इस काल को ब्राह्मण धर्म काल भी कहते हैं!
✴️ लोहे की खोज होने के कारण इसे लोगों प्रौद्योगिकी युग भी कहा जाता है!
✴️ इस काल में सर्वप्रथम चित्रित मृदभांड मिले हैं!
✴️ इस काल का केंद्र गंगा यमुना का दोआक था जो कुरुक्षेत्र तक था!
राजनीतिक स्थिति-
इस काल में राजा के दैवीय उत्पत्ति का सिद्धांत अस्तित्व में आया जिसका पहला वर्णन ऐतरेय ब्राह्मण में मिलता है!
राजा का वंशानुगत हो गया था जिसे सम्राट या एकराट कहा जाता था!
बली एक अनिवार्य कर हो गया था जो ऊपर का 1/16वा भाग हो गया था!
Important- प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार कर की दर 1/6 भाग थीl
विजयनगर राजवंश प्राचीन धर्म ग्रंथों मे वर्णित कर की दर पर आधारित कर वसूल करता था!
🟠प्रमुख अधिकारी-
रत्नी- राज्य के उच्च अधिकारी को रत्नी कहते हैं जिसका वर्णन शतपथ ब्राह्मण में 12 बार आया है!
सूत- सारथी
भागदूध- कर संघकर्ता
महिषी- प्रमुख रानी
पालागत- विद्वान
श्रमण- वेद विरोधी अध्यापक
🟠आर्थिक स्थिति-
इस काल का मुख्य व्यवसाय कृषि था!
अतरंजीखेड़ा (यूपी) से कृषि के लोहे के यंत्र मिले हैं जो लोहे का प्रथम प्रमाण है!
इस काल में मुद्रा का प्रचलन हो गया था निष्क जो ऋग्वैदिक काल में स्वर्ण आभूषण था! यह उत्तर वैदिक काल मैं प्रमुख मुद्रा बन गई थी!
इस काल में उर्फ(उन) और शज(सन) का उल्लेख मिलता है!
🟠 धार्मिक स्थिति-
इस काल में कर्मकांड ओं का उदय हुआ!
सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में पुर्वजन्म व मृत्यु का उल्लेख है जबकि मोक्ष का वर्णन उपनिषदों मे मिलता है!
इस काल के प्रमुख देवता-
प्रजापति- सर्वोच्च देवता तथा सर्जन के देवता
रुद्र- पशु का देवता
विष्णु- विश्व का संरक्षक
पूषक- यह शूद्रों के देवता थे!
🟠 सामाजिक स्थिति-
चार वर्णो का उदय हुआ- ब्राह्मण क्षेत्रीय शूद्र वैश्य
इस काल में स्त्रियों की स्थिति मैं गिरावट आई इस काल की प्रमुख स्त्रियां- गार्गी गंधर्व गृहिता मैत्रीय वेदवती थी!
जाबालोपनिषद में चार आश्रमों का उल्लेख है!
✴️इस काल में त्रिऋण का उल्लेख है-
1.पितृ ऋण- संतान उत्पन्न करने से
2. ऋषि ऋण- वेदों के अध्ययन से
3. देव ऋण- यज्ञ करने से
🟠 विवाह के 8 प्रकार-
1- ब्रह्मा विवाह- योग्य वर के साथ विवाह
2- देव विवाह- पुरोहित के साथ विवाह
3- आर्ष विवाह- दो गायों के बराबर धन देकर किया जाने वाला विवाह!
4- प्रजापत्य विवाह- पिता द्वारा कन्या का हाथ माग कर के किया गया विवाह
Note- ब्रह्मा विवाह देव विवाह आर्ष विवाह प्रजापत्य विवाह इन विवाह को प्रसन्न विवाह कहते है!
5- असुर विवाह- धन के बदले किया जाने वाला विवाह
6- गंधर्व विवाह- प्रेम विवाह
7- पैचास विवाह- बलात्कार करके किया जाने वाला विवाह
8- राक्षस विवाह- बलपूर्वक किया जाने वाला विवाह
🟠 प्रमुख यज्ञ-
अश्वमेघ यज्ञ- राजा द्वारा साम्राज्य विस्तार के लिए घोड़ा छोड़ दिया जाता है!
Note- अंतिम अश्वमेघ यज्ञ सवाई जयसिंह ने कराया था!
राजसुय यज्ञ- राज अभिषेक के दौरान किया गया यज्ञ!
वाजपेई यज्ञ- शक्ति प्रदर्शन के लिए रथ दौड
अग्निष्टोम यज्ञ- पापों से मुक्त से संबंधित यज्ञ
सौत्रामंणि यज्ञ- पशु बलि
पुरुषमेध यज्ञ- राजनीतिक वर्चस्व के लिए विद्वान पुरुष की बलि दी जाती थी!
🟠षड्दर्शन-
1. लोकायत दर्शन- इसके लेखक चार्वाक है!
2. योग दर्शन- पतंजलि
3. साख्य दर्शन- कपिल
4. न्याय दर्शन- गौतम
5. उत्तर मीमांसा- बादरायण
6. पूर्व मीमांसा- जैमिनी
✴️जैन धर्म✴️जैन शब्द संस्कृत के जिन से बना है जिसका अर्थ होता है विजय!
जैन परंपराओं के अनुसार जैन धर्म में 24 तीर्थ करते हैं!
प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ या ऋषभदेव और 22वें तीर्थ कर अरिष्टनेमी थे इन दोनों का वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है!
23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जो काशी (कौशल) के इच्छवाकु वंश के राजा अश्वसेन के पुत्र थे! इनके अनुयायी निग्रंथ कहलाते हैं!
पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित किए गए चार महाव्रत-
1. सत्य
2. अहिंसा
3. अस्तेय- चोरी ना करना
4. अपरिग्रह- धन का संचय ना करना!
Note- पांचवा महाव्रत महावीर स्वामी ने जोड़ा जिसे ब्रह्माचार्य (इंद्रयो पर विजय प्राप्त करना) कहते हैं!
पार्श्वनाथ के कारण ही जैन धर्म में महिलाओं को प्रवेश मिला था!
✴️ महावीर स्वामी-
यह जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे!
जैन धर्म का इन्हें वास्तविक संस्थापक भी माना जाता है!
इनका जन्म 540 ई.पु. कुंडलगांव वैशाली (बिहार) में हुआ था
उनके पिता का नाम सिद्धार्थ था जो वज्जी संघ के ज्ञातृक कुल के प्रधान थे
इनकी माता का नाम त्रिशला था जो लिच्छवी शासक चेटक की बहन थी!
उनकी पत्नी का नाम यशोदा था जो कुंडिय गोत्र के राजा समरवती की पुत्री थी!
इनकी पुत्री का नाम प्रियदर्शना या अणोज्जा था!
इनके दामाद का नाम जामालि था जो इनका प्रथम शिष्य था!
इनके बचपन का नाम वर्धमान था
इनके जन्म का प्रतीक सिंह था
इन्होंने 30 वर्ष की आयु में अपने भाई नांदिवर्मन की आशीर्वाद से ग्रह त्यागा था!
इन्हें 42 वर्ष की आयु में ऋजुपालिका नदी(बाराकर नदी) के तट मे जम्भिक गांव (बिहार) सारे वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई!
प्रथम शिष्या चंदना थी!
Note- बहुत से स्त्रोतों के अनुसार उनकी पहली शिष्या चंपा की राजकुमारी पद्मावती थी!
इन्होंने अपना पहला उपदेश विपुलांचल पहाडी (राजगृह) मे ऋजुपालिका नदी के तट में दिया!
इनकी मृत्यु 468 ईसा पूर्व पावापुरी मे मल्ली राजा सुक्तपाल के वहां हुई!
महावीर ने अपने जीवन काल में 11 सदस्यों का एक संघ बनाया जिसे गणधर कहा जाता था!
जैन धर्म का सर्वोच्च ज्ञान केवल्य कहलाता था!
जैन धर्म के त्रिरत्न-
1. सम्यक दर्शन
2. सम्यक ज्ञान
3. सम्यक आचरण
✴️ जैन साहित्य-
प्रारंभ में जैन साहित्य अर्धमगधी भाषा में था परंतु बाद में प्राकृत भाषा को अपनाया गया है सबसे अंत में कन्नड़ व संस्कृत भाषा में भी जैन साहित्य दिखता है!
जैन साहित्य को आगम कहा गया है जिसने 12 अंग 12 उपांग 10 प्रकीर्ण 6 छेद सूत्र 4 मूल सूत्र 1 नदी सूत्र है!
आगम ग्रंथ महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद का है!
जैन धर्म से कुछ प्रमुख ग्रंथ-
आचारंग सुत्र- इसमें भिक्षुको के नियम व विधि विधानो का उल्लेख था!
भगवती सूत्र- यह महावीर स्वामी की जीवनी है इससे हमें 16 महाजनपदों का भी पता चलता है!
भद्रबाहुचरित्र- इसमें चंद्रगुप्त मौर्य के राज्य काल की जानकारी मिलती है!
कल्पसूत्र- भद्रबाहु द्वारा लिखित संस्कृत ग्रंथ है इसमें जैन तीर्थ करो के जीवनों का वर्णन है!
✴️जैन दर्शन-
1. अनेकान्तवाद- बहुरूपा का सिद्धांत
2. सप्तभंगीनयवाद- सापेक्षता का सिद्धांत(स्यादवाद का सिद्धांत) के नाम से भी जाना जाता है!
3. नवावाद- आर्थिक दृष्टिकोण का सिद्धांत
✴️ जैन संगीतियां-
1. प्रथम जैन संगीति-
प्रथम जैन संगीति 300 ई. में पाटलिपुत्र में हुई इसकी अध्यक्षता स्थुलभद्र ने की
इस संगति का परिणाम विखरे एवं लुप्त ग्रंथों का संचय किया गया!
जैन धर्म को दो संप्रदायों में विभाजित कर दिया गया!
1. श्वेतांबर
2. दिगंबर
श्वेतांबर-
इसकी स्थापना स्थूलभद्र ने की इसमें मोक्ष प्राप्ति करने के लिए वस्त्र का त्याग नहीं करना पड़ता था!
आगम साहित्य स्वीकार किया
स्त्रियों को निर्वाण के योग्य समझा
दिगंबर-
इसकी स्थापना भद्रबाहु ने की इसे समैया भी कहा जाता है!
इतने मोक्ष के लिए वस्त्रों का त्याग करना आवश्यक था!
इन्होंने आगम साहित्य स्वीकार नहीं किया
स्त्रियों को के निर्वाण योग्य नहीं समझा जाता था!
द्वितीय जैन संगीति-
यह जैन संगीति 383 ईसवी में वल्लभी गुजरात में हुई!
इस संगीति की अध्यक्षता क्षमाश्रवण(देवर्धिगण) ने की थी!
जैन धर्म के महत्वपूर्ण प्रश्न-
जैन धर्म में युद्ध व कृषि दोनों वर्जित थी!
जैन धर्म पुनर्जन्म व कर्मवाद पर विश्वास करता था
फार्म में मूर्ति का प्रचलन नहीं था बाद में जैन धर्म में मूर्ति का प्रचलन होने लगा!
ये वेद की अपौरुषेयता व ईश्वर का अस्तित्व शिकार करते थे!
जैन धर्म मे 18 पापा की कल्पना की गई है!
महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद सुधर्मन संघ का अध्यक्ष बना बाद में जम्बू संघ का अध्यक्ष बना!
✴️ जैन धर्म के अनुयायी राजा-
चंद्रगुप्त मौर्य- पहली जैन संगीति इसी के समय में आयोजित की गई थी!
कलिंग राजा खारवेल- उदयगिरि की पहाड़ी में इतने गुफा बनाई थी!
राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष- इतने रतनमलीका ग्रंथ की रचना की!
गंग राजा राजमल चतुर्थ- इसके मंत्री चामुंड राय ने 974 ई. में श्रवणबेलगोला कर्नाटक में बाहुबली की मूर्ति बनाई यह चट्टान के सहारे खड़ी सबसे ऊंची मूर्ति है यहां प्रत्येक 12 वर्ष में दूध से अभिषेक होता है जिसे महामस्तकाभिषेक कहते हैं!
बौद्ध धर्मबुद्ध का अर्थ होता प्रकाशमान या जागृत
एडविन अर्नोल्ड नए महात्मा बुद्ध को लाइट ऑफ एशिया कहा है!
महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ई.पु. लुंबिनीवन (कपिलवस्तु नेपाल) में हुआ था!
बुद्ध के जन्म के समय कालदेवल नामक तपस्वी व कोडिनीय नामक ब्राह्मण ने बुद्ध के बारे में कहा था यह चक्रवर्ती सम्राट या सन्यासी बनेगा!
इनके पिता जी शुद्धोधन थे जो शाक्य प्रधान थे!
इनकी माता का नाम महामाया देवी था जो कौलीय राज्य की राजकुमारी थी!
इनका पालन-पोषण इनकी मौसी प्रजापति गौतमी ने किया था जिसका गौतम बुद्ध भी कहा जाता है!
इनकी मौसी प्रजापति गौतमी इन की पहली शिष्या थी!
इनका विवाह यशोधरा से हुआ था उनके पुत्र का नाम राहुल था!
इन्होंने 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग दिया था इस घटना को बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहते हैं!
ग्रह त्याग की घटना का प्रतीक घोड़ा है उनके घोड़े का नाम कथक व सारथी का नाम चनना था!
इनके प्रारंभिक गुरु आचार्य आरंभ आलारकलाम और धर्माचार्य रुद्रकराम पुत्र थे!
इन्हें 35 वर्ष की आयु में निजरना (पुनपुन नदी) नदी के तट पर पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई!
महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश ऋषिपतनम (सारनाथ) में दिया था! इस समय उनके अनुयायी पांच सन्यासी थे इनने पाली भाषा में यह उपदेश दिया था जिसे बौद्ध धर्म में धर्मचक्रप्रवर्तन कहते हैं
इन्होंने अपना अंतिम उपदेश सुभद्र के वहां कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) में दिया था!
इनकी मृत्यु 483 ईसवी में अपने शिष्य चुंद के वहां शुकरमादव भोजन सामग्री खाने से हिरण्यवती नदी के तट पर हुआ इस घटना को बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहते हैं!
✴️महात्मा बुद्ध के जीवन के महान संकेत-
वृद्ध व्यक्ति,बीमार व्यक्ति,मृत व्यक्ति,सन्यासी व्यक्ति
✴️ बौद्ध धर्म के त्रिरत्न-
बुद्ध, धम्म,संघ
✴️ बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य-
दुख, दुख समुदाय, दुख निरोध, दुख निरोध गामिनी मार्ग
✴️ बौद्ध धर्म के अष्टागिक मार्ग-
बौद्ध धर्म में दुखों को दूर करने के लिए मध्य प्रतिपदा या मध्य मार्ग बताया गया है जिनके 8 सोपान होते हैं जिस कारण इसे अष्टागिक मार्ग कहा जाता हैl
प्रज्ञा- सम्यक दृष्टि और सम्यक संकल्प
सील- सम्यक वाणी, सम्यक आजीविका, सम्यक क्रमात
समाधि- सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति, सम्यक समाधि
✴️ बौद्ध धर्म का दर्शन-
अनिश्वरवाद- ईश्वर की सत्ता पर विश्वास नहीं करते थे
शुन्यतावाद- संसार की समस्त वस्तुएं शुन्य है
अनात्मवाद- आत्मा चेतना पर सर्वाधिक बोल देना
क्षणिकवाद- संसार में कोई चीज स्थिर नहीं है
✴️ बौद्ध संगीतियां-
1. प्रथम बौद्ध संगीति(483Bc)- यह बौद्ध संगीति अजातशत्रु के काल में राजग्रह (बिहार) में हुई थी जिसकी अध्यक्षता महाकस्प ने की!
2. द्वितीय बौद्ध संगीति(383Bc)- यह बौद्ध संगीति कालाशोक के समय वैशाली बिहार में हुई थी जिसकी अध्यक्षता शाबकवीर ने की थी!
3. तृतीय बौद्ध संगीति(251Bc)- यह बौद्ध संगति अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र बिहार में हुई जिसकी अध्यक्षता मोगलीपुत्ततिस्स की!
4. चतुर्थ बौद्ध संगीति(100ई.)- यह बौद्ध संगीती कुंड वन कश्मीर में कनिष्क के समय हुई इस संगिति की अध्यक्षता वासु मित्र ने की!
✴️बौद्ध साहित्य का विवरण-
1. त्रिपिटक- यह तीन ग्रंथ है जिनसे हमें बौद्ध धर्म के बारे में पता चलता है-
⚫सुत्तपिटक- इसकी रचना का आनंद थे इसके 5 भाग होते हैं यह सबसे बड़ा पिटक है!
1. दीर्घ निकाय
2. अंगूत्तर निकाय
3. मज्झिम निकाय
4. खुद्दक निकाय
5. संयुक्त निकाय
⚫ विनय पिटक- इसकी रचना उपाली ने की थी! बौद्ध भिक्षुको के अनुशासन के नियम इसी में वर्णित है!
⚫अभिधम्म पिटक- इसकी रचना सम्राट अशोक के समय मोगल्लीपुत्त तिस्स ने की इस में बौद्ध धर्म के दर्शन का उल्लेख है!
2. मिलिंदपन्हो- यूनानी शासक मिनांडर तथा बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच का संवाद है!
3. दीपवंश- इस ग्रंथ से श्रीलंका के इतिहास का पता चलता है!
4. महावंश- इसके रचनाकार महंत महानामा थे! इससे हमें मगध के राजाओं की सूची मिलती है!
5. जातक कथाएं- यह पाली भाषा में है इसमें बुद्ध के पूर्व जन्म की कहानियां है!
✴️ बौद्ध धर्म को संरक्षण देने वाले राजा-
बिंबिसार और उसकी पत्नी क्षेमा और उनका पुत्र अजातशत्रु!
कौशल नरेश प्रसेनजीत और उनकी पत्नी मल्लिका
कौशांबी नरेश उदयन और उनकी पत्नी समावती
अवंती नरेश पद्योत
मौर्य नरेश अशोक और दशरथ, कुषाण नरेश कनिष्क
हर्षवर्धन( अंतिम राजा जिसने बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया)
✴️बौद्ध धर्म से जुड़े मुख्य तथ्य-
महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्य आनंद के कहने में संघ में औरतों का प्रवेश किया!
इनके चचेरे भाई देवव्रत ने इन्हें दो बार मारने की कोशिश की!
महात्मा बुद्ध ने श्रावस्ती के डाकू अंगुलिमाल को अपना शिष्य बनाया
बुद्ध ने तपस्सु और भल्लिक नामक दो शूद्रों को अपना शिष्य बनाया!
महात्मा बुद्ध ने अपने सबसे अधिक उपदेश कौशल की राजधानी श्रावस्ती में दिए!
बौद्ध धर्म का प्रचार का मुख्य केंद्र मगध था!
बौद्ध धर्म के सबसे अधिक मठ सिक्किम में है!
✴️ बौद्ध धर्म से जुड़े मठ-
जम्मू और कश्मीर में स्थित मठ- हेमिस मठ, माथे मठ, थाकसे मठ
अरुणाचल प्रदेश में स्थित मठ- नामग्याल मठ और लवांग मठ( भारत का सबसे बड़ा बौद्ध मठ)
सिक्किम के मठ- रूमटेक मठ
हिमाचल प्रदेश के मठ- ताबों मठ( इसे हिमाचल का अजंता कहा जाता)
✴️ बौद्ध धर्म के संप्रदाय- बौद्ध धर्म के दो संप्रदाय हैं-
1.हीनयान संप्रदाय-
इसका अर्थ होता है निम्न मार्ग
इस संप्रदाय के ग्रंथ पाली भाषा में होते थे
यह महात्मा बुद्ध को महापुरुष मानते थे!
2. महायान संप्रदाय-
इसका अर्थ होता है- उत्कृष्ट मार्ग
इनके ग्रंथ संस्कृत भाषा में होते थे
यह महात्मा बुद्ध को देवता मानते हैं